Bihar Budget 2026: किसानों को सालाना ₹3000 की अतिरिक्त सीधी मदद, किसानों के बैंक खाते में आएगी राशि

पटना

बीपी डेस्क। राज्य सरकार ने कृषि क्षेत्र की कायापलट करने के लिए एक ऐसा मास्टरप्लान पेश किया है, जिससे गांवों की तस्वीर बदल जाएगी. ‘जननायक कर्पूरी ठाकुर किसान सम्मान निधि’ की घोषणा से लेकर 1 लाख करोड़ रुपये के भारी-भरकम निवेश वाले ‘बिहार एग्री इन्फ्रास्ट्रक्चर मिशन’ तक, नीतीश सरकार ने खेती को लाभ का सौदा बनाने के लिए खजाना खोल दिया है.

बिहार सरकार ने प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि की तर्ज पर अब अपनी विशेष योजना ‘जननायक कर्पूरी ठाकुर किसान सम्मान निधि’ शुरू करने का संकल्प लिया है. इसके तहत राज्य के किसानों को प्रतिवर्ष ₹3000 की अतिरिक्त आर्थिक सहायता दी जाएगी.

यह राशि केंद्र सरकार से मिलने वाली मदद के अलावा होगी, जो सीधे किसानों के खातों में ट्रांसफर की जाएगी.
बिहार ने खाद्यान्न उत्पादन में अपना ही रिकॉर्ड तोड़ दिया है. वित्तीय वर्ष 2024-25 में 326.62 लाख मीट्रिक टन का ऐतिहासिक उत्पादन दर्ज किया गया है.

आज बिहार मखाना और लीची उत्पादन में पूरे देश में नंबर-1 है. दुनिया का 85 प्रतिशत मखाना अकेले बिहार की कोख से जन्म लेता है. यही कारण है कि केंद्र सरकार ने यहां ‘राष्ट्रीय मखाना बोर्ड’ के गठन को मंजूरी दी है.

इसके अलावा मक्का उत्पादन में राज्य दूसरे और चावल-गेहूं के उत्पादन में भी शीर्ष राज्यों में शुमार हो चुका है. मशरूम उत्पादन में तो बिहार ने सबको पछाड़कर अग्रणी स्थान हासिल कर लिया है.

AI वाला ‘स्मार्ट मिशन’
बिहार कृषि स्टार्टअप का हब बनेगा. इसके लिए ‘बिहार कृषि एक्सीलेरेशन मिशन’ पर काम शुरू हो चुका है. सरकार 1 लाख करोड़ रुपये के निवेश से पूरे प्रदेश में कोल्ड स्टोरेज, प्रोसेसिंग सेंटर और ग्रेडिंग यूनिट्स का जाल बिछाने जा रही है.

खास बात यह है कि अब खेती में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) का प्रवेश होगा. ‘AI युक्त यांत्रिक कृषि मिशन’ के जरिए किसानों को 40 से 80 प्रतिशत तक का भारी अनुदान मिलेगा. इससे न केवल श्रम कम होगा, बल्कि उत्पादन की गुणवत्ता भी वैश्विक स्तर की होगी.
सरकार ने वर्ष 2025-2030 के लिए ‘सात निश्चय-3’ के तहत बड़े लक्ष्य निर्धारित किए हैं.

अगले 5 वर्षों में मक्का, दलहन और तिलहन के उत्पादन को दो से तीन गुना तक बढ़ाने की योजना है. साथ ही स्ट्रॉबेरी और ड्रैगन फ्रूट जैसे विदेशी फलों के निर्यात के लिए विशेष प्रोसेसिंग प्लांट लगाए जाएंगे.

बिहार के प्रसिद्ध सोनाचूर, कतरनी और मर्चा चावल को अंतरराष्ट्रीय बाजार तक पहुंचाने के लिए विशेष पैकेजिंग यूनिट्स स्थापित होंगी. ई-नाम (e-NAM) के जरिए बिहार की 53 मंडियों को डिजिटल बाजार से जोड़ा जा रहा है, ताकि किसानों को सही कीमत मिल सके.

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