बीपी डेस्क। सड़कों के कायाकल्प की दिशा में केंद्र और राज्य सरकार के साझा प्रयासों से बिहार की तस्वीर पूरी तरह बदलने वाली है। इस साल राज्य को न केवल छह लेन वाली अत्याधुनिक सड़कें मिलेंगी, बल्कि एक्सप्रेस-वे और एक्सेस कंट्रोल्ड हाईवे जैसी बड़ी परियोजनाओं की सौगात भी मिलने जा रही है। इससे न केवल आम जनता का सफर सुगम होगा, बल्कि व्यापार और आर्थिक गतिविधियों को भी नई गति मिलेगी।
बिहार के सड़क इतिहास में पहली बार छह लेन वाले नेशनल हाईवे का सपना इस साल हकीकत बनने जा रहा है। वाराणसी से औरंगाबाद को जोड़ने वाली बहुप्रतीक्षित छह लेन सड़क परियोजना अपने अंतिम पड़ाव पर है। उम्मीद जताई जा रही है कि नए साल की पहली छमाही में यह कार्य पूरा हो जाएगा।
इसके चालू होने से बिहार के लोगों के लिए उत्तर प्रदेश के रास्ते दिल्ली तक का सफर न केवल तेज होगा, बल्कि अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप आरामदायक भी होगा। इसी कड़ी में, औरंगाबाद से चोरदाहा तक का सिक्स लेन खंड भी पूरा होने वाला है, जो झारखंड और पश्चिम बंगाल की ओर जाने वाले भारी वाहनों और यात्रियों के लिए लाइफलाइन साबित होगा।
इस वर्ष बिहार को अपना पहला एक्सेस कंट्रोल्ड हाईवे (आमस-दरभंगा) मिलने जा रहा है। हालांकि इसका लक्ष्य पहले 2025 था, लेकिन अब इसे 2026 तक पूरा करने की तैयारी है। यह एक ऐसी सड़क होगी जहाँ प्रवेश और निकास के निश्चित बिंदु होंगे, जिससे वाहन बिना किसी ट्रैफिक बाधा के तेज रफ्तार से चल सकेंगे।
इसके अलावा, चकिया-बैरगनिया और परसरमा-सहरसा-महिषि जैसी महत्वपूर्ण दो-लेन सड़कों का जाल भी इस साल पूरा हो जाएगा, जिससे सुदूर ग्रामीण इलाकों की कनेक्टिविटी जिला मुख्यालयों से मजबूत होगी।
