बक्सर, विक्रांत। कला, संस्कृति एवं युवा विभाग तथा जिला प्रशासन, बक्सर के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित उस्ताद बिस्मिल्लाह ख़ाँ महोत्सव के अवसर पर “बिहार दर्पण” नृत्य-नाट्य की भव्य प्रस्तुति ने दर्शकों का मन मोह लिया।
यह प्रस्तुति प्रख्यात युवा नर्तक एवं कोरियोग्राफर जितेंद्र चौरसिया के निर्देशन में हुई, जिन्हें उस्ताद बिस्मिल्लाह ख़ाँ सम्मान से भी सम्मानित किया जा चुका है। “बिहार दर्पण” के माध्यम से बिहार की समृद्ध लोकसंस्कृति, परंपराएँ, रीति-रिवाज एवं पर्व-त्योहारों की सुंदर झलक प्रस्तुत की गई।
इस नृत्य-नाटिका में सभ्यता के विकास से लेकर आर्यभट, विश्व के प्रथम गणतंत्र की परंपरा, आम्रपाली, जैन एवं बौद्ध धर्म की स्थापना, स्वतंत्रता संग्राम में कुंअर सिंह एवं पीर अली के योगदान को प्रभावशाली ढंग से दर्शाया गया।
साथ ही विद्यापति एवं महेंद्र मिश्र जैसे महान विद्वानों की विरासत, बिहार की नदियाँ, होली एवं छठ जैसे पर्व, तथा झिझिया, झूमर, कजरी, झरनी जैसे लोकनृत्यों को अत्यंत सजीव और आकर्षक रूप में प्रस्तुत किया गया।
इस नृत्य-नाटिका का आलेख डॉ. शांति जैन द्वारा तैयार किया गया, संगीत सीताराम सिंह का था, परिकल्पना विश्वबंधु की रही तथा निर्देशन जितेंद्र चौरसिया का रहा।
मुख्य कलाकार:
रुद्र प्रसाद राय, देवतुनया बेरा, विधि सौंदर्या, विशाल, कुसुम, सुजाता, देबोश्री, रणजीत, साहिल, अर्चिता, सृष्टि, नितेश, अंकित (1), अश्विनी, देवराज, अंकित (2)।
कार्यक्रम की इस प्रस्तुति को दर्शकों द्वारा भरपूर सराहना मिली और यह महोत्सव का प्रमुख आकर्षण बनी।
