बिहार में राज्यसभा चुनाव की वोटिंग के बीच महागठबंधन के गायब चार विधायक कौन है, पढ़िये

पटना

बीपी डेस्क। बिहार में राज्यसभा की 5 सीटों के लिए मतदान हुआ. वोटिंग के बीच एक बड़ा सियासी घटनाक्रम सामने आया है. महागठबंधन के चार विधायक मतदान के लिए विधानसभा नहीं पहुंचे. इनमें कांग्रेस के तीन और राष्ट्रीय जनता दल के एक विधायक शामिल बताए जा रहे हैं.

इन विधायकों की गैरहाजिरी से राजद उम्मीदवार अमरेंद्र धारी सिंह की राह मुश्किल हो गई है.राजनीतिक गलियारों में इसे बड़ा सियासी खेल माना जा रहा है. क्योंकि पांचवीं सीट पर मुकाबला पहले से ही काफी कड़ा माना जा रहा था. चारों विधायकों के बारे में जानिए.

मनोज विश्वास
कांग्रेस के विधायक मनोज विश्वास अररिया जिले के फारबिसगंज से पहली बार विधायक बने हैं. मनोज विश्वास का राजनीतिक सफर कई पार्टियों से होकर गुजरा है.

उन्होंने अपने करियर की शुरुआत जदयू से की थी.2018 में वे राजद में शामिल हुए और करीब सात साल वहीं रहे. फिर 2025 विधानसभा चुनाव से ठीक पहले कांग्रेस में आ गए और चुनाव जीत गए.

फारबिसगंज सीट पर भाजपा का मजबूत प्रभाव माना जाता है. पिछले छह चुनावों में से पांच बार भाजपा यहां जीत चुकी है. ऐसे में माना जा रहा है कि आगे की राजनीति को देखते हुए मनोज विश्वास का रुख बदल सकता है.

सुरेंद्र प्रसाद
कांग्रेस विधायक सुरेंद्र प्रसाद पश्चिम चंपारण के वाल्मीकिनगर से पहली बार विधायक बने हैं. दिलचस्प बात यह है कि वह पहले एनडीए के साथ भी चुनाव लड़ चुके हैं. 2015 में उन्होंने उपेंद्र कुशवाहा की पार्टी RLSP से एनडीए उम्मीदवार के रूप में चुनाव लड़ा था, लेकिन तब हार गए थे. 2025 विधानसभा चुनाव में उन्होंने जदयू के उम्मीदवार धीरेन्द्र प्रताप सिंह उर्फ रिंकू सिंह को 1675 वोटों से हराया.

मनोहर प्रसाद सिंह
कांग्रेस के वरिष्ठ नेता मनोहर प्रसाद सिंह कटिहार जिले की मनिहारी सीट से चौथी बार विधायक बने हैं. वह पहले जदयू के नेता थे और 2010 में जदयू के टिकट पर चुनाव भी जीत चुके हैं.

2015 में जब नीतीश कुमार ने महागठबंधन के साथ चुनाव लड़ा, तब मनिहारी सीट कांग्रेस के खाते में चली गई. बताया जाता है कि उसी समय नीतीश कुमार के कहने पर मनोहर प्रसाद सिंह कांग्रेस में शामिल हुए और वहीं से चुनाव लड़े.

फैसल रहमान
राजद के विधायक फैसल रहमान पूर्वी चंपारण जिले की ढाका सीट से विधायक हैं. 2025 विधानसभा चुनाव में उन्होंने सिर्फ 178 वोटों से जीत दर्ज की थी. उनकी जीत को भाजपा उम्मीदवार ने हाईकोर्ट में चुनौती दी है. आरोप है कि चुनाव में फर्जी वोट डाले गए थे.

बतातें चलें कि राज्यसभा चुनाव में एक सीट जीतने के लिए 41 वोट की जरूरत होती है. ऐसे में चार विधायकों की गैरहाजिरी से पांचवीं सीट का मुकाबला और दिलचस्प हो गया है.