Bihar News : ट्रायल में ही धड़ाम हुआ रोपवे, खाली ट्रॉली का वजन नहीं उठा पाया पिलर

सासाराम

रोहतास, अरविंद सिंह। प्राचीन रोहतास गढ़ किला और रोहितेश्वर धाम मंदिर तक पहुंच को आसान बनाने के लिए निर्मित रोपवे परियोजना अब अंतिम चरण में पहुंच गई है।ऐसे में इसका सफल ट्रायल हो चुका था। वहीं आज दूसरे ट्रायल के दौरान ही “रोपवे” धराशाई हो गया. रोपवे के कई पिलर उखड़ गए और केविन झूला पहाड़ से नीचे जा गिरा. यह तो गनीमत थी कि केबिन डोला में कोई सवार नहीं था नहीं तो बड़ा हादसा हो सकता था।

रोहतास में ट्रायल में ही धड़ाम हुआ रोपवे: इस घटना के सामने आने के बाद रोपवे के गुणवत्ता पर सवाल उठने लगे हैं। यह रोपवे कैमूर पहाड़ी के रोहतासगढ़ किला पर जाने के लिए बन रहा था।वहीं इसे लोग कथित तौर पर भ्रष्टाचार से जुड़ा बता रहे हैं।

ट्रॉली का वजन नहीं उठा पाया पिलर: ट्रायल पूरा होने से पहले ही रोपवे के कई खंबे उखड़ गये. साथ ही ट्रायल के दौरान ही लोगों के बैठने वाला केबिन-डोला भी टूट कर नीचे गिर गया। गनीमत रही कि ट्रायल के दौरान झूला केबिन में कोई व्यक्ति सवार नहीं था, जिस कारण बड़ा हादसा टल गया।

बता दे कि आज अभियंताओं और तकनीकी विशेषज्ञ की मौजूदगी में रोपवे का ट्रायल शुरू किया गया था. जैसे ही खाली केबिन डोली को रोपवे के सहारे अकबरपुर की तरफ से रोहतासगढ़ किला की ओर भेजा गया, थोड़ी ही दूर जाकर रोपवे के लिए बना पिलर धराशाई हो गया. जिसके बाद ताबड़तोड़ कई पिलर जमीन पर गिर गए। देखते ही देखते पूरा रोपवे केबिन सहित सभी मशीन धराशाई होकर नीचे गिर गई।

नए साल के मौके पर इसका लोकार्पण होना था।13 करोड़ 65 लाख की लागत से पिछले 6 सालों से इसका निर्माण कार्य चल रहा था। वर्ष 2019 में सीएम नीतीश कुमार ने इसका शिलान्यास किया था, लेकिन आज ट्रायल के दौरान ही रोपवे धराशाई हो गया,जिसको लेकर स्थानीय लोगों में काफी निराशा है।

लोगों को उम्मीद थी कि सीएम नीतीश कुमार के इस ड्रीम प्रोजेक्ट से उन्हें लाभ मिलेगा।रोपवे के शुरू हो जाने से 70 किलोमीटर का रास्ता चंद मिनट का हो जाएगा, लेकिन यह सपना सपना ही रह गया, कोलकाता की रोपवे एंड रिसोर्स प्राइवेट लिमिटेड कंपनी के द्वारा ट्रालियों के साथ ट्रायल किया जा रहा था।निर्माण कार्य में कई एजेंसी लगी हुई है, जिनमें राग खींचना, टिकट काउंटर, स्टेशन निर्माण और बिजली व्यवस्था के लिए अलग-अलग कंपनियां कार्यरत हैं।

2020 में निर्माण कार्य शुरू: करीब 1324 मीटर लंबाई वाले इस रोपवे में कुल पांच टावर लगाए गए हैं, इनमें तीसरे और चौथे टावर के बीच लगभग 40 डिग्री की चढ़ाई है जो यात्रियों के लिए विशेष रूप से रोमांचकारी अनुभव साबित होगी. 2 सपोर्ट टावर हैं। निर्माण कार्य की शुरुआत 12 फरवरी 2020 को हुई थी।

कई तकनीकी अड़चनों और कठिनाइयों के बावजूद अब यह परियोजना तकरीबन पूर्ण होने के कगार पर थी, लेकिन जिस तरह से रोपवे धराशाई हुआ, उससे निर्माण और गुणवत्ता पर सवाल खड़े होने शुरू हो गए हैं।रोपवे का निचला स्टेशन प्रखंड मुख्यालय से तकरीबन 100 मीटर की दूरी पर स्थित है, जबकि ऊपरी स्टेशन रोहितेश्वर धाम मंदिर के समीप बनाया गया है।

इससे श्रद्धालु और पर्यटकों को मंदिर दर्शन और किले तक पहुंचने में काफी सहूलियत होगी। वहीं ट्रॉली की खाली क्षमता 250 किलोग्राम और लोडेड क्षमता 570 किलोग्राम है।फिलहाल ट्रायल के लिए 12 ट्रोलियां लगाई गई थीं। आवश्यकता पड़ने पर आगे और ट्रोलिया जोड़ने की भी बात थी।

“13 करोड़ 65 लाख रुपए की यह परियोजना भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ गई. यहां के लोगों के सपने टूट गए। यह परियोजना मुख्यमंत्री नीतीश कुमार का ड्रीम प्रोजेक्ट है. इससे पर्यटन को बढ़ावा मिलता है, लेकिन जिस तरीके से ट्रायल के दौरान रोपवे धराशाई हुआ, यह कहीं ना कहीं बड़ी लापरवाही है. पूरे मामले की जांच हो और दोषियों पर कार्रवाई हो.”

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *