- खेल के क्षेत्र में प्रधानमंत्री जी के सपनों को साकार करने में बिहार बना देश का अग्रणी राज्य
- मशाल से मेडल तक, AI और खेल विज्ञान से बिहार खोजेगा चैंपियनों की नई पीढ़ी
बीपी डेस्क। बिहार ने खेल प्रतिभाओं की पहचान और खिलाड़ियों के प्रदर्शन को वैज्ञानिक बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम उठाया है। बिहार राज्य खेल प्राधिकरण (BSSA) और भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान मद्रास (IIT मद्रास) के बीच आज एक समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर हुआ। इसके तहत कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI), इंटरनेट ऑफ थिंग्स (IoT), खेल विज्ञान और उन्नत डेटा विश्लेषण की मदद से राज्य की खेल प्रतिभाओं की पहचान और खिलाड़ियों के प्रदर्शन का वैज्ञानिक आकलन किया जाएगा।
इस बात की जानकारी देते हुए बिहार राज्य खेल प्राधिकरण के महानिदेशक सह मुख्य कार्यकारी अधिकारी श्री रवीन्द्रण शंकरण ने बताया कि यह पहल प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के 2036 ओलंपिक में भारत को शीर्ष 10 देशों में शामिल करने और 36 पदक हासिल करने के लक्ष्य, अंतरराष्ट्रीय ओलंपिक समिति (IOC) के जिम्मेदार AI उपयोग के सिद्धांतों और संशोधित खेलो इंडिया योजना में वैज्ञानिक प्रतिभा पहचान पर जोर इन तीनों दिशाओं को एक साथ जोड़ती है। बिहार के मशाल कार्यक्रम के आंकड़ों से बिहार का अपना खेल मानक तैयार होगा।
मशाल कार्यक्रम के तहत राज्यभर के स्कूली बच्चों से लंबाई, वजन, दौड़, कूद और फेंक सहित सात शारीरिक एवं प्रदर्शन संबंधी मापदंडों का डेटा जुटाया गया है। IIT मद्रास इन आंकड़ों का उन्नत सांख्यिकी और AI के माध्यम से विश्लेषण करेगा। इससे बच्चों के लिए विकास एवं फिटनेस मानक, एथलेटिक क्षमता सूचकांक, जिला-स्तरीय प्रतिभा मानचित्र और निर्णय-सहायक डैशबोर्ड तैयार किए जाएंगे। इससे ग्रामीण और दूरदराज के इलाकों में छिपी प्रतिभाओं की पहचान अधिक वैज्ञानिक और प्रभावी ढंग से हो सकेगी।
इस समझौते के दूसरे महत्वपूर्ण पहलू के तहत बिना सेंसर खिलाड़ी की तकनीक परखेगी AI प्रणाली। भारोत्तोलन प्रशिक्षण केंद्र में AI आधारित सेंसर-रहित गति विश्लेषण प्रणाली भी स्थापित की जाएगी। कैमरों की मदद से यह प्रणाली खिलाड़ी के शरीर पर कोई सेंसर लगाए बिना हर भार उठाने की तकनीक, संतुलन और भार उठाने की दिशा का विश्लेषण करेगी। इससे कोचों को खिलाड़ी के प्रदर्शन का तत्काल और वस्तुनिष्ठ विश्लेषण मिलेगा, जिससे प्रशिक्षण को जरूरत के अनुसार अधिक सटीक बनाया जा सकेगा।
इस पहल से बिहार में खेल प्रतिभा की पहचान केवल अनुमान या परंपरागत चयन तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि आंकड़ों और वैज्ञानिक विश्लेषण पर आधारित होगी। जिला-वार उपलब्ध आंकड़ों के आधार पर प्रशिक्षण केंद्रों, प्रशिक्षकों और खेल संसाधनों की जरूरत तय करने में भी मदद मिलेगी। सबसे महत्वपूर्ण बात यह होगी कि बिहार के बच्चों के लिए बिहार के आंकड़ों से वैज्ञानिक मानक तैयार होंगे।
इससे राज्य के ग्रामीण और पिछड़े क्षेत्रों के प्रतिभाशाली बच्चों को भी अपनी क्षमता के अनुरूप आगे बढ़ने का अवसर मिल सकेगा।BSSA के अनुसार, इस मॉडल को आगे चलकर भारोत्तोलन के साथ अन्य खेलों में भी लागू किया जा सकता है। बच्चों की पहचान-रहित जानकारी का ही उपयोग किया जाएगा तथा डेटा, डैशबोर्ड, AI मॉडल और विकसित उपकरण BSSA की संपत्ति रहेंगे। डेटा प्रबंधन में जिम्मेदार और सुरक्षित AI के सिद्धांतों का पालन किया जाएगा। श्री शंकरण ने आगे कहा कि 2036 ओलंपिक के लिए भारत के लक्ष्य को हासिल करने में बिहार अपनी भूमिका अभी से सुनिश्चित करना चाहता है।
उन्होंने कहा, मशाल कार्यक्रम के माध्यम से हमने बड़ी संख्या में बच्चों का डेटा जुटाया है। अब IIT मद्रास की AI और खेल विज्ञान विशेषज्ञता के साथ इस डेटा को वैज्ञानिक प्रतिभा पहचान और बेहतर प्रशिक्षण का आधार बनाया जाएगा। हमारा संकल्प है कि बिहार के हर गांव की प्रतिभा पहचानी जाए और उसे विश्वस्तरीय अवसर मिले। मशाल से मेडल तक, यही हमारा लक्ष्य है।”
IIT मद्रास के प्रो. महेश वी. पंचाग्नुला ने कहा कि मशाल कार्यक्रम से प्राप्त व्यापक डेटा और IIT मद्रास की AI तथा खेल विज्ञान विशेषज्ञता मिलकर ऐसा मॉडल तैयार कर सकती है, जिसे देश के अन्य हिस्सों में भी अपनाया जा सके। उन्होंने कहा कि विज्ञान और खेल का यह समन्वय भारत की ओलंपिक तैयारियों को नई दिशा दे सकता है।
समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर के दौरान बिहार राज्य खेल प्राधिकरण के महानिदेशक-सह-मुख्य कार्यकारी अधिकारी श्री रवीन्द्रण शंकरण, IIT मद्रास के प्रो. मनु संथानम, डीन (IC & SR), बाबजी श्रीनिवासन, प्रोफेसर एवं को-हेड, CESSA, तथा डॉ. महेश वी. पंचाग्नुला, प्रोफेसर एवं एसोसिएट फैकल्टी इंचार्ज, IIT मद्रास इनक्यूबेशन सेल तथा बिहार राज्य खेल प्राधिकरण के उप निदेशक श्री हिमांशु सिंह उपस्थित रहे।
