होली विशेष : शराब पर प्रतिबंध है या पीने वालों की हो रही पहरेदारी

पटना

पटना, राजन द्विवेदी। पूरे सूबे में होली का त्योहार शांतिपूर्ण तरीके से संपन्न कराने के लिए शासन ने फरमान जारी किया है। इस फरमान की खासियत यह दिखाई दे रहा है कि शराब पीने वालों की पहरेदारी की जिम्मेदारी पुलिस प्रशासन को दी गई है।

उत्पाद विभाग की टीम को शराब की आवक और निर्माण की निगरानी में लगा दी गई है। लेकिन शराब की बाजार कमोबेश लग ही रही है। भले ही होली की छापेमारी को लेकर रेट भले दुगुनी हो गई है। पुलिस प्रशासन और उत्पाद विभाग अपनी अपनी जिम्मेदारियों को पूरा करने में ढिंढोरा पीट पीटकर लगे हैं।

आखिर क्यों न करें, शराब पर प्रतिबंध जो लगी है। इसी बिहार विभिन्न हिस्सों से शराब की पकड़ा धकड़ी की सूचनाएं प्राप्त हो रही हैं। साथ ही होली में रसूखदार (मालदार) के पीने पर पहरेदारी हो रही। कई होटल में छापेमारी हो रही है तो कहीं घरों में होली की शराब पार्टी करने वाले की खोज खबर पुलिस ले रही है।

बताया जाता है कि सूबे के सभी सीमाओं से होली पर बिक्री को लेकर शराब की आवक बढी है। कुछ पकड़े जाने के लिए हैं तो बाकी दोगुनी दाम में बिक्री हो रही है। कुल मिलाकर होली शांतिपूर्ण तरीके से संपन्न कराने की पूरी तैयारी है।

शासन का संदेश सही है कि शराब खराब है। बिहार में प्रतिबंध भी है। लेकिन चहुंओर प्रबंधन भी है।भले ही शराब का यह प्रबंध अवैध है लेकिन है सभी जगह। हालांकि इसी क्रम में पूर्वी चंपारण की पुलिस सूखा नशा एवं शराब कारोबारी के खिलाफ लगातार कार्रवाई कर रही है। हजारों लिटर शराब पकड़े जा रहे हैं।

पुलिस शराब सेवन रोकने में पूरी तत्परता से लगी है। शराब पीने वाले बराबर धरे, छोड़े जा रहे हैं। जुर्माने की राशि भी खूब वसूली जा रही है। इन सबके बावजूद शराब की बिक्री बंद नहीं हो रही है। लाजिमी है कि अगर शराब बिकेगी नहीं तो लोग पियेंगे कैसे।

लेकिन जितना परिश्रम शराब सेवन को रोकने पर किया जा रहा है उतनी इमानदार कोशिश शराब की बिक्री रोकने के लिए नहीं की जा रही है। सीमा से लगे राज्यों से लगातार शराब की खेप यहां पहुंच रही है। वह भी लंबी दूरी तय करते हुए। आखिर सीमा से बिहार में शराब पहुंच कैसे रही है।

जबकि सभी सीमाओं पर चेकपोस्ट लगी है। परन्तु बड़ी बड़ी गाड़ियों में शराब भरकर आ रही है कैसे। शराब बंदी कानून का लगभग एक युग होने जा रहा है। इतने लंबे समय बीतने के बाद भी ऐसी व्यवस्था नहीं बनी कि शराब का प्रवेश रोका जाए।इस बंदी के लंबे अंतराल में जहरीली शराब से अनेक मौतें हुई हैं।

बताया जाता है कि प्रत्येक साल शराब की सेवन से कहीं न कहीं मौतें हो ही रही हैं। फिर ऐसे शराब बंदी का क्या फायदा जहां न तो जीवन ही सुरक्षित है और नहीं शराब ही बंद है। इस शराब बंदी के फायदे नुकसान को लेकर चाहे जो तर्क वितर्क हो लेकिन इतना तो तय है कि शराब बंदी कानून अबतक सफल नहीं है। सरकार को गंभीरता से विचार करना चाहिए।