मिट्टी की जाँच कराएँ और संतुलित उर्वरकों का करें प्रयोग
बीपी डेस्क। बिहार सरकार के कृषि मंत्री श्री विजय कुमार सिन्हा ने कहा कि स्वस्थ मिट्टी ही समृद्ध खेती की आधारशिला है। किसानों को उनकी भूमि की उर्वरता की सही जानकारी उपलब्ध कराने तथा संतुलित पोषक तत्व प्रबंधन को बढ़ावा देने के उद्देश्य से प्रधानमंत्री राष्ट्रीय कृषि विकास योजना के अंतर्गत मृदा स्वास्थ्य कार्ड योजना का प्रभावी क्रियान्वयन राज्य में किया जा रहा है।
कृषि मंत्री ने कहा कि इस योजना के तहत किसानों के खेतों की मिट्टी का निःशुल्क परीक्षण कर उन्हें मृदा स्वास्थ्य कार्ड उपलब्ध कराया जाता है। इस कार्ड में मिट्टी के 12 महत्वपूर्ण मानकों, जैसे pH, विद्युत चालकता, जैविक कार्बन, नाइट्रोजन, फॉस्फोरस, पोटाश, सल्फर, बोरॉन तथा सूक्ष्म पोषक तत्वों—जिंक, आयरन, कॉपर एवं मैंगनीज—की विस्तृत जानकारी दी जाती है। इसके आधार पर किसानों को संतुलित उर्वरक उपयोग तथा उपयुक्त फसल चयन का वैज्ञानिक परामर्श भी उपलब्ध कराया जाता है।
उन्होंने कहा कि मृदा स्वास्थ्य कार्ड योजना केवल मिट्टी की जाँच तक सीमित नहीं है, बल्कि किसानों को वैज्ञानिक खेती, फसल चक्र, जैविक खेती तथा जल प्रबंधन जैसी टिकाऊ कृषि पद्धतियों को अपनाने के लिए भी प्रेरित करती है। इससे खेती की लागत में कमी आती है, उत्पादन एवं गुणवत्ता में वृद्धि होती है और मिट्टी की उर्वरता लंबे समय तक सुरक्षित रहती है।
मंत्री ने बताया कि राज्य के सभी नौ प्रमंडलों में चलंत मिट्टी जाँच प्रयोगशालाएँ संचालित हैं, जो दूर-दराज़ के ग्रामीण क्षेत्रों में पहुँचकर किसानों के खेतों से मिट्टी के नमूने एकत्र कर उनका परीक्षण कर रही हैं तथा मृदा स्वास्थ्य कार्ड उपलब्ध करा रही हैं।
उन्होंने बताया कि वित्तीय वर्ष 2026-27 में राज्य में 1.50 लाख मिट्टी नमूनों की जाँच एवं मृदा स्वास्थ्य कार्ड उपलब्ध कराने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। इसके विरुद्ध अब तक 1.35 लाख मिट्टी नमूनों का संग्रहण किया जा चुका है तथा विभिन्न मृदा परीक्षण प्रयोगशालाओं में परीक्षण का कार्य प्रगति पर है।
कृषि मंत्री ने कहा कि मृदा स्वास्थ्य के प्रति जन-जागरूकता बढ़ाने के उद्देश्य से राज्य के 629 चयनित पीएम श्री एवं राजकीय विद्यालयों में मिनी सॉइल टेस्टिंग लैब की स्थापना की जा रही है। इससे विद्यार्थियों के साथ-साथ ग्रामीण समुदाय में भी वैज्ञानिक खेती एवं मृदा संरक्षण के प्रति जागरूकता का विस्तार होगा।
उन्होंने राज्य के सभी किसानों से अपील की कि वे अपने खेतों की मिट्टी की जाँच अवश्य कराएँ तथा मृदा स्वास्थ्य कार्ड में दिए गए सुझावों के अनुसार ही उर्वरकों का उपयोग करें। इससे खेती अधिक लाभकारी, टिकाऊ एवं पर्यावरण के अनुकूल बनेगी तथा किसानों की आय में भी वृद्धि होगी।
