नोखा किशोरी अपहरण कांड: क्या पुलिस की ढिलाई ने छीनी एक बेटी की जिंदगी? 10 फीट नीचे दफन मिला शव, तीन गिरफ्तार

सासाराम

सासाराम/अरविंद कुमार सिंह। नोखा थाना क्षेत्र से 20 नवंबर 2025 को लापता हुई किशोरी की हत्या का सनसनीखेज खुलासा पूरे इलाके को झकझोर गया है। प्रेम प्रसंग में अपहरण के बाद उसकी बेरहमी से हत्या कर शव को झारखंड के बांका जिला अंतर्गत महादेवपुर कोदराती जंगल में करीब 10 फीट नीचे दफना दिया गया था। इस जघन्य वारदात में तीन आरोपियों की गिरफ्तारी हुई है, लेकिन पुलिस की कार्यशैली पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं।

मृतका की मां ने 24 नवंबर 2025 को नोखा थाना में प्राथमिकी दर्ज कराई थी। आरोप है कि 20 नवंबर को आवेदन दिए जाने के बावजूद चार दिन तक मामला दर्ज नहीं किया गया। परिजनों का यह भी दावा है कि 25 नवंबर को मुख्य अभियुक्त स्वयं थाना पहुंचा, लेकिन उसे छोड़ दिया गया। यदि उसी समय सख्ती बरती जाती तो शायद आज एक बेटी जिंदा होती। थानाध्यक्ष पर लापरवाही और मामले की लीपापोती के आरोप लगाए जा रहे हैं।

मुख्य अभियुक्त प्रिंस कुमार को 13 जनवरी 2026 को गिरफ्तार कर जेल भेजा गया। पूछताछ में उसने अपने साथियों—उमेश यादव (कटोरिया, बांका), आदित्य कुमार (जमुई) और छोटू कुमार (कटोरिया)—के साथ मिलकर हत्या की बात कबूल की। उनकी निशानदेही पर पुलिस ने जंगल में खुदाई कर शव बरामद किया।

जेसीबी की मदद से करीब 10 फीट नीचे दफन शव को निकाला गया, जिसकी पहचान के लिए डीएनए जांच कराई जा रही है। संयुक्त कार्रवाई में बेलहर अनुमंडल पुलिस पदाधिकारी रंजीत कुमार, कटोरिया व नोखा थाना पुलिस के साथ बांका और रोहतास की टीम शामिल रही। शव का पोस्टमार्टम बांका सदर अस्पताल में कराया गया और बाद में परिजनों को सौंप दिया गया।

घटना के बाद क्षेत्र में भारी आक्रोश है। परिजनों ने डीडीपी, गृह मंत्रालय और डीआईजी को आवेदन देकर निष्पक्ष जांच और दोषी पुलिसकर्मियों पर कार्रवाई की मांग की है। अब बड़ा सवाल यही है—क्या प्रशासन अपनी जवाबदेही तय करेगा या यह मामला भी फाइलों में दफन हो जाएगा? इस संबंध में रोहतास जिला के पुलिस कप्तान रौशन कुमार का कहना है अनुसन्धान चल रही है। जो जटिल प्रक्रिया है। अनुसन्धान के बाद ही आगे बताई जा सकती है।