शिक्षा में राजनीति नहीं, बल्कि राष्ट्रनीति होनी चाहिए : राधामोहन सिंह

मोतिहारी

एमजीएसयू का एजुकेशन कॉन्क्लेव 2026 राष्ट्रीय शिक्षा संवाद का बना वृहद राष्ट्रीय मंच

50 से अधिक कुलपति, शिक्षाविद्, उद्योग विशेषज्ञ एवं नीति-निर्माताओं की रही सहभागिता

मोतिहारी, राजन द्विवेदी। महात्मा गांधी प्रेक्षागृह में महात्मा गांधी केंद्रीय विश्वविद्यालय, बिहार द्वारा “भारत की परिवर्तनकारी शिक्षा क्रांति” विषय पर एक दिवसीय भव्य एजुकेशन कॉन्क्लेव 2026 का सफल एवं ऐतिहासिक आयोजन किया गया। देशभर से आए लगभग 50 से अधिक विशिष्ट अतिथियों, कुलपतियों, उद्योग जगत के प्रतिनिधियों, शिक्षाविदों, शोधकर्ताओं एवं नीति-निर्माताओं की गरिमामयी उपस्थिति ने इस आयोजन को राष्ट्रीय शिक्षा विमर्श का महाकुंभ बना दिया।

कार्यक्रम की शुरुआत माँ सरस्वती की प्रतिमा के समक्ष दीप प्रज्ज्वलन तथा विश्वविद्यालय कुलगीत के साथ हुई।
उद्घाटन सत्र के मुख्य अतिथि पूर्वी चंपारण के सांसद श्री राधा मोहन सिंह रहे। कार्यक्रम की अध्यक्षता एवं स्वागत संबोधन विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. संजय श्रीवास्तव ने किया।

इस अवसर पर विशिष्ट अतिथि के रूप में यूजीसी के पूर्व उपाध्यक्ष प्रो. दीपक श्रीवास्तव, नालंदा विश्वविद्यालय की पूर्व कुलपति प्रो. सुनैना सिंह, यूनिवर्सिटी ऑफ मैसाचुसेट्स (अमेरिका) के प्रो. बलराम सिंह,
आईआईआईटी रांची के निदेशक प्रो. राजीव श्रीवास्तव मंचासीन रहे। मुख्य अतिथि राधा मोहन सिंह ने कहा कि “शिक्षा में राजनीति नहीं, बल्कि राष्ट्रनीति होनी चाहिए।” उन्होंने शिक्षा को चरित्र निर्माण, नैतिक मूल्यों और राष्ट्रप्रेम से जोड़ते हुए युवाओं को राष्ट्र निर्माण की मुख्य शक्ति बताया।

महात्मा गांधी केंद्रीय विश्वविद्यालय के मुख्य प्रॉक्टर प्रो. प्रसून दत्त सिंह ने एजुकेशन कॉन्क्लेव की विस्तृत रूपरेखा प्रस्तुत करते हुए कार्यक्रम की अवधारणा, उद्देश्यों एवं विभिन्न तकनीकी सत्रों की संरचना पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि यह कॉन्क्लेव शिक्षा, नीति, उद्योग और समाज के बीच संवाद स्थापित कर भविष्य उन्मुख शिक्षा व्यवस्था विकसित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है।

  • शिक्षा मनुष्य की तीसरी आंख : प्रो. संजय श्रीवास्तव

कुलपति प्रो. संजय श्रीवास्तव ने अपने अध्यक्षीय संबोधन में कहा कि शिक्षा समाज और राष्ट्र निर्माण की सबसे सशक्त आधारशिला है। उन्होंने कहा कि वर्तमान समय पारंपरिक भारतीय ज्ञान और आधुनिक तकनीक के समन्वय का है तथा विश्वविद्यालय भारतीय ज्ञान परंपरा को आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, नवाचार और बहुविषयी शिक्षा से जोड़ने के लिए निरंतर प्रयासरत है।

उन्होंने आगे कहा कि यह कॉन्क्लेव केवल एक शैक्षणिक आयोजन नहीं बल्कि नीति, उद्योग और अकादमिक जगत के बीच संवाद स्थापित करने का राष्ट्रीय मंच है, जो विद्यार्थियों को भविष्य की चुनौतियों के लिए तैयार करेगा और विकसित भारत के निर्माण में योगदान देगा।

प्रो. सुनैना सिंह ने बिहार को ज्ञान और परंपरा की ऐतिहासिक भूमि बताते हुए शिक्षा को रटने की संस्कृति से बाहर निकालकर रचनात्मक एवं शोध आधारित बनाने पर बल दिया। प्रो. बलराम सिंह ने भारतीय प्रतिभा की वैश्विक क्षमता का उल्लेख करते हुए मौलिक शोध और नवाचार आधारित शिक्षा को समय की आवश्यकता बताया।

प्रो. दीपक श्रीवास्तव ने राष्ट्रीय शिक्षा नीति (2020) के प्रभावी क्रियान्वयन पर बल देते हुए कहा कि प्रत्येक विश्वविद्यालय को अपनी स्थानीय आवश्यकताओं के अनुरूप नवाचारपूर्ण शैक्षणिक मॉडल विकसित करने होंगे। प्रो. राजीव श्रीवास्तव ने कहा कि तकनीक शिक्षक का विकल्प नहीं बल्कि शिक्षा को अधिक प्रभावी और समावेशी बनाने का सशक्त माध्यम है।

-राष्ट्रीय शिक्षा विमर्श का केंद्र बना एमजीएसयू

दिनभर चले विचार-मंथन में यह स्पष्ट रूप से उभरकर सामने आया कि विश्वविद्यालय केवल शिक्षा प्रदान करने वाले संस्थान नहीं, बल्कि सामाजिक परिवर्तन, नवाचार और राष्ट्र निर्माण के प्रमुख केंद्र हैं। एजुकेशन कॉन्क्लेव 2026 ने महात्मा गांधी केंद्रीय विश्वविद्यालय को राष्ट्रीय स्तर पर शिक्षा संवाद के अग्रणी मंच के रूप में स्थापित करते हुए नीति, शोध और उद्योग जगत के बीच सार्थक सहयोग की नई दिशा प्रदान की।