सीतामढ़ी, रविशंकर। नीतीश कुमार की सुशासन की सरकार में भ्रष्टाचार के मामले में जीरो टॉलरेंस वाली नीति पर सवाल उठ रहे हैं। विजिलेंस की लगातार कार्रवाई के बावजूद कुछ सरकारी अफसर-कर्मचारी अवैध वसूली वाली भ्रष्ट कारगुजारी नहीं छोड़ रहे हैं। सिर्फ सीतामढ़ी जिले में करीब तीन दर्जन सरकारी साहब और बाबू रिश्वत के पैसे के साथ विजिलेंस के हत्थे चढ़ चुके हैं। इससे बाकी साहब और बाबू कोई सबक नहीं ले रहे हैं। इसी का नतीजा है कि न तो रिश्वतखोरी रुक रही है और रिश्वतखोर बच रहे हैं।
यानी भ्रष्टाचार को लेकर घोषित जीरो टॉलरेंस वाली नीति को कई सरकारी सेवकों ने ताक पर रख दिया है। इसे ऐसे भी समझ सकते हैं कि सीतामढ़ी और शिवहर जिले के अबतक करीब तीन दर्जन सरकारी सेवक विजिलेंस के हाथों गिरफ्तार हो चुके है। 5 जनवरी की देर शाम सीतामढ़ी जिला मुख्यालय स्थित कैलाशपुरी में शिवहर जिले के पिपराही अंचल के राजस्व कर्मचारी रामकृत महतो को विजिलेंस ने तब दबोचा, जब वह एक व्यक्ति से जमाबंदी में सुधार के नाम पर 10 हजार रुपये रिश्वत ले रहा था।
खबर है कि रामकृत पहले से भ्रष्टाचार के मामले में फंसा था। इससे उबरने के लिए वह हर संभव कोशिश कर ही रहा था कि विजिलेंस के हत्थे चढ़ गया। वह कुछ ही महीने में रिटायर भी होने वाला था। 23 दिन के अंदर सीतामढ़ी जिले में रामकृत महतो दूसरे सरकारी सेवक हैं, जिन्हें रिश्वत लेते गिरफ्तार किया गया है। इससे पहले 13 दिसंबर 25 को विजिलेंस ने महिला थाना के होमगार्ड जवान योगेंद्र साह को रिश्वत के 15 हजार रुपयों के साथ दबोच लिया था।
इस मामले में महिला थाने की सब इंस्पेक्टर ममता कुमारी का भी नाम आया था। आरोप है कि दोनों एक केस में आरोपितों को जमानत दिलाने में मदद करने के नाम पर 15 हजार रुपये वसूल रहे थे। रिश्वत लेते जिन ‘साहबों’ (अफसरों) की गिरफ्तारी की गई थी, उनमें सबसे पहला नाम है जेल अधीक्षक रहे प्रेम कुमार का। साल 2006 में जेल के ठेकेदार से एक लाख रुपये रिश्वत लेते प्रेम कुमार विजिलेंस के हत्थे चढ़े थे। उन्हें जेल में भी काफी समय तक रहना पड़ा था।
बाद में सेवा मुक्त कर दिए गए थे। बथनाहा प्रखंड के पूर्व बीइओ रामाधार यादव साल 2007 में मात्र 2000 रुपये रिश्वत के साथ पकड़ गए थे। उनकी नौकरी चली गई थी। राष्ट्रीय बचत के पूर्व कार्यपालक अधिकारी प्रदीप कुमार को भी रिश्वत के साथ रंगे हाथों पकड़ा गया था। मार्च 2023 में मिड डे मील योजना के पूर्व डीपीओ संजय कुमार देव कन्हैया रिश्वत लेते निगरानी टीम के हत्थे चढ़े थे। फिलहाल वे रिटायर हैं।
सरकार उनकी पूरी पेंशन जब्त कर चुकी है। ड्रग इंस्पेक्टर विनोद कुमार नकद दो लाख रुपये रिश्वत लेते गिरफ्तार हुए थे। उनसे पहले पूर्व सिविल सर्जन गिरफ्तार हुए थे। निगरानी टीम के हत्थे चढ़े अन्य अधिकारियों में वाणिज्य कर पदाधिकारी, बथनाहा बीईओ रामाश्रय यादव, बेला थानाध्यक्ष प्रेम शंकर सिंह, रुन्नीसैदपुर के जूनियर इंजीनियर समेत अन्य शामिल हैं। बथनाहा प्रखंड के पंचायत सचिव अशोक कुमार रिश्वत लेते पकड़े गए थे।
मानिक चौक के प्रधान शिक्षक, रुन्नीसैदपुर थाना के जमादार रामपुकार साफी, पुनौरा ओपी के जमादार त्रिभुवन प्रसाद सिंह और परिहार के जगदर के पूर्व मुखिया दिनेश भी निगरानी के हत्थे चढ़ चुके हैं। बथनाहा अंचल के तात्कालीन क्लर्क हुलास प्रसाद को रिश्वत लेना महंगा पड़ा था। उनकी नौकरी ही चली गयी थी।
