बीपी डेस्क। दिल्ली हाई कोर्ट ने इंडियन रेलवे कैटरिंग एंड टूरिज्म कॉर्पोरेशन (आईआरसीटीसी) होटल घोटाले के मामले में तेजस्वी यादव के खिलाफ आरोप तय करने के आदेश को चुनौती देने वाली याचिका पर सीबीआई को नोटिस जारी किया है। यह केस सन 2004 से 2009 के बीच लालू यादव के रेल मंत्री के कार्यकाल के दौरान आईआरसीटीसी के दो होटलों को नियमों का उल्लंघन करके लीज पर देने के मामले से जुड़ा है।
तेजस्वी यादव ने निचली अदालत के उस आदेश को चुनौती दी है जिसमें उनके और परिवार के सदस्यों के खिलाफ भ्रष्टाचार, आपराधिक साजिश और धोखाधड़ी के आरोप तय करने का निर्देश दिया गया है। दिल्ली हाईकोर्ट की जस्टिस स्वर्णकांता शर्मा की एकल पीठ ने मामले की संक्षिप्त सुनवाई के बाद केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) से जवाब मांगा है।
कोर्ट ने तेजस्वी यादव की आपराधिक पुनरीक्षण याचिका के साथ-साथ निचली अदालत की कार्यवाही पर रोक लगाने के आवेदन पर भी नोटिस जारी किया है। तेजस्वी यादव के वकील कपिल सिब्बल और मनिंदर सिंह ने हाईकोर्ट को बताया कि उनके पिता राष्ट्रीय जनता दल (आरजेडी) के प्रमुख लालू प्रसाद यादव द्वारा दायर ऐसी ही एक याचिका पर 14 जनवरी को सुनवाई होनी है।
इस पर जस्टिस शर्मा ने तेजस्वी यादव की याचिका पर भी उसी तारीख को विचार करने का निर्देश दिया। तेजस्वी यादव ने अपनी याचिका में दिल्ली के राउज एवेन्यू कोर्ट के उस आदेश को रद्द करने की मांग की है, जिसमें उन्हें और अन्य आरोपियों के खिलाफ इस घोटाले से संबंधित भ्रष्टाचार, आपराधिक साजिश और धोखाधड़ी के आरोपों का सामना करने के लिए पर्याप्त आधार पाया गया है।
राउज एवेन्यू कोर्ट के विशेष न्यायाधीश (पीसी एक्ट) विशाल गोगने ने 13 अक्टूबर, 2025 को लालू प्रसाद यादव, उनकी पत्नी राबड़ी देवी, बेटे तेजस्वी यादव और अन्य आरोपियों के खिलाफ भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) की धारा 420 (धोखाधड़ी) और 120बी (आपराधिक साजिश) के साथ-साथ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के प्रावधानों के तहत मुकदमा चलाने का मार्ग प्रशस्त किया था। इन सभी ने आरोपों से इनकार किया था।
विशेष अदालत ने 29 मई को लालू प्रसाद यादव, उनके परिवार के सदस्यों, प्रेम गुप्ता, सरला गुप्ता और रेलवे अधिकारियों राकेश सक्सेना और पीके गोयल के खिलाफ आरोप तय करने के मुद्दे पर विस्तृत दलीलें सुनने के बाद अपना आदेश सुरक्षित रख लिया था। यह कथित घोटाला उस समय का है जब लालू प्रसाद यादव सन 2004 से 2009 तक रेल मंत्री थे।
आरोप है कि उनके कार्यकाल के दौरान, आईआरसीटीसी के दो होटलों को निर्धारित नियमों का पालन किए बिना लीज पर दे दिया गया था। इनमें से एक होटल सरला गुप्ता को आवंटित किया गया था, जो प्रेम गुप्ता की पत्नी हैं। प्रेम गुप्ता आरजेडी प्रमुख के करीबी सहयोगी और उस समय राज्यसभा सांसद थे।
अभियोजन पक्ष के अनुसार, आरजेडी नेता ने एक बेनामी कंपनी के माध्यम से तीन एकड़ प्राइम लैंड हासिल की थी। लालू प्रसाद यादव ने हमेशा यह दावा किया है कि उनके हिस्से में कोई अनियमितता नहीं हुई है और टेंडर निष्पक्ष और पारदर्शी तरीके से दिए गए थे। उन्होंने मामले से बरी करने की मांग की है।
बता दें कि यह मामला काफी चर्चा में है क्योंकि इसमें बिहार के पूर्व उपमुख्यमंत्री तेजस्वी यादव के साथ-साथ उनके पिता और आरजेडी सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव और मां राबड़ी देवी भी आरोपी हैं। यह मामला भ्रष्टाचार से जुड़ा है और इसमें आईआरसीटीसी के होटलों के आवंटन में अनियमितताओं के आरोप हैं।
तेजस्वी यादव ने निचली अदालत के उस फैसले को चुनौती दी है जिसमें उनके खिलाफ आरोप तय करने का आदेश दिया गया था। अब दिल्ली हाई कोर्ट इस मामले में सीबीआई का पक्ष सुनेगा और तय करेगा कि क्या तेजस्वी यादव के खिलाफ आरोप तय करने का आदेश सही था या नहीं। यह देखना दिलचस्प होगा कि हाई कोर्ट का फैसला क्या आता है और इसका इस मामले पर क्या असर पड़ता है। इस मामले की सुनवाई अब 14 जनवरी को होगी। तभी लालू प्रसाद यादव की याचिका पर भी सुनवाई होनी है।
