विक्रांत। वाक्या उत्तर प्रदेश के चंदौली जिले के बथावर (कुछमन) गांव का है. पेशे से कुशल किसान श्याम नारायण बारी और पत्नी सीता देवी के बीच अपार प्रेम था. अपार प्रेम इस कदर था कि पचहत्तर साल की उम्र में भी पति पत्नी द्वय एकांत वास करते हुए भोजन करते थे. पत्नी सीता देवी की दिन की शुरुआत अहले सुबह एकांत रूम में चाय की चुस्कियों के साथ हुआ करती थी.
दोनों के गृहस्थ जीवन के रथ की पहिया दौड़ती रही. उनके पांच संतान में लाल बाबू प्रसाद , अशोक कुमार, अनिल कुमार एवं दीपक कुमार के अलावा पुत्री ज्योति कुमारी उर्फ गुड़िया की परवरिश करते हुए समर्थ के अनुसार शादी कर दी. हृदय के सच्चे और एक दूसरे के प्रति अटूट प्रेंम रखने वाले पति पत्नी यानी श्याम नारायण और सीता देवी पर भगवान की असीम कृपा बनी रही..
महज साठ वर्ष की उम्र में पहुंचते ही उनके घर आंगन पोता पोती समेत नाती की किलकारियों से गूंजने लगा. दोनो युगल जोड़ी घर आंगन की किलकारियों से आनंद विभोर रहा करते थे. दो पुत्र बड़े शहर में व्यवसाय को कूच कर गए. अपने माता पिता के आर्शिवाद एवं स्नेह के बूते विकास पथ पर बढ़ते रहे.
लेकिन दोनों युगल जोड़ी श्याम नारायण जी बारी और सीता देवी की बढ़ते उम्र के साथ उनके स्वास्थ पर दुष्प्रभाव पड़ने लगा. सबसे पहले पति श्याम नारायण जी 78 वर्ष का अचानक स्वास्थ गिरने लगा , रोग से ग्रसित हालत मे बेहतर ईलाज को अपने संझोले पुत्र अनिल कुमार के नई दिल्ली स्थित आवास पर चले गए.
संझोले पुत्र एवं पुत्रवधु उनका अस्पताल में ईलाज कराने के बाद स्वास्थ में सुधार आने लगा. इसी बीच अस्वस्थ हालत में भी उन्हें अपनी पत्नी सीता देवी की अटूट प्यार की यादें सताने लगी. प्रकृति की गोद में रहने और गौ माता की सेवा को दिन चर्या मे शामिल रखने वाले श्याम नारायण जी अपने पैतृक गांव बथावर जाने को पुत्र से हठ करने लगे.
उधर ममता मयी मां सीता देवी भी अपने पति को देखने को व्याकुल रहती थी. दूरभाष पर होती वार्ता से असंतुष्ट रहती थी. अंत्वोगता पिता और माता की अटूट प्यार और लगाव के आगे पुत्र हार गए. नई दिल्ली से पिता संग सपरिवार पुत्र अनिल बथावर आ गए. गांव पर रहते हुए जरूरत के अनुसार बाराणसी में इलाज कराते रहे. स्वास्थ में उतार चढ़ाव का क्रम चलता रहा.
पति के स्वास्थ में विशेष सुधार नहीं पाकर ममतामयी मां सीता देवी अंदर अंदर चिंतित रहने लगी. इसी बीच बगैर परिजनों से सेवा लिए ममतामयी मां सीता देवी ने इस दुनिया को गत 4 फरवरी को सदा के लिए अलविदा बोल चल बसी. अल्प अचेतावस्था में पति श्याम नारायण जी को भनक लग गई कि उनकी अर्द्धांगिनी उनका साथ छोड़ दुनिया से अलविदा हो गई.
फिर क्या पति श्याम नारायण जी का तबियत बिगड़ने लगा. पुत्रों द्वारा उन्हें वाराणसी के बेहतर चिकित्सा संस्थानों में ईलाज को ले गए. कुछ दिनों तक ईलाज चलता रहा. इसी बीच वहां के चिकित्सकों ने हाथ खड़े कर लिए.. इसी क्रम महज एक सप्ताह के अंदर चैत्र माह के भगवान सूर्योपासना के दिन मंगलवार 24 मार्च,26 को श्याम नारायण जी ने भी इस दुनिया को अलविदा कर परलोक वासी बन गए.
वे अपने पीछे चार पुत्र पुत्र वधु एवं एक पुत्री समेत पौत्र पौत्री एवं नाती से हरे भरे परिवार छोड़ गए हैं. इस पति पत्नी के बीच अपार प्रेम और आपसी मिलन मोहब्बत के किस्से की चर्चा पूरे गांव और रिश्तेदार के बीच कायम है.
