शोभा यात्रा में डुमरांव की गंगा जमुनी संस्कृति झलकती थी
बक्सर, विक्रांत। गंगा जमुनी संस्कृति को दामन में समेटने वाले डुमरांव नगर में वीर हनुमान की शोभा यात्रा निकाले जाने की परंपरा की शुरूआत कई दशक पहले यहां के पहलवानों द्वारा की गई थी।
इस नगर में वीर हनुमान की शोभा यात्रा निकाले जाने की परंपरा की शुरूआत करने में स्थानीय चर्चित पहलवानों में गोपाल प्रसाद गुप्ता, बटुक प्रसाद, साधु चौरसिया, विश्वनाथ पहलवान, डाण्पमेश्वर दयाल; सभी दिवंगत के अलावा बनेला पहलवान, दिवंगत रामेश्वर नाथ तिवारी एवं दिवंगत महबूब पहलवान आदि की भूमिका इतिहास के पन्ने में अंकित है।
आरंभिक काल के बाद कई दशक तक शोभा यात्रा भगवान हनुमान की जयंती पर निकाली जाती रही। शोभा यात्रा निकाले जाने को लेकर डुमरांव राज परिवार का भी योगदान रहता था।
शोभा यात्रा निकाले जाने की परंपरा में सबसे पहले डुमरांव राज परिवार द्वारा निर्मित छठिया पोखरा
के उत्तरी पूर्वी कोने पर अवस्थित वीर हनुमान की शोभा यात्रा रथ की पूजा रही है।
उन दिनों डुमरांव के नामचीन पहलवानों द्वारा हनुमान मंदिर में पूजा अर्चना की जाती थी। दिवंगत पहलवान गोपाल प्रसाद गुप्ता के नेतृत्व में पूजा अर्चना के बाद शोभा यात्रा रथ राज गढ़ फाटक पर पहंुचने के बाद नगर के विभिन्न अखाड़ो से श्रद्धालुओं की भीड़ इकठठा होने के बाद शोभा यात्रा नगर भ्रमण को निकल पड़ती थी।
पर कालांतर में दिवंगत गोपाल जी प्रसाद दिवंगत भाजपा नेता रामेश्वर नाथ तिवारी दिवंगत रामजी सिंह शेरे दिल मदन प्रसाद केशरीएश्या मजी गुप्ता एवं गुप्तेश्वर प्रसाद उर्फ गुरू जी समेत कई अन्य सामान्य श्रद्धालुओं के विचार विर्मश के बाद वीर हनुमान की शोभा यात्रा निकाले जाने का समय बदल कर रामनवमी पर्व पर कर दिया गया।
जो आज तक श्रीरामनवमी पर्व के मौके पर भगवान हनुमान की शोभा यात्रा निकाले जाने की परंपरा जीवंत बनी हुई है। उन दिनों शोभा यात्रा के दौरान शारीरिक शौष्ठव का प्रदर्शन के साथ ही विभिन्न कला में गदा बनेठीए लाठीए तलवार भाजने वाले में अकीदत के लोग भी शामिल हुआ करते थे।
जिसमें एक नाम आज दिवंगत महबूब पहलवान का नाम स्थानीय लोगों के जुबां पर बना हुआ है। नगर के प्रबुद्ध दशरथ प्रसाद विद्यार्थीए सच्चिदानंद भगत एवं शंभू शरण नवीन बताते है कि इस गंगा जमुनी संस्कृति वाले नगर में निकलने वाले शोभा यात्रा में श्रद्धालु
भक्ति भावना से शामिल होते है।
पहले नगर के कई हिस्से में ठठेरी बाजार स्थित हनुमान मंदिरए निमेज टोला स्थित हनुमान मंदिरए मच्छर हटटा स्थित हनुमान मंदिर एवं छोटकी मठिया हनुमान मंदिर अखाड़ा से ढोल नगाड़े के साथ निकाले गया हनुमान की लघु शोभा यात्रा राजगढ़ फाटक के पास से निकलने वाले मुख्य शोभा यात्रा में शामिल हो जाता था।
अहिस्ते अहिस्ते नगर के विभिन्न अखाड़ा स लघु शोभा यात्रा निकलना बंद हो गया। प्रबुद्ध नागरिकों ने कहा कि बदलते परिवेश में वीर हनुमान की शोभा यात्रा के स्वरूप में काफी बदलाव आ चुका है। बावजूद डुमरांव में वीर हनुमान की शोभा यात्रा निकाले जाने की परंपरा कायम है।
