जदयू के तेज-तर्रार विधायक मंजीत सिंह को मिला राज्यमंत्री का दर्जा

पटना

पटना, बीपी डेस्क : जदयू के धाकड़ नेताओं में से एक माने जाने वाले मंजीत सिंह को राज्यमंत्री का दर्जा मिल ही गया। मंजीत कुमार सिंह का नाम भी उन 8 विधायकों में है, जिन्हें सचेतक बनाया गया है। मंजीत सिंह ने गोपालगंज की बरौली विधानसभा से विधायक हैं। एक समय ऐसा भी आया था जब मंजीत सिंह जदयू में अपनी कथित उपेक्षा से नाराज हो गए थे। हाल ये हो गया था कि वो बागी होने की कगार पर थे।

तब नीतीश कुमार ने खुद मोर्चा संभालते हुए मंजीत सिंह के लिए लेसी सिंह, राणा रंधीर और जयकुमार सिंह जैसे कद्दावर नेताओं की फौज उतार दी थी। इन सभी नेताओं के मनाने पर मंजीत सिंह माने थे।

बता दें कि मंजीत सिंह जदयू के उन विधायकों-नेताओं में गिने जाते हैं, जो विधानसभा में खड़े होते हैं तो कई बार उनकी उठाई समस्याएं सरकार के लिए भी मुश्किल खड़ी कर देती हैं। इसकी वजह ये है कि मंजीत सिंह जब मुद्दों को लेकर विधानसभा में जाते हैं, तो उससे पहले वो उस पर खुद काफी रिसर्च करते हैं।

ये कई बार देखा गया है कि मंजीत सिंह अपने उठाए जाने वाले मुद्दे की जड़ें खोद देते हैं। तब वो विधानसभा में अपने सवाल लेकर खड़े होते हैं। सवाल भी ऐसे कि किसी को कोई जवाब नहीं सूझता। वो मुद्दों को लेकर कितने गंभीर रहते हैं इसका अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि वो अपने करीबी वकील दोस्तों से भी इसको लेकर कानूनी पक्ष पहले ही समझ लेते हैं।

लेकिन एक समय ऐसा भी आया था कि मंजीत सिंह के सरकारी बंगले पर राजद विधायक ने जबरदस्ती कब्जा कर लिया था। साल था 2015, जब मंजीत सिंह विधानसभा चुनाव हार गए थे। इसके बाद कुछ ऐसा हुआ जो सियासी गलियारे में सुर्खियां बन गया। उस वक्त मंजीत सिंह ने बयान दिया था कि उनके सरकारी बंगले में राजद के एक विधायक जबरिया घुस गए।

जबकि राजद विधायक का कहना था कि वो बंगले में पूछ कर घुसे थे। दरअसल 2015 में महागठबंधन को प्रचंड जीत मिली थी। उस वक्त नीतीश लालू के साथ थे। लेकिन तब भी जदयू उम्मीदवार रहे मंजीत सिंह को हार मिली। इसके बाद नई सरकार के आते ही आवास अलॉटमेंट हुआ। सरकारी घर खाली करने के लिए हारे हुए विधायकों को एक महीने यानी 7 दिसंबर 2015 तक का समय मिला था।

लेकिन उससे पहले ही राजद के विधायक अरुण यादव ने (सहरसा) मंजीत सिंह के सरकारी बंगले में गृह प्रवेश कर लिया। इस पर मंजीत सिंह तब नियमों का हवाला देते हुए सख्त आपत्ति जता दी थी। लेकिन अब दिन बदल चुके हैं, मंजीत सिंह फिर से पावर में हैं। हालांकि मंजीत सिंह के बारे में ये भी कहा जाता है कि वो नियमों के खिलाफ जाकर न कुछ करते हैं और न ही कुछ बोलते हैं। इन्हें लॉ एबाइडिंग एमएलए भी कहा जाता है।

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