बीपी डेस्क। बिहार में नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव की ओर से नीतीश सरकार से सवाल पूछा गया है। उसके साथ ही एक्स पर सवाल को पोस्ट करते हुए तेजस्वी यादव की ओर से कहा गया है कि बिहार की सरकार इन दलीलों का तथ्यात्मक और बिंदुवार जवाब दे। उसके बाद लिखा गया है कि बिहार निवास को तोड़ने की साजिश के पीछे नीतीश सरकार की कुंठित मानसिकता और ईर्ष्या है।
वर्ष 1994 में तत्कालीन मुख्यमंत्री लालू प्रसाद द्वारा निर्मित दिल्ली स्थित बिहार निवास आज भी पूरी तरह से अस्तित्व में है और भव्य है। हाल ही में 2 करोड़ रुपये खर्च कर इसका सौंदर्यकरण कराया गया है। राज्यपाल और मुख्यमंत्री के सुइट एकदम शानदार हैं। यह इमारत अगले 50-60 साल तक मजबूती से खड़ी रह सकती है।
ऊंचाई पर होने के कारण यहां जल जमाव की भी कोई समस्या नहीं है। बावजूद इसके, इस मजबूत इमारत को जमींदोज कर नया भवन बनाने का तुगलकी फरमान जारी किया गया है। आखिर क्यों?
बिहार सरकार पर आरोप
ध्यान रहे कि इस सवाल के साथ ही ये आरोप लगाया गया है कि इसके पीछे कोई तकनीकी कारण नहीं, बल्कि घृणित मानसिकता और राजनीतिक सोच के अलावा ईर्ष्या है। एक्स पर अपने पोस्ट में तेजस्वी यादव ने आगे कहा है कि हमने जब पड़ताल की तो पता चला कि इसके पीछे कोई तकनीकी कारण नहीं, बल्कि घृणित राजनीतिक सोच व ईर्ष्या है।
दरअसल, बिहार निवास के पोर्टिको में आदरणीय लालू प्रसाद जी के नाम का शिलालेख लगा है। जब भी वहां गाड़ियां लगती हैं, तो सत्ताधीशों की नजर उस नाम पर पड़ती है। शिलापट्ट पर उद्घाटनकर्ता: लालू प्रसाद यादव का नाम लिखा देखकर इनकी छाती पर सांप लोटने लगता है। बस उस एक नाम को हटाने के लिए ये पूरी इमारत ध्वस्त कर रहे हैं ताकि अपने चहेते ठेकेदारों की जेब भर सकें और अपना नाम लिखवा सकें।
तेजस्वी ने किया पोस्ट
एक्स पर पोस्ट में बिहार सरकार पर गंभीर आरोप लगाते हुए लिखा गया है कि सरकार को शर्म आनी चाहिए कि इनका बनाया हुआ नया बिहार सदन टपक रहा है, वहां कोई जाना नहीं चाहता। जबकि, लालू जी का बनाया पुराना भवन आज भी शान से खड़ा है। बिहार आज 3 लाख करोड़ से अधिक के कर्ज में डूबा है।
राज्य का प्रत्येक व्यक्ति 25 हजार रुपये का कर्जदार है। राज्य के खजाने से प्रतिदिन 62 करोड़ रुपये और प्रतिवर्ष लगभग 28 हजार करोड़ रुपये सिर्फ कर्ज का सूद चुकाने में जा रहा है। ऐसे गरीब राज्य की गाढ़ी कमाई को सिर्फ अपनी ईर्ष्या मिटाने के लिए बर्बाद करना कहां का न्याय है? इसके अलावा आगे कहा गया है कि बिहार निवास से कहीं ज्यादा पुराना बिहार भवन है, लेकिन उसे हाथ भी नहीं लगाया जा रहा क्योंकि वहां आदरणीय लालू जी का शिलापट्ट नहीं लगा है। सारी खुन्नस सिर्फ नाम से है।
नीतीश कुमार को चैलेंज
अपने एक्स पोस्ट में तेजस्वी यादव ने कहा है कि एक भव्य, सुंदर और मजबूत इमारत को जमींदोज कर 500 करोड़ रुपये से अधिक की बर्बादी सिर्फ इसलिए की जा रही है ताकि नीतीश जी अपना नाम चमका सकें। इनकी आत्ममुग्धता और जल्दबाजी का आलम यह है कि उसी दीवार पर इन्होंने अभी से अपना शिलापट्ट भी टांग दिया है।
लेकिन नीतीश जी, एक कड़वा सच याद रखिएगा। आप आज जिनके साथ बैठे हैं, वे आपका नाम लेने वाला भी नहीं छोड़ेंगे। भविष्य में जब कभी पटना के किसी चौराहे पर आपकी प्रतिमा लगाने और आपको सम्मान देने की बारी आएगी, तो वह काम भी लालू परिवार का ही कोई लाल करेगा। यह भूल जाइए कि आपके वर्तमान सहयोगी आपका नाम कहीं लगवाएंगे, वे तो आपका इतिहास मिटाने में लगेंगे।
साथ ही नीतीश कुमार को चेतावनी देते हुए कहा गया है कि नीतीश जी, आप इमारत तुड़वा सकते हैं, शिलापट्ट हटा सकते हैं, लेकिन लालू प्रसाद यादव ने सामाजिक न्याय और गरीबों के उत्थान के लिए जो कार्य किए हैं, उसे इतिहास और बिहार की जनता के दिलों से नहीं मिटा सकते।
