प्रमंडलीय आयुक्त की अध्यक्षता में हुई उच्चस्तरीय बैठक, जनप्रतिनिधियों के सुझावों के बाद तैयार होगा अंतिम मास्टर प्लान; पांच नगरों की अलग-अलग होगी पहचान
बिहारशरीफ, अविनाश पांडेय : समाहरणालय स्थित हरदेव भवन सभागार में शुक्रवार को “राजगीर रीजनल प्लानिंग एरिया (आरआरपीए) मास्टर प्लान-2045” के स्टेज-5 मसौदे पर उच्चस्तरीय बैठक आयोजित की गई। बैठक की अध्यक्षता प्रमंडलीय आयुक्त सह नालंदा आयोजना क्षेत्र प्राधिकार के अध्यक्ष मयंक वरवड़े ने की। बैठक की शुरुआत उन्हें हरित पौधा भेंट कर स्वागत के साथ हुई। इसमें जिलाधिकारी उदिता सिंह, पुलिस अधीक्षक भारत सोनी, सांसद कौशलेन्द्र कुमार, विभिन्न जनप्रतिनिधि और विभागीय अधिकारी शामिल हुए।
बैठक में बताया गया कि मास्टर प्लान अभी प्रारूप (ड्राफ्ट) अवस्था में है और जनप्रतिनिधियों व आम लोगों से प्राप्त सुझावों के आधार पर इसमें संशोधन कर अंतिम रूप दिया जाएगा।
पांच नगरों की अलग-अलग होगी पहचान
जिलाधिकारी उदिता सिंह ने बताया कि मास्टर प्लान के तहत पांच प्रमुख नगरों की विशिष्ट पहचान विकसित की जाएगी।
राजगीर को अंतरराष्ट्रीय पर्यटन एवं संस्थागत हब बनाया जाएगा।
नालंदा को विश्व धरोहर एवं वेलनेस टूरिज्म हब के रूप में विकसित किया जाएगा।
सिलाव को क्षेत्रीय व्यापार एवं थोक वाणिज्य केंद्र बनाया जाएगा।
पावापुरी को शिक्षा एवं उच्च स्तरीय सेवाओं का केंद्र विकसित किया जाएगा।
गिरियक को इको-टूरिज्म हब के रूप में विकसित किया जाएगा।
फंडिंग सबसे बड़ी चुनौती : आयुक्त
प्रमंडलीय आयुक्त मयंक वरवड़े ने कहा कि इस महत्वाकांक्षी योजना की सबसे बड़ी चुनौती फंडिंग है। उन्होंने कहा कि जनप्रतिनिधियों और हितधारकों के सुझाव अंतिम ड्राफ्ट में शामिल किए जाएंगे।
सांसद ने हवाई अड्डे की उठाई मांग
सांसद कौशलेन्द्र कुमार ने कहा कि मास्टर प्लान में हवाई अड्डे का भी प्रावधान होना चाहिए। उन्होंने कहा कि अंतिम मसौदा जनप्रतिनिधियों से व्यापक विमर्श के बाद तैयार किया जाए। उन्होंने मसौदे को सराहनीय बताते हुए कुछ सुधार की आवश्यकता भी बताई।
सिलाव के विकास और स्थानीय समस्याओं पर जोर
विधान पार्षद रीना यादव ने कहा कि राजगीर के साथ-साथ सिलाव का भी समान रूप से विकास होना चाहिए।
ग्रामीण विकास मंत्री श्रवण कुमार के प्रतिनिधि राजेन्द्र प्रसाद ने कहा कि अंतरराष्ट्रीय खेल आयोजनों के दौरान स्थानीय लोगों की आवाजाही प्रभावित होती है, इसका समाधान निकाला जाना चाहिए। उन्होंने पहाड़ों से आने वाले प्राकृतिक जल प्रवाह के बाधित होने की समस्या पर अध्ययन कराने तथा राजगीर में वेंडर जोन स्थापित करने की भी मांग रखी।
राजगीर नगर परिषद की मुख्य पार्षद जीरो देवी ने कहा कि विकास स्थानीय लोगों की आकांक्षाओं के अनुरूप होना चाहिए और सड़क किनारे छोटे व्यापारियों की आजीविका प्रभावित नहीं होनी चाहिए।
20 वर्षों का विजन
मास्टर प्लान के अनुसार अगले दो दशकों में राजगीर क्षेत्र को अंतरराष्ट्रीय स्तर का पर्यटन, शिक्षा, स्वास्थ्य और उद्योग केंद्र बनाने की योजना है। इसमें राजगीर, नालंदा, सिलाव, पावापुरी, गिरियक समेत 100 से अधिक गांव शामिल हैं। वर्ष 2045 तक क्षेत्र की आबादी लगभग दोगुनी होने का अनुमान है, जिसे देखते हुए सड़क, आवास, जलापूर्ति, बिजली, शिक्षा और स्वास्थ्य का विस्तृत रोडमैप तैयार किया गया है।
पर्यटन को मिलेगा सबसे अधिक बढ़ावा
योजना के तहत राजगीर, नालंदा और पावापुरी में विश्वस्तरीय पर्यटन पार्क, होटल, रिसॉर्ट, सांस्कृतिक केंद्र, आर्ट गैलरी, हस्तशिल्प संग्रहालय, ओपन एयर थिएटर और वेलनेस सेंटर विकसित किए जाएंगे। साथ ही लेजर लाइट एंड साउंड शो, डिजिटल म्यूजियम, एआर-वीआर आधारित पर्यटन अनुभव, ई-बस सेवा, गोल्फ कार्ट, साइकिल ट्रैक और आधुनिक पार्किंग की व्यवस्था की जाएगी।
यातायात, स्वास्थ्य और शिक्षा में बड़े बदलाव
मास्टर प्लान के तहत प्रमुख सड़कों का चौड़ीकरण, नए संपर्क मार्ग, मल्टीलेवल पार्किंग, अंतरराज्यीय बस टर्मिनल, ट्रांसपोर्ट नगर, रेलवे स्टेशनों का आधुनिकीकरण, रेल ओवरब्रिज और अंडरपास का निर्माण किया जाएगा।
स्वास्थ्य क्षेत्र में चार 500 बेड और पांच 200 बेड वाले आधुनिक अस्पताल, ट्रॉमा सेंटर, डायग्नोस्टिक सेंटर तथा इंटीग्रेटेड कमांड एंड कंट्रोल सेंटर स्थापित करने का प्रस्ताव है। वहीं शिक्षा के क्षेत्र में नए विद्यालय, कॉलेज, अनुसंधान संस्थान और नालंदा विश्वविद्यालय के आसपास नॉलेज हब विकसित किया जाएगा।
रोजगार, कृषि और पर्यावरण पर विशेष फोकस
योजना में कृषि आधारित उद्योग, डेयरी, फूड प्रोसेसिंग, आईटी पार्क, कोल्ड चेन हब और पर्यटन आधारित रोजगार सृजन पर जोर दिया गया है। करीब 46.7 प्रतिशत क्षेत्र को कृषि उपयोग के लिए सुरक्षित रखने, आहर-पईन प्रणाली के पुनर्जीवन, वर्षा जल संचयन और भूजल संरक्षण की भी योजना है। पर्यावरण संरक्षण के तहत ग्रीन बेल्ट, वृक्षारोपण और प्राकृतिक जल स्रोतों व वन क्षेत्रों के संरक्षण का विशेष प्रावधान किया गया है।
