किसान हितैषी योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन से कृषि क्षेत्र को नई ऊर्जा
बिहार एग्री इन्फ्रास्ट्रक्चर मिशन, बाजार आधुनिकीकरण और कृषि एक्सीलेरेशन से किसानों को नई मजबूती
जैविक एवं प्राकृतिक खेती, जलवायु अनुकूल कृषि कार्यक्रम और कृषि शिक्षा सुदृढ़ीकरण पर विशेष जोर
बीपी डेस्क। आज बिहार विधान परिषद में कृषि विभाग का वर्ष 2026-27 का बजट प्रस्ताव प्रस्तुत किया गया। बिहार विधान सभा में कृषि विभाग का बजट पारित होने के उपरांत कृषि मंत्री श्री राम कृपाल यादव ने कहा कि स्थापना एवं प्रतिबद्ध व्यय सहित विभागीय योजनाओं के संचालन हेतु 3446.45 करोड़ रुपये की बजट मांग सदन के समक्ष रखी गई थी, जिसे सदन ने ध्वनिमत से पारित किया।
उन्होंने इसके लिए सदन के प्रति आभार व्यक्त करते हुए इसे प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी एवं मुख्यमंत्री श्री नीतीश कुमार जी के मार्गदर्शन का परिणाम बताया। मंत्री श्री यादव ने कहा कि बिहार में कृषि विकास की अपार संभावनाओं को साकार करने के लिए वर्ष 2008 से कृषि रोड मैप के माध्यम से योजनाबद्ध तरीके से कार्य किया जा रहा है। वर्तमान में चतुर्थ कृषि रोड मैप (2023-28) का सफल क्रियान्वयन जारी है।
राज्य में मुख्य रूप से चावल, गेहूँ, मक्का, दलहन एवं तिलहन फसलों की खेती की जाती है और पिछले वर्षों में उत्पादन एवं उत्पादकता में उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई है। वर्ष 2005 की तुलना में खाद्यान्न उत्पादन तीन गुना से अधिक बढ़ चुका है। उन्होंने बताया कि राज्य सरकार के सात निश्चय-3 (2025-2030) के अंतर्गत विकासात्मक एवं किसान हितैषी कार्यक्रमों को गति दी जा रही है।
वर्तमान वित्तीय वर्ष 2025-26 में कृषि विभाग द्वारा 3272.83 करोड़ रुपये की योजनाओं का क्रियान्वयन किया जा रहा है। राज्य सरकार के संकल्प अंतर्गत “बिहार एग्री इन्फ्रास्ट्रक्चर मिशन” का गठन कर शुरूआत में 1 लाख करोड़ रूपये का निवेश किया जाना है।
इसके अतिरिक्त राज्य सरकार के संकल्प अंतर्गत प्रदेश भर में छटाई एवं ग्रेडिंग यूनिट, कोल्ड चेन चैम्बर्स, गोदाम, प्रोसेसिंग सेन्टर आदि का निर्माण करना, चावल की सुगंधित किस्में जैसे-सोनाचूर, मोकरी, कतरनी, मर्चा का उत्पादन और निर्यात बढ़ाने के लिए प्रोसेसिंग एवं पैकेजिंग यूनिट की स्थापना करना, श्री अन्न के उत्पादन को दोगुना करना, एक्जोटिक फलों जैसे-स्ट्रॉबेरी एवं ड्रैगन फ्रूट के उत्पादन एवं निर्यात को बढ़ाना तथा प्रोसेसिंग प्लांट स्थापित करना है।
इसी के अंतर्गत राज्य को कृषि स्टार्टअप का हब बनाने, जी आई टैग प्राप्त उत्पादों के विपणन हेतु एक समर्पित बाजार उपलब्ध कराने एवं ग्रामीण कृषि हाट के विकास के क्षेत्र में अग्रणी राज्य के रूप में स्थापित करने हेतु बिहार कृषि एक्सीलेरेशन मिशन के गठन हेतु सभी आवश्यक कार्य प्रारंभ कर दी गयी है।
राज्य के कुल 53 कृषि उपज बाजार प्रांगणों के आधुनिकीकरण एवं समुचित विकास का कार्य किया जा रहा है। राज्य के 20 बाजार प्रांगण ई-नाम से जुड़ चुके हैं एवं 34 बाजार प्रांगणों को जोड़ा जाना है। राज्य में ग्रामीण हाटों के सर्वांगिण विकास हेतु पंचायती राज विभाग एवं ग्रामीण विकास विभाग के साथ समन्वय स्थापित कर कार्य किया जाना है।
किसानों को उनके उत्पाद पर अंतिम उपभोक्ता मूल्य का बेहतर हिस्सा दिलाने के उद्देश्य से भंडारण, अनुदानित दर पर गोदाम एवं कोल्ड स्टोरेज का निर्माण, मूल्य संवर्धन, विपणन एवं प्रसंस्करण को प्राथमिकता देते हुए समेकित बाजार प्रबंधन पर ध्यान दिया जा रहा है। राज्य सरकार द्वारा कृषि में विकास के माध्यम से किसानों की आय में वृद्धि हेतु चहुँमूखी कार्यक्रमों का कार्यान्वयन किया जा रहा है।
कृषि शिक्षा एवं अनुसंधान को सुदृढ़ बनाने हेतु सबौर (भागलपुर) में कृषि जैव प्रौद्योगिकी महाविद्यालय तथा आरा (भोजपुर) में कृषि अभियंत्रण महाविद्यालय की आधारभूत संरचना विकसित की जा रही है। साथ ही बिहार कृषि विश्वविद्यालय, सबौर एवं डॉ. राजेंद्र प्रसाद केंद्रीय कृषि विश्वविद्यालय, पूसा में दलहन, तिलहन एवं पोषक अनाज के अनुसंधान को बढ़ावा दिया जा रहा है।
विभागीय सुदृढ़ीकरण के तहत प्रखंड उद्यान पदाधिकारी के 181 पदों पर नियुक्ति की गई है तथा पौधा संरक्षण से संबंधित 694 पदों के पुनर्गठन/सृजन की स्वीकृति दी गई है। मंत्री श्री यादव ने कहा कि किसानों के अथक परिश्रम और सरकार की योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन का परिणाम है कि वर्ष 2024-25 में राज्य में अब तक का सर्वाधिक खाद्यान्न उत्पादन हुआ है।
अंतिम आकलन के अनुसार 326.62 लाख टन खाद्यान्न उत्पादन दर्ज किया गया, जो एक ऐतिहासिक उपलब्धि है। बीज की उपलब्धता को कृषि विकास की आधारशिला बताते हुए उन्होंने कहा कि वर्ष 2024-25 में स्वीट कॉर्न एवं बेबी कॉर्न को बढ़ावा देने हेतु 10,929 किसानों के बीच 178.16 क्विंटल बीज वितरित किया गया।
दलहनी फसलों के विस्तार हेतु 4,71,521 किसानों को 65,777 क्विंटल बीज उपलब्ध कराया गया, जबकि मोटा अनाज उत्पादन बढ़ाने के लिए 75,701 किसानों के बीच 3,895.10 क्विंटल बीज वितरित किया गया।
प्रधानमंत्री राष्ट्रीय कृषि विकास योजना के अंतर्गत मखाना उत्पादन को प्रोत्साहन देने के लिए राज्य के विभिन्न जिलों में 300 लाख रुपये की लागत से 43 मखाना भंडारण संरचनाओं का निर्माण कराया गया है, जिससे किसानों को बेहतर मूल्य एवं सुरक्षित भंडारण की सुविधा प्राप्त होगी।
मंत्री ने कहा कि रासायनिक उर्वरकों के अत्यधिक उपयोग से मिट्टी की उर्वरा शक्ति पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ा है, इसलिए राज्य सरकार जैविक खेती को बढ़ावा दे रही है। बिहार राज्य जैविक मिशन के अंतर्गत सभी 38 जिलों में जैविक खेती प्रोत्साहन योजना संचालित की जा रही है, जिसके लिए वित्तीय वर्ष 2025-26 में 12.22 करोड़ रुपये स्वीकृत किए गए हैं।
किसानों को तकनीकी रूप से सशक्त बनाने के उद्देश्य से “कृषि जन कल्याण चौपाल” कार्यक्रम राज्य की सभी पंचायतों में आयोजित किया गया, जिसके माध्यम से 8,47,798 किसानों को आधुनिक कृषि तकनीक तथा विभागीय योजनाओं की जानकारी एवं प्रशिक्षण प्रदान किया गया।
अंत में मंत्री श्री यादव ने कहा कि राज्य सरकार का लक्ष्य कृषि को लाभकारी, टिकाऊ और सम्मानजनक पेशा बनाना है, ताकि बिहार का किसान आत्मनिर्भर बने और राज्य कृषि विकास के नए मानक स्थापित करे। मिट्टी की सेहत सुधारने और लोगों को रासायनिक खाद के असर से बचाने के लिए सभी जिले में कुल 50000 एकड़ जमीन पर दो साल तक क्लस्टर में प्राकृतिक खेती की जायेगी।
इसके लिए 400 क्लस्टर बनाये जायेंगे, एक क्लस्टर में 125 किसान शामिल होंगे। हर जिले से किसानों को चयनित किया जा रहा है। कृषि विज्ञान केन्द्र के सहयोग से कृषि विभाग द्वारा प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने का कार्य किया जा रहा है। राज्य में जैविक खेती को बढ़ावा देने के लिए राज्य में बिहार राज्य बीज एवं जैविक प्रमाणीकरण एजेंसी कार्यरत हैं, जो राज्य के किसानों को निःशुल्क जैविक प्रमाणीकरण की सुविधा उपलब्ध करा रही है।
जलवायु परिवर्तन औद्योगिक क्रांति के एक दुष्परिणाम के रूप में हमारे सामने उभर कर आया है जिसका असर पूरे विश्व की कृषि पर पड़ रहा है। जलवायु परिवर्तन आज किसानों के सामने सबसे बड़ी समस्या उत्पन्न कर रहा है। मॉनसून पहले की तरह नहीं रहा है, बाढ़ और सूखे की समस्या बढ़ गयी है। नये-नये तरह के कीट-व्याधि किसानों को सता रहा है।
इससे निपटने के लिए बिहार के मुख्यमंत्री की परिकल्पना से बिहार में जलवायु अनुकूल कृषि कार्यक्रम का कार्यान्वयन किया जा रहा है।उत्कृष्ट कार्य करने हेतु इंडिया वाटर फाउंडेशन संस्थान द्वारा जलवायु अनुकूल कृषि कार्यक्रम के लिए बिहार को वाटर ट्रांसवर्सैलिटी ग्लोबल अवार्ड, 2024 से सम्मानित भी किया गया है, जो हम सबों के लिए हर्ष का विषय है।
