कीट-व्याधि नियंत्रण से बागवानी फसलों की गुणवत्ता और उत्पादन में बढ़ोतरी
उद्यानिक फसलों में कीट प्रबंधन को लेकर सरकार की बड़ी पहल
बीपी डेस्क। कृषि मंत्री श्री राम कृपाल यादव ने कहा कि वित्तीय वर्ष 2025-26 में राज्य में बगीचों एवं फसलों में कीट प्रबंधन योजना को प्रभावी रूप से संचालित किया जा रहा है। इस योजना के अंतर्गत किसानों को अनुदानित दर पर कीटनाशी छिड़काव की सुविधा उपलब्ध कराई जा रही है, ताकि उद्यानिक फसलों में समय पर कीट-व्याधि का प्रबंधन सुनिश्चित हो सके। इससे न केवल फसलों की उत्पादकता में वृद्धि होगी, बल्कि किसानों की आय में भी उल्लेखनीय सुधार आएगा।
कृषि मंत्री ने बताया कि लीची फसल में कीट-व्याधि प्रबंधन हेतु 75 प्रतिशत अनुदान पर प्रथम एवं द्वितीय छिड़काव की सुविधा दी जा रही है। इसके अंतर्गत प्रथम छिड़काव के लिए 162 रुपए प्रति वृक्ष तथा द्वितीय छिड़काव के लिए 114 रूपये प्रति वृक्ष की अनुदान राशि निर्धारित की गई है। एक किसान को प्रथम एवं द्वितीय छिड़काव हेतु अलग-अलग अधिकतम 84-84 वृक्षों पर अनुदानित दर पर छिड़काव का लाभ दिया जा रहा है।
उन्होंने बताया कि लीची में दहिया कीट पौधों की कोशिकाओं से रस चूसकर मुलायम तनों एवं मंजरों को सुखा देता है, जिससे फल गिरने लगते हैं। इसके नियंत्रण हेतु बाग की मिट्टी की नियमित निकाई-गुड़ाई, तने के निचले हिस्से में अल्काथीन या प्लास्टिक की पट्टी लपेटकर उस पर ग्रीस लगाने तथा अनुशंसित कीटनाशकों का छिड़काव करने की सलाह दी गई है।
इसके अतिरिक्त लीची माइट कीट पत्तियों के निचले भाग से रस चूसकर पत्तियों को भूरा एवं सिकुड़ा हुआ बना देता है। इसके प्रबंधन के लिए संक्रमित पत्तियों एवं टहनियों को काटकर नष्ट करने तथा सल्फर, इथियॉन अथवा प्रोपरजाइट का अनुशंसित मात्रा में छिड़काव करने की सलाह दी गई है। वहीं स्टिक बग कीट फरवरी से अप्रैल के बीच अधिक सक्रिय रहता है, जो फूलों एवं फलों को नुकसान पहुंचाता है। इसके नियंत्रण हेतु यांत्रिक विधियों के साथ-साथ अनुशंसित कीटनाशकों का 15 दिनों के अंतराल पर दो छिड़काव करने का निर्देश दिया गया है।
माननीय मंत्री ने बताया कि आम, लीची, अमरुद, केला एवं पपीता जैसी उद्यानिक फसलों में कीटनाशी छिड़काव हेतु अनुदान प्राप्त करने के लिए किसानों का DBT पोर्टल https://dbtagriculture.bihar.gov.in/पर पंजीकरण अनिवार्य है।
