बीपी डेस्क। आरजेडी सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव के बड़े बेटे तेज प्रताप यादव की एनडीए नेताओं के साथ मौजूदगी ने बिहार की राजनीति में नई बहस छेड़ दी है. उपमुख्यमंत्री विजय कुमार सिन्हा के आवास पर आयोजित दही-चूड़ा भोज में तेज प्रताप की शिरकत हुई. इसे लेकर बिहार की राजनीति में सवाल खड़े हो गए हैं.
सवाल यह है कि क्या यह सिर्फ एक सामाजिक मुलाकात है या फिर बदलते सियासी समीकरणों का इशारा? बता दें कि मकर संक्रांति के मौके पर बीजेपी और एनडीए नेताओं की ओर से दही.चूड़ा भोज का आयोजन किया गया था. इसी आयोजन में तेज प्रताप यादव को भी निमंत्रण भेजा गया. तेज प्रताप यादव ने इस निमंत्रण को स्वीकार किया और वह डिप्टी सीएम विजय कुमार सिन्हा के आवास पहुंच गए.
उनकी मौजूदगी ने वहां मौजूद सभी लोगों का ध्यान खींचा. इस कार्यक्रम में एनडीए सरकार के मंत्री दिलीप जायसवाल और कृषि मंत्री राम कृपाल यादव सहित एनडीए के तमाम नेता मौजूद थे. बिहार की राजनीति को समझने वाले इस मुलाकात को बड़े सियासी उलटफेर और बदलाव के नजरिए से देख रहे हैं.
कहा जा रहा है कि तेज प्रताप यादव का एनडीए नेताओं के साथ एक मंच पर दिखना सिर्फ संयोग नहीं है. इसके पीछे तीन बड़े संकेत देखे जा रहे हैं. इससे पहले भी तेज प्रताप यादव गोरखपुर सांसद रवि किशन के जरिए बीजेपी के नजदीक जाते नजर आए थे. अब दही.चूड़ा भोज और निमंत्रण में शामिल होकर उन्होंने बिहार का सियासी पारा चढ़ा दिया है.
बता दें कि तेज प्रताप यादव अपने पिता की पार्टी और परिवार से लगभग 2019 से नाराज चल रहे हैं. उनकी नाराजगी लगातार बढ़ती गई. बिहार की राजनीति में चर्चा इस बात की है कि तेज प्रताप यादव पारिवारिक राजनीति के भी शिकार रहे हैं. इसका नतीजा यह हुआ कि उन्हें अपने पिता की पार्टी आरजेडी से छह साल के लिए निलंबित कर दिया गया.
लिहाजा, उन्होंने अपनी जेजेडी बनाकर चुनाव लड़ा और अपने भाई तेजस्वी यादव के लिए ही चुनौती खड़ी कर दी. इस दौरान तेज प्रताप का रुख बीजेपी नेताओं के प्रति काफी सॉफ्ट नजर आया. कार्यक्रम के दौरान तेज प्रताप की मौजूदगी और एनडीए नेताओं के बयानों ने बिहार की सियासी खिचड़ी में छौंका लगा दिया है.
जहां तेज प्रताप की मौजूदगी ने अटकलों का बाजार गर्म कर दिया, वहीं मंत्री दिलीप जायसवाल और कृषि मंत्री राम कृपाल यादव ने तेज प्रताप यादव को खुली नसीहत दे डाली. उन्होंने कहा कि उन्हें अब एनडीए में शामिल हो जाना चाहिए.
