बीपी डेस्क। कृषि मंत्री श्री राम कृपाल यादव ने आज बामेती सभागार में प्राकृतिक खेती पर आयोजित एक दिवसीय राज्यस्तरीय कार्यशाला एवं जागरूकता कार्यक्रम का शुभारम्भ किया। इस अवसर पर उन्होंने कहा कि अब समय आ गया है कि हम अपनी जड़ों की ओर लौटें और प्राकृतिक खेती को अपनाकर मिट्टी, पानी और पर्यावरण की रक्षा करें। उन्होंने कहा कि रासायनिक खेती से मिट्टी की सेहत पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है, जबकि प्राकृतिक खेती कम लागत, अधिक लाभ और सुरक्षित उत्पादन का मार्ग प्रशस्त करती है। इस अवसर पर सचिव कृषि विभाग श्री नर्मदेश्वर लाल, कृषि निदेशक श्री सौरभ सुमन यादव भी उपस्थित थे।
मंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी के नेतृत्व में देशभर में प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने का व्यापक अभियान चलाया जा रहा है। साथ ही, मुख्यमंत्री श्री नीतीश कुमार जी के मार्गदर्शन में बिहार सरकार भी किसानों को रसायन मुक्त खेती की ओर प्रोत्साहित कर रही है। राज्य में जैविक कॉरिडोर, प्राकृतिक खेती प्रशिक्षण कार्यक्रम एवं अनुदान योजनाएँ संचालित की जा रही हैं ताकि किसान बिना किसी आशंका के इस दिशा में आगे बढ़ सकें।
कार्यक्रम के दौरान प्राकृतिक खेती योजनान्तर्गत चयनित किसानों को 2 हजार रुपये प्रति एकड़ की दर से कुल 10 करोड़ रुपये की प्रोत्साहन राशि SNA SPARSH के तहत DBT के माध्यम से उनके बैंक खातों में अंतरित करने हेतु प्रतीकात्मक चेक प्रदान किया गया। साथ ही चयनित कृषि सखियों को 5 हजार रुपये प्रतिमाह सहायता राशि एवं 4 हजार रुपये मोबाइल क्रय हेतु कुल 2.10 करोड़ रुपये की राशि DBT के माध्यम से हस्तांतरित करने की घोषणा की गई।
राज्य में प्राकृतिक खेती को क्लस्टर आधारित मॉडल के तहत लागू किया जा रहा है। सभी 38 जिलों में 400 क्लस्टर चयनित किए गए हैं, जिनके माध्यम से 20 हजार हेक्टेयर (50 हजार एकड़) क्षेत्र को प्राकृतिक खेती के अंतर्गत लाया गया है। लगभग 50 हजार किसानों को प्रशिक्षण, तकनीकी मार्गदर्शन एवं संसाधन सहयोग प्रदान किया जा रहा है।
योजना के तहत प्रति किसान 4 हजार रुपये वार्षिक (2 हजार रुपये खरीफ एवं 2 हजार रुपये रबी) प्रोत्साहन राशि दी जा रही है, जिससे वे जीवामृत, बीजामृत, घनजीवामृत, निमास्त्र एवं दशपर्णी अर्क जैसे जैविक उपादान तैयार कर सकें या जैव उपादान संसाधन केंद्रों से क्रय कर सकें।
प्राकृतिक खेती एक ऐसी पद्धति है जिसमें स्थानीय बीज, देसी गाय के गोबर एवं गोमूत्र आधारित जैविक घोलों का उपयोग कर मिट्टी की उर्वरता बढ़ाई जाती है, जल संरक्षण होता है तथा फसल की गुणवत्ता में सुधार होता है। रसायन मुक्त उत्पाद उपभोक्ताओं के लिए सुरक्षित एवं पोषक आहार प्रदान करते हैं। इस कार्यक्रम में कृषि विभाग वरिष्ठ पदाधिकारीगण, कृषि वैज्ञानिक, विभिन्न जिलों से आए किसान, कृषि सखी एवं मीडिया प्रतिनिधि उपस्थित रहे।
