राजन दत्त। बिहार में राज्यसभा चुनाव से पहले राज्य की राजनीति में हलचल तेज हो गई है. सत्ता पक्ष और विपक्ष दोनों ही अपने-अपने विधायकों के साथ लगातार बैठकों और रणनीति में जुटे हुए हैं. पटना में इन दिनों राजनीतिक गतिविधियां काफी बढ़ गई हैं. एनडीए की ओर से दावा किया जा रहा है कि इस बार राज्यसभा की सभी पांच सीटों पर उनकी जीत तय है.
बिहार सरकार के मंत्री और जदयू के वरिष्ठ नेता विजय कुमार चौधरी ने कहा कि एनडीए के सभी दलों के नेता पूरी तरह आश्वस्त हैं और उन्हें किसी तरह की चिंता नहीं है. हमारे गठबंधन के पास पर्याप्त संख्या में विधायक हैं, इसलिए जीत को लेकर कोई संशय नहीं है.
विजय कुमार चौधरी ने मीडिया से बातचीत में कहा कि चुनाव होने तक सभी विधायक पटना में ही रहेंगे और एक-दूसरे से मिलना-जुलना भी चलता रहेगा. उन्होंने कहा कि विधायकों की आपसी मुलाकात से वोट के गणित पर कोई असर नहीं पड़ता.
विपक्ष के नेता भी अब समझ चुके हैं कि इस चुनाव में उनके लिए जीत आसान नहीं होने वाली है. विजय चौधरी ने विपक्ष पर तंज कसते हुए कहा कि इस समय विपक्षी खेमे में घबराहट का माहौल है. कुछ विधायक खुले तौर पर घूम रहे हैं, जबकि कुछ को नजरबंद रखने जैसी खबरें भी सामने आ रही हैं. इससे साफ पता चलता है कि किस पक्ष का पलड़ा भारी है.
एआईएमआईएम के विधायकों के राजद उम्मीदवार को समर्थन देने की चर्चा पर भी उन्होंने प्रतिक्रिया दी. चौधरी ने कहा कि किसी से मिलना और वोट देना अलग बात है. अभी तक इस बारे में कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है, इसलिए ऐसी खबरों को लेकर ज्यादा निष्कर्ष निकालना ठीक नहीं है.
जबकि बिहार से राज्यसभा की पांच सीटें खाली हो रही हैं, जिनके लिए यह चुनाव कराया जा रहा है. 243 सदस्यों वाली बिहार विधानसभा में किसी भी उम्मीदवार को जीतने के लिए कम से कम 41 विधायकों का समर्थन चाहिए.
मौजूदा समय में एनडीए के पास करीब 202 विधायक हैं. इस आधार पर वह आसानी से चार सीटें जीत सकता है. हालांकि पांचवीं सीट के लिए उसे कुछ अतिरिक्त वोटों की जरूरत पड़ सकती है.
दूसरी तरफ राजद के नेतृत्व वाले महागठबंधन के पास करीब 35 विधायक हैं, इसलिए उसे भी जीत के लिए दूसरे दलों के समर्थन की तलाश करनी होगी. यही वजह है कि चुनाव से पहले सियासी जोड़-तोड़ की चर्चा काफी तेज हो गई है.
