सीएम नीतीश कुमार का ऐलान- राज्य में जल्द ही 45 हजार नए शिक्षकों की होगी बहाली

पटना

बीपी डेस्क। बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने बुधवार को समृद्धि यात्रा के दौरान अररिया का दौरा किया. इस दौरान उन्होंने राज्य में शिक्षा व्यवस्था को मजबूत करने को लेकर बड़ा ऐलान किया. मुख्यमंत्री ने कहा कि बिहार में जल्द ही 45 हजार नए शिक्षकों की बहाली की जाएगी. इससे स्कूलों में शिक्षकों की कमी दूर होगी और पढ़ाई का स्तर बेहतर होगा.

उन्होंने कहा कि उनकी सरकार ने शिक्षा के क्षेत्र में लगातार काम किया है. पहले राज्य के स्कूलों में शिक्षकों की भारी कमी थी. इस समस्या को दूर करने के लिए सरकार ने बड़े पैमाने पर शिक्षक बहाली की प्रक्रिया शुरू की.

उन्होंने बताया कि पहले नियोजित शिक्षकों की नियुक्ति की गई. इसके बाद BPSC के माध्यम से भी शिक्षकों की भर्ती की गई. आज बिहार में सरकारी शिक्षकों की संख्या बढ़कर 5 लाख 24 हजार से अधिक हो चुकी है. अब इसी कड़ी में 45 हजार और शिक्षकों की बहाली की प्रक्रिया चल रही है.

साथ ही मुख्यमंत्री ने कहा कि 2006 से ही सरकार ने बालिका शिक्षा को बढ़ावा देने के लिए कई योजनाएं शुरू कीं. छात्राओं को साइकिल और अन्य सुविधाएं दी गईं. इन योजनाओं का असर यह हुआ कि स्कूलों में लड़कियों की संख्या तेजी से बढ़ी.

उन्होंने कहा कि शिक्षा को बेहतर बनाने के लिए सरकार लगातार नई पहल कर रही है. मुख्यमंत्री ने कहा कि उनकी सरकार ने राज्य में सड़कों और पुल-पुलियों का बड़े पैमाने पर निर्माण कराया. इसका फायदा यह हुआ कि अब राज्य के किसी भी जिले से पटना पहुंचना पहले से काफी आसान हो गया है.

उन्होंने बताया कि पहले कई जिलों से पटना आने में छह घंटे या उससे ज्यादा समय लगता था. अब सबसे दूर के जिलों से भी करीब पांच घंटे में राजधानी पहुंचना संभव हो गया है. वहीं मुख्यमंत्री ने कहा कि उनकी सरकार ने महिलाओं के सशक्तिकरण के लिए कई योजनाएं शुरू कीं. 2015 में सात निश्चय योजना शुरू हुई और 2020 में इसका दूसरा चरण लागू किया गया.

अब सात निश्चय-3 के तहत भी कई काम किए जा रहे हैं.
इस दौरान मुख्यमंत्री ने पुराने दौर की स्थिति का जिक्र करते हुए विपक्ष पर भी निशाना साधा. उन्होंने कहा कि 24 नवंबर 2005 से पहले बिहार में कानून व्यवस्था की हालत खराब थी. लोग शाम के बाद घर से निकलने से डरते थे. उन्होंने आरोप लगाया कि उस समय स्वास्थ्य, शिक्षा और सड़क जैसी बुनियादी सुविधाओं की स्थिति बहुत खराब थी. कई साल तक सत्ता में रहने के बावजूद उस दौर में इन क्षेत्रों में कोई बड़ा काम नहीं हुआ.