बीपी डेस्क। राज्य में बिजली उपभोक्ताओं को एक बार फिर झटका लग सकता है। राज्य विद्युत नियामक आयोग में दाखिल नए टैरिफ प्रस्ताव के अनुसार आने वाले समय में बिजली दरों में बदलाव की तैयारी है। इस प्रस्ताव के तहत जहां बिजली कंपनियां अपनी लागत और घाटे का हवाला दे रही हैं।
वहीं आम उपभोक्ताओं की जेब पर इसका सीधा असर पड़ने की आशंका है। बिजली वितरण कंपनियों ने वर्ष 2026-27 के लिए नया टैरिफ प्रस्ताव नियामक आयोग में प्रस्तुत किया है। इसमें घरेलू, व्यावसायिक और औद्योगिक उपभोक्ताओं के लिए अलग-अलग दरों का प्रस्ताव रखा गया है।
कंपनियों का कहना है कि बढ़ती लागत, लाइन लॉस और रखरखाव खर्च के कारण टैरिफ संशोधन जरूरी हो गया है। प्रस्ताव के अनुसार बिजली कंपनियों ने करीब 67 हजार करोड़ रुपये की आवश्यकता बताई है।
इसमें ट्रांसमिशन, वितरण नेटवर्क सुधार और नई परियोजनाओं पर खर्च शामिल है। खास तौर पर 16 जिलों में बिजली व्यवस्था को मजबूत करने के लिए अतिरिक्त निवेश की बात कही गई है, ताकि आपूर्ति में सुधार किया जा सके।
अगर यह प्रस्ताव मंजूर होता है तो घरेलू उपभोक्ताओं के मासिक बिजली बिल में इजाफा तय माना जा रहा है। खासकर मध्यम और निम्न आय वर्ग के उपभोक्ताओं पर इसका ज्यादा असर पड़ सकता है। विशेषज्ञों का कहना है कि पहले से महंगाई झेल रहे लोगों के लिए यह अतिरिक्त बोझ चिंता का विषय है।
बिजली दरों में बदलाव का असर सिर्फ घरेलू उपभोक्ताओं तक सीमित नहीं रहेगा। कृषि उपभोक्ताओं और छोटे उद्योगों की लागत भी बढ़ सकती है। इससे उत्पादन खर्च बढ़ने और अंततः महंगाई बढ़ने की आशंका जताई जा रही है। किसान संगठनों ने पहले ही किसी भी बढ़ोतरी का विरोध करने के संकेत दिए हैं।
नियामक आयोग इस टैरिफ प्रस्ताव पर सार्वजनिक सुनवाई करेगा। उपभोक्ता, सामाजिक संगठन और विशेषज्ञ अपनी आपत्तियां और सुझाव रख सकेंगे। इसके बाद ही अंतिम फैसला लिया जाएगा।
आयोग का कहना है कि उपभोक्ताओं के हितों को ध्यान में रखकर ही निर्णय होगा। अब सभी की निगाहें नियामक आयोग के फैसले पर टिकी हैं। सवाल यही है कि क्या उपभोक्ताओं को राहत मिलेगी या बिजली बिल एक बार फिर झटका देगा। आने वाले दिनों में होने वाली सुनवाई इस पर तस्वीर साफ करेगी।
