बीपी डेस्क। मकर संक्रांति के अवसर पर बीजेपी के राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष बनने के बाद पहली बार नितिन नवीन ने पटना में एक नहीं, बल्कि दो जगह दही-चूड़ा भोज का आयोजन कर राजनीतिक हलकों में खास संदेश दे दिया। नितिन नवीन का यह आयोजन इसलिए भी खास माना जा रहा है, क्योंकि राष्ट्रीय स्तर की जिम्मेदारी संभालने के बाद यह उनका पहला बड़ा सार्वजनिक और राजनीतिक कार्यक्रम है।
एक ओर जहां उन्होंने बड़े नेताओं और मीडिया के लिए अलग मंच चुना, वहीं दूसरी ओर कार्यकर्ताओं के लिए अपने आवास के दरवाजे खोलकर संगठन के प्रति अपनी प्राथमिकता भी स्पष्ट कर दी। नितिन नवीन का पहला दही-चूड़ा भोज पटना न्यू क्लब में सुबह 11 बजे से आयोजित किया गया।
यहां मुख्यमंत्री नीतीश कुमार सहित एनडीए के वरिष्ठ मंत्री, विधायक और राजनीतिक दिग्गजों के उपस्थिती रही। यह आयोजन राजनीतिक संवाद और सियासी मेलजोल का केंद्र बना, जहां सत्ता पक्ष की एकजुटता का संदेश भी गया। वहीं, दूसरा भोज नितिन नवीन ने अपने मंत्री आवास पर आयोजित किया, जिसमें बीजेपी के प्रदेश, विधानसभा और पटना महानगर स्तर के कार्यकर्ताओं को आमंत्रित किया गया।
माना जा रहा है कि इस आयोजन में हजारों की संख्या में कार्यकर्ता पहुंचे, जिससे यह साफ हो गया कि नितिन नवीन संगठन के आधार को मजबूत करने पर खास ध्यान दे रहे हैं। अपने आवास पर हुए भोज में कार्यकर्ताओं के लिए चूड़ा-दही के साथ खिचड़ी, तिलकुट, चटनी, पापड़, रायता और मिठाई की विशेष व्यवस्था की गई थी।
यह आयोजन सिर्फ भोज नहीं, बल्कि कार्यकर्ताओं के साथ सीधा संवाद और भरोसे का प्रतीक भी बना। हर साल मकर संक्रांति पर भोज देने की परंपरा निभाने वाले नितिन नवीन ने इस बार इसे और व्यापक रूप दिया। इस भोज में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार, डिप्टी सीएम सम्राट चौधरी और विजय सिन्हा, विधानसभा अध्यक्ष प्रेम कुमार, प्रदेश अध्यक्ष संजय सरावगी सहित एनडीए के सभी घटक दलों के नेताओं को आमंत्रण भेजा गया।
बीजेपी के साथ जदयू, हम और रालोमो के नेताओं की मौजूदगी ने यह साफ कर दिया कि एनडीए भीतर समन्वय और एकजुटता का संदेश देना चाहता है। बताते चलें कि हाल के दिनों में दही-चूड़ा भोज बिहार की राजनीति में सियासी संवाद का अहम माध्यम बन गया है। गुरुवार को नितिन नवीन चिराग पासवान के भोज में भी शामिल हुए थे, जहां एनडीए के कई बड़े चेहरे मौजूद थे।
इससे पहले तेजप्रताप यादव और पूर्व मंत्री रत्नेश सदा के भोज भी सुर्खियों में रहे। कुल मिलाकर, नितिन नवीन का दो जगह दही-चूड़ा भोज सिर्फ परंपरा नहीं, बल्कि एक सुनियोजित राजनीतिक कदम माना जा रहा है। एक ओर शीर्ष नेतृत्व और गठबंधन को साधने की कोशिश, तो दूसरी ओर कार्यकर्ताओं के जरिए संगठन को मजबूती देने का संदेश, इस आयोजन ने नितिन नवीन की नई भूमिका और राजनीतिक रणनीति दोनों को साफ तौर पर सामने ला दिया।
