होर्मुज स्ट्रेट पर नियंत्रण कभी नहीं छोड़ेंगे- ईरान

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सेंट्रल डेस्क। ईरान ने होर्मुज जलडमरूमध्य पर अपना नियंत्रण छोड़ने की किसी भी संभावना को खारिज किया है। वरिष्ठ ईरानी सांसद और इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) के पूर्व कमांडर इब्राहिम अजीजी ने कहा है कि होर्मुज पर कंट्रोल जारी रहेगा। अजीजी का यह बयान ऐसे समय आया है, जब ईरान और अमेरिका के प्रतिनिधिमंडल दूसरे दौर की वार्ता के लिए पाकिस्तान जाने की तैयारी कर रहे हैं।

होर्मुज स्ट्रेट पर हालिया दिनों में ईरान और अमेरिका के बीच सबसे ज्यादा तनातनी देखने को मिली है। सांसद और राष्ट्रीय सुरक्षा और विदेश नीति समिति के प्रमुख इब्राहिम अजीजी ने बीबीसी से बातचीत में कहा, ‘यह हमारा अविभाज्य अधिकार है। ईरान ही इस समुद्री मार्ग के अधिकार का फैसला करेगा।

इसमें जलडमरूमध्य से जहाजों के गुजरने की अनुमति भी शामिल है। यह जल्द ही ईरान के कानून का हिस्सा बनने वाला है।’ अजीजी ने कहा, ‘हम संविधान के अनुच्छेद 110 के आधार पर संसद में एक विधेयक पेश कर रहे हैं। इसमें पर्यावरण, समुद्री सुरक्षा और राष्ट्रीय सुरक्षा शामिल है और सशस्त्र बल इस कानून को लागू करेंगे।’

अजीजी ने माना है कि होर्मुज जलडमरूमध्य दुश्मन का सामना करने के लिए उनकी संपत्तियों में से एक है। तेहरान विश्वविद्यालय में शोधार्थी मोहम्मद इस्लामी ने बीबीसी से कहा है कि युद्ध के बाद ईरान की पहली प्राथमिकता अपनी प्रतिरोधक क्षमता बहाल करना है। इसमें होर्मुज जलडमरूमध्य एक प्रमुख रणनीतिक प्रभावों में से है।

तेहरान इस बात पर चर्चा करने के लिए तैयार है कि दूसरे देश जलडमरूमध्य से कैसे लाभ उठा सकते हैं लेकिन नियंत्रण उसकी मूल शर्त है। वहीं ईरान का ये बयान ऐसे समय आया है, जब अमेरिका के साथ उसकी बातचीत मंगलवार से इस्लामाबाद में शुरू होगी। रविवार को डोनाल्ड ट्रंप ने कहा है कि वह एक प्रतिनिधिमंडल भेज रहे हैं।

इस प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व एक बार फिर अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस करेंगे। पहले दौर की बातचीत को भी वेंस ने लीड किया था। ईरानी अधिकारी अब तक इस बात पर चुप हैं कि उनकी अपनी टीम का नेतृत्व कौन करेगा। ईरान की ओर से पहले दौर की बातचीत में संसद के स्पीकर मोहम्मद बाघेर गालिबफ ने विदेश मंत्री अब्बास अराघची के साथ टीम को लीड किया था।

फिलहाल ईरान की ओर से अपने बंदरगाहों पर अमेरिकी नाकेबंदी को लेकर नाराजगी है।होर्मुज जलडमरूमध्य से वैश्विक तेल और गैस आपूर्ति के लिए अहम है। यह ईरान और ओमान के बीच स्थित एक संकरा समुद्री मार्ग है जो फारस की खाड़ी को ओमान की खाड़ी और अरब सागर से जोड़ता है। इसके बंद होने से वैश्विक तेल और गैस की आपूर्ति में भारी बाधा आई है, जो ऊर्जा की कीमतों में वृद्धि की वजह बनी है।