चंपारण की खबर : चाकू की धार परखने में लगा है जवान होती युवा पीढ़ी, दो की हत्या

मोतिहारी

मोतिहारी, राजन द्विवेदी। बिहार के पूर्वी चंपारण जिला में जवान होती पीढ़ी हिंसा और अति उग्रता का शिकार हो रही है। इंसानियत इतनी कठोर हो चली है कि मामूली बातों में भी आदमी – आदमी के बदन पर चाकू की धार परखने लगा है। पिछले 4 दिनों में दो जवान उम्र के बच्चों की हत्या कर दी गयी है। दोनों ही हत्याओं में हम उम्र दोस्तों की भूमिका उभरकर सामने आयी है।

हालिया घटना गुजरी गुरुवार की शाम में घटित हुई है। छतौनी थानाक्षेत्र के हवाई अड्डा क्षेत्र में एक दोस्त ने दूसरे दोस्त की चाकू मारकर हत्या कर दी। जांच में पुलिस को जानकारी मिली है कि छोटा बरियारपुर निवासी शशिभूषण कुशवाहा के 16 वर्षीय पुत्र गोलू कुमार और हत्यारे दोस्त नितेश कुमार के बीच रुपये के लेन-देन में विवाद हुआ और नितेश ने गोलू को चाकू से इस कदर गोदा कि अस्पताल पहुंचकर उसकी मौत हो गयी।

इससे पहले 23 फरवरी को मुफसिल थानाक्षेत्र के हराज टिकुलिया बांध के किनारे से पतौरा बनकट ग्रामवासी युवक विशाल कुमार का शव पुलिस ने बरामद किया था। विशाल की गला रेतकर हत्या की गयी थी। वह इंटर का छात्र था। पुलिस जांच से पता चला कि विशाल की अपने ही ग्रामीण हमउम्र आदित्य और रवि से गहरी दोस्ती थी। तीनों साथ-साथ रिल्स बनाया करते थे।

इस प्रगाढ़ता में विशाल और रवि की बहन के बीच प्रेम सम्बन्ध विकसित हो गया। रवि को जानकारी मिली तो उसने आदित्य का साथ लेकर विशाल के हत्या की साजिश रची। बिरियानी खाने के बहाने विशाल को हराज टिकुलिया बांध के किनारे दोनों दोस्त ले गए। पहले तीनों ने एक साथ बिरियानी खायी और फिर रवि और आदित्य ने मिलकर चाकू से विशाल का गला रेत दिया।

दोनों ही घटनाएं जवान होती पीढ़ी की है। दोनों ही घटनाओं के कारण ऐसे हैं जिसके लिए हत्या जैसे कठोर कदम उठाना सहज नहीं मन जा सकता। दोनों ही हत्याओं में दोस्त ही दोस्त का हत्यारा है। इसके कारण और निवारण पर पूर्व पत्रकार एवं वरिष्ठ अधिवक्ता रमाकांत पाण्डेय ने संवाद एजेंसी “यूनीवार्ता” को अपनी प्रतिक्रिया दी, “सामाजिक वातावरण को हमने हिंसक बना दिया है।

चौक-चौराहों पर मांस के कारोबार ने हिंसा की दुकान खोल रखी है और घर के अंदर फ़िल्म के हिंसक कारोबार ने। अब तो हर हाथ में सेलफोन के स्क्रीन पर वो सबकुछ उपलब्ध है, जिसकी इजाजत कोई सभ्य समाज नहीं देता। ये जायकेदार आभासी दुनियां हमारे बच्चों से मासूमियत छीनकर उनमें कठोरता भर रही है।