सासाराम, अरविंद कुमार सिंह। सासाराम मुफस्सिल थाना कांड संख्या 26/26 दिनांक 26.01.2026, धारा 103(1)/238/3(5) बीएनएस एवं 27 आर्म्स एक्ट के तहत दर्ज डुमरियों दोहरे हत्याकांड का पुलिस ने खुलासा कर दिया है। इस सनसनीखेज मामले में कुख्यात अपराधकर्मी पप्पू सिंह उर्फ विनय कुमार सिंह ने न्यायालय में आत्मसमर्पण कर दिया है, जबकि कांड में संलिप्त पांच अभियुक्तों को गिरफ्तार कर लिया गया है।
हालांकि, इस पूरे घटनाक्रम ने एक बार फिर प्रशासनिक उदासीनता और पूर्व चेतावनियों की अनदेखी पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना की जानकारी देते हुए एसपी रौशन कुमार ने घटना की जानकारी देते हुए कहा बताया कि 25 जनवरी 2026 को सासाराम मुफस्सिल थानाध्यक्ष को सूचना मिली थी कि डुमरियों गांव में विनय कुमार प्रजापति एवं रूपेश सिंह की गोली मारकर हत्या कर दी गई है।
जांच में सामने आया कि यह वारदात पप्पू सिंह उर्फ विनय कुमार सिंह एवं उसके सहयोगी अपराधकर्मियों द्वारा अंजाम दी गई। घटना के बाद इलाके में दहशत फैल गई थी और लोगों में भारी आक्रोश देखा गया।
घटना की गंभीरता को देखते हुए अनुमंडल पुलिस पदाधिकारी-02 सासाराम के नेतृत्व में विशेष पुलिस टीम का गठन किया गया।
तकनीकी सहायता के लिए जिला आसूचना इकाई को भी शामिल किया गया। अनुसंधान और तकनीकी विश्लेषण के आधार पर आशीष रंजन उर्फ मन्नु, छोटु कुमार, अरूण कुमार, दिलीप सिंह एवं विशाल कुमार की संलिप्तता सामने आई। इनमें से दो अभियुक्तों को पहले ही न्यायिक हिरासत में भेजा जा चुका था।
पुलिस दबाव बढ़ने के बाद मुख्य आरोपी पप्पू सिंह ने 31 जनवरी 2026 को न्यायालय में आत्मसमर्पण किया। पुलिस रिमांड के दौरान उसने स्वीकार किया कि मृतक विनय कुमार प्रजापति, अरूण कुमार एवं दिलीप सिंह के बीच लंबे समय से जमीनी विवाद चल रहा था, जिसमें वह अपना दबदबा कायम करना चाहता था।
उसकी स्वीकारोक्ति के आधार पर शेष अभियुक्तों की गिरफ्तारी की गई और एक देशी एकनाली बंदूक, तीन जिंदा कारतूस, स्कॉर्पियो वाहन, मोटरसाइकिलें और मोबाइल फोन बरामद किए गए। हालांकि, यह तथ्य भी सामने आया है कि पप्पू सिंह का आपराधिक इतिहास अत्यंत लंबा है और वह पहले से ही हत्या, आर्म्स एक्ट, रंगदारी और एससी/एसटी एक्ट जैसे गंभीर मामलों में नामजद रहा है।
इसके बावजूद उसके खिलाफ समय रहते प्रभावी कार्रवाई नहीं हो पाई, जिसे लोग प्रशासनिक उदासीनता का परिणाम मान रहे हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि ऐसे कुख्यात अपराधियों पर पहले ही सख्त निगरानी और कार्रवाई होती, तो दो निर्दोष लोगों की जान नहीं जाती।
फिलहाल पुलिस टीम की कार्रवाई की सराहना करते हुए टीम में शामिल अधिकारियों को पुरस्कृत करने की घोषणा की गई है, लेकिन साथ ही यह सवाल भी कायम है कि क्या इस घटना के बाद प्रशासन भविष्य में ऐसे अपराधियों पर समय रहते नकेल कस पाएगा या फिर किसी नई घटना का इंतजार किया।
