सेंट्रल डेस्क। देश आज अपना 80वां स्वतंत्रता दिवस मना रहा है. पीएम मोदी ने 15 अगस्त को लाल किले के प्राचीर से राष्ट्र को संबोधित किया. उन्होंने देशवासियों को शुभकामनाएं दी और स्वतंत्रता सेनानियों को नमन किया. ये स्वतंत्रता दिवस बहुत ही खास है क्योंकि पहली बार लाल किले पर वंदे मातरम गाया गया है. पीएम मोदी ने अपने संबोधन में कई बड़े ऐलान किए हैं. आपको बताते हैं उन्होंने अपने संबोधन में क्या कहा…


राष्ट्रव्यापी मिशन मोड के माध्यम से अगले वर्ष 1 करोड़ युवाओं को एआई में प्रशिक्षित किया जाएगा.
विभिन्न परीक्षाओं की तैयारी कर रहे युवाओं को निःशुल्क ऑनलाइन कोचिंग प्रदान की जाएगी.
बढ़ती सुरक्षा जरूरतों को पूरा करने के लिए आधुनिक प्रशिक्षण और बढ़ी हुई क्षमताएं.




गाँवों और शहरों में 5-15 वर्ष की आयु के बच्चों को लक्षित करने वाला राष्ट्रव्यापी अभियान.



1-2 वर्षों के भीतर 7-8 नए उत्पादन संयंत्र चालू हो जाएंगे.
2047 तक 100 गीगावॉट क्षमता का लक्ष्य और 6-7 वर्षों के भीतर 5 नए रिएक्टर चालू हो जाएंगे.
बताया क्या है ‘शक्ति की सप्तधारा’ :
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर लाल किले की प्राचीर से ‘शक्ति की सप्तधारा’ का विजन देश के सामने रखा. उन्होंने कहा कि विकसित भारत के निर्माण के लिए देश को नई ऊर्जा और नई दिशा की जरूरत है. प्रधानमंत्री ने भारत की सात प्रमुख शक्तियों को रेखांकित करते हुए कहा कि इन क्षेत्रों में सामर्थ्य बढ़ाकर भारत को वैश्विक स्तर पर नई पहचान दिलानी होगी.
प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि ‘शक्ति की सप्तधारा’ में पहली शक्ति मैन्युफैक्चरिंग पावर है. भारत को डिजाइन से लेकर उत्पादन तक पूरी वैल्यू चेन तैयार करनी होगी. उन्होंने कहा कि भारत को लागत, गुणवत्ता और उत्पादन क्षमता के वैश्विक मानकों पर खरा उतरते हुए दुनिया के लिए एक भरोसेमंद ग्लोबल सप्लाई चेन पार्टनर बनना होगा.
कृषि और खाद्य उत्पादन :
सप्तधारा की दूसरी शक्ति कृषि और खाद्य उत्पादन है. प्रधानमंत्री ने कहा कि वैश्विक बाजार भारत के लिए खुल रहे हैं और मुक्त व्यापार समझौतों के जरिए नए बाजारों तक पहुंच बढ़ रही है. भारत के मसाले और मोटे अनाज यानी मिलेट्स दुनिया में भारतीय ब्रांड के रूप में पहचान बनाने चाहिए.
टेक्नोलॉजी और इनोवेशन :
प्रधानमंत्री ने सप्तधारा की तीसरी शक्ति टेक्नोलॉजी और इनोवेशन को बताया. उन्होंने कहा कि यह रोबोटिक्स, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, क्वांटम टेक्नोलॉजी, स्पेस और डेटा सेंटर का दौर है. भारत को उभरती तकनीकों में वैश्विक इनोवेशन हब बनने की दिशा में आगे बढ़ना होगा.उन्होंने कहा कि यूपीआई और डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर के जरिए भारत अपनी तकनीकी क्षमता का प्रदर्शन कर चुका है. अब देश को नेक्स्ट जेनरेशन कम्युनिकेशन टेक्नोलॉजी में अगली छलांग लगाने की जरूरत है.
गति शक्ति :
सप्तधारा की चौथी शक्ति गति शक्ति है. प्रधानमंत्री मोदी ने तेज और निर्बाध कनेक्टिविटी पर जोर देते हुए कहा कि शहरों को हाई-स्पीड रेल से जोड़ना होगा. इसके साथ ही पोर्ट-लेड डेवलपमेंट पर भी विशेष ध्यान देने की जरूरत है, ताकि देश की आर्थिक गतिविधियों को और गति मिल सके.
रक्षा शक्ति :
प्रधानमंत्री ने पांचवीं शक्ति रक्षा शक्ति को बताया. उन्होंने कहा कि रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भर होना अब भारत के लिए जरूरी है. भारत केवल दुनिया के लिए बाजार बनकर नहीं रह सकता, बल्कि उसे रक्षा क्षेत्र में वैश्विक आपूर्तिकर्ता बनने की दिशा में आगे बढ़ना होगा. उन्होंने कहा कि नेक्स्ट जेनरेशन डिफेंस टेक्नोलॉजी विकसित कर भारत को हाइपरसोनिक रक्षा तकनीक समेत अत्याधुनिक क्षेत्रों में नेतृत्व हासिल करने का प्रयास करना चाहिए.
ग्रीन और ब्लू इकोनॉमी :
सप्तधारा की छठी शक्ति ग्रीन और ब्लू इकोनॉमी है. प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत को ग्रीन हाइड्रोजन, रिन्यूएबल एनर्जी और एनर्जी स्टोरेज के क्षेत्र में वैश्विक नेतृत्व हासिल करने की दिशा में काम करना होगा. उन्होंने ब्लू इकोनॉमी में मत्स्य पालन, तटीय पर्यटन और समुद्री तकनीक को बड़ी संभावनाओं वाला क्षेत्र बताया. प्रधानमंत्री के मुताबिक इन क्षेत्रों से भारत के विकास के नए रास्ते खुल सकते हैं.
भारत का सॉफ्ट पावर :
सप्तधारा की सातवीं और अहम शक्ति भारत का सॉफ्ट पावर है. प्रधानमंत्री मोदी ने योग का उदाहरण देते हुए कहा कि योग ने पूरी दुनिया को भारत से जोड़ने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है. उन्होंने कहा कि योग दुनिया के लिए ऊर्जा और भारत के लिए विश्वास का बड़ा माध्यम बनता जा रहा है.
विकसित भारत के लिए नई धारा का आह्वान :
प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत की क्षमता को पहले ‘सप्तसिंधु’ के रूप में जाना और समझा जाता था. अब विकसित भारत के निर्माण के लिए देश को ‘शक्ति की सप्तधारा’ के साथ आगे बढ़ना होगा. मैन्युफैक्चरिंग, कृषि, टेक्नोलॉजी, गति शक्ति, रक्षा, ग्रीन- ब्लू इकोनॉमी और सॉफ्ट पावर को मजबूत कर भारत को वैश्विक स्तर पर नई ऊंचाइयों तक पहुंचाने का संकल्प लेना होगा.
