महंगाई की मार झेल रहे उद्योगों को अडानी गैस ने दी बड़ी राहत, गैस हुई सस्ती

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सेंट्रल डेस्क। दुनिया भर में चल रहे भू-राजनीतिक तनाव और लगातार बढ़ती महंगाई के बीच एक सुकून देने वाली खबर सामने आई है. ऊर्जा क्षेत्र की दिग्गज कंपनी अडानी टोटल गैस लिमिटेड (ATGL) ने अतिरिक्त प्राकृतिक गैस की कीमतों में भारी कटौती की घोषणा की है. जो गैस चंद दिनों पहले तक लगभग 120 रुपये में बिक रही थी, उसकी कीमत अब सीधे 83 रुपये के आसपास आ जाएगी.

बता दें ये दर 16 मार्च 2026 की सुबह 6 बजे से लागू हो जाएगी. इस भारी छूट का मुख्य लाभ बड़ी फैक्ट्रियों और औद्योगिक इकाइयों को मिलने जा रहा है. कंपनी के नए दिशा-निर्देशों के अनुसार, जो उद्योग अपनी निर्धारित सीमा से अधिक गैस की खपत करते हैं, उनके लिए ‘एक्स्ट्रा गैस’ या अतिरिक्त गैस के दाम में बड़ी गिरावट की गई है.

पहले इस अतिरिक्त खपत के लिए फैक्ट्रियों को 119.90 रुपये प्रति स्टैंडर्ड क्यूबिक मीटर (SCM) की दर से भारी कीमत चुकानी पड़ती थी. अब इस दर को घटाकर सीधा 82.95 रुपये कर दिया गया है. प्रति SCM करीब 37 रुपये की यह कमी उन उद्योगों के लिए एक संजीवनी की तरह है, जिनका पूरा उत्पादन चक्र प्राकृतिक गैस पर टिका है.

दरअसल, होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) के अहम समुद्री रास्ते पर जहाजों की आवाजाही बाधित होने के कारण भारत में लिक्विफाइड नेचुरल गैस (LNG) की सप्लाई चेन बुरी तरह प्रभावित हुई थी. इस गंभीर संकट को देखते हुए अडानी ग्रुप और फ्रांस की प्रमुख कंपनी टोटल एनर्जीज के इस जॉइंट वेंचर ने अपने कमर्शियल और इंडस्ट्रियल ग्राहकों के लिए एक सख्त नियम लागू किया था.

इसके तहत कंपनियों को निर्देश दिया गया था कि वे अपनी तय सीमा का केवल 40 फीसदी गैस ही इस्तेमाल करें. जो भी फैक्ट्री इस 40 फीसदी के कोटे से ज्यादा गैस जलाती थी, उस पर स्पॉट मार्केट के महंगे रेट यानी 119.90 रुपये प्रति SCM का भारी-भरकम चार्ज लगाया जा रहा था. अब सवाल यह उठता है कि ग्लोबल टेंशन के बीच अचानक यह कटौती कैसे मुमकिन हुई.

अडानी गैस प्रबंधन ने अपने ग्राहकों को भेजे गए आधिकारिक संदेश में तस्वीर बिल्कुल साफ कर दी है. अंतरराष्ट्रीय बाजार में अपस्ट्रीम गैस की कीमतों में अब नरमी आनी शुरू हो गई है.

कंपनी का स्पष्ट कहना है कि पीछे से गैस के दाम गिरे हैं और इसका सीधा फायदा ग्राहकों की जेब तक पहुंचाया जा रहा है. इसका प्राथमिक उद्देश्य केवल व्यापार करना या मुनाफा कमाना नहीं है, बल्कि मौजूदा सप्लाई संकट के बीच सिस्टम को स्थिर रखना है.