सेंट्रल डेस्क। पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव को लेकर बीजेपी के केंद्रीय नेतृत्व ने पहले ही स्थानीय नेताओं को करो या मरो का संदेश दे दिया है। साफ कहा गया है कि अगर इस बार मौका हाथ से निकला तो बीजेपी के लिए दिक्कत हो सकती है। बीजेपी ने टीएमसी को चौतरफा घेरने की रणनीति पर काम भी शुरू कर दिया है।
एक तरफ बीजेपी अपना ‘किला’ मजबूत करने की कोशिश में है और दूसरी तरफ ममता सरकार को घेरने की तैयारी में। बीजेपी के सीनियर नेता लगातार पश्चिम बंगाल का दौरा कर रहे हैं। गृह मंत्री अमित शाह पश्चिम बंगाल का दौरा करके लौटे ही हैं और अब गुरुवार को बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा पश्चिम बंगाल जा रहे हैं। वो दो दिन पश्चिम बंगाल में रहेंगे।
नड्डा वहां जिला अध्यक्ष, विभाग कनविनर और प्रवासी कार्यकर्ताओं की मीटिंग लेंगे। बीजेपी की कोशिश है कि बूथ स्तर तक कम से कम पांच लोगों की एक टीम पूरी तरह तैयार रहे जो उस बूथ के तहत आने वाले वोटर्स से लगातार संपर्क करे। उन्हें ना सिर्फ ममता सरकार की नाकामियां बताए बल्कि केंद्र सरकार की उपलब्धियां भी बताए। नड्डा राज्य बीजेपी की कोर कमिटी की भी मीटिंग लेंगे। इसमें उन तीन मुद्दों पर बात होगी जो बीजेपी ने तय किए हैं।
बीजेपी ने तय किया है कि भ्रष्टाचार, घुसपैठ और बेरोजगारी के मुद्दे पर टीएमसी सरकार को घेरा जाए। इसके लिए क्या कार्यक्रम तय करने हैं और कैसे लोगों को टीएमसी के भ्रष्टाचार के बारे में बताना है, इस पर भी बात होगी। नड्डा डॉक्टर्स के एक ग्रुप से भी मिलेंगे।
बीजेपी नेता अलग अलग वर्ग और अलग अलग प्रफेशन से जुड़े लोगों से मिल रहे हैं और ये बीजेपी के आउटरीच अभियान का हिस्सा है। बीजेपी जहां टीएमसी को घेरेगी वहीं इस बार ये सुनिश्चित करने की भी कोशिश है कि पूरी पार्टी और पार्टी नेता एकजुट होकर चुनाव लड़े। इसकी संभावना नहीं लगती कि बीजेपी किसी को मुख्यमंत्री का चेहरा घोषित करेगी।
बीजेपी के एक नेता ने कहा कि हमारे लिए चेहरा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और पार्टी का चिन्ह कमल ही है।उन्होंने कहा कि केंद्रीय नेतृत्व की तरफ से निर्देश दिए गए हैं कि सभी स्थानीय नेता मिलकर काम करें।
सभी नेताओं की जिम्मेदारी भी तय की जा रही है और बाद में उसी हिसाब से उनकी परफॉर्मेंस का रिव्यू भी होगा। दूसरे राज्यों से भी सीनियर कार्यकर्ताओं को राज्य के अलग अलग हिस्सों में जिम्मेदारी दे दी गई है।
