तेजस्वी यादव ने प्रधानमंत्री मोदी को लिखा पत्र, केन्द्र सरकार के सामने रखी 7 प्रमुख मांगे

पटना

प्रभात कुमार। बिहार विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को एक पत्र भेजकर राज्य में व्याप्त भीषण बाढ़ आपदा की ओर उनका ध्यान आकर्षित किया है। उन्होंने बताया कि बिहार के 20 जिले इस समय बाढ़ की गंभीर चपेट में हैं और लाखों लोग आपदा में फंसे हुए हैं। नदियों के लगातार बढ़ते जलस्तर से बड़े पैमाने पर जलजमाव हुआ है, जिससे सार्वजनिक बुनियादी ढांचे को भारी नुकसान पहुंचा है और हजारों करोड़ रुपये के जान-माल की क्षति हुई है।

तेजस्वी यादव ने आरोप लगाया कि राज्य की एनडीए सरकार द्वारा चलाए जा रहे बाढ़ राहत और बचाव कार्य “ऊंट के मुंह में जीरा” साबित हो रहे हैं। राज्य की एक बड़ी आबादी भोजन, स्वच्छ पेयजल, दवा, बिजली और पशुचारे जैसी बुनियादी सुविधाओं के लिए संघर्ष कर रही है। उन्होंने बिहार से निर्वाचित एनडीए के केंद्रीय मंत्रियों और सांसदों को असहाय व अक्षम करार देते हुए कहा कि वे न तो केंद्र से इसे ‘राष्ट्रीय आपदा’ घोषित करा पा रहे हैं और न ही बिहार के लिए विशेष सहायता राशि मांग रहे हैं।

पत्र में उन्होंने इस स्थिति को प्राकृतिक आपदा के साथ-साथ आपदा प्रबंधन के स्तर पर रिस्पांस, मिटिगेशन और एडॉप्शन की वर्षों से चली आ रही विफलता का परिणाम बताया। तेजस्वी ने आरोप लगाया कि राज्य की आकस्मिक निधि (Contingency Fund) व अन्य वित्तीय संसाधनों का उपयोग नियमित सरकारी खर्चों में कर दिया गया है, जिससे आपदा के समय राहत कार्यों के लिए धन की कमी हो रही है।

इसके लिए उन्होंने राज्य की वित्तीय तैयारियों और आकस्मिक निधि के उपयोग की स्वतंत्र सीएजी (CAG) समीक्षा कराने की मांग उठाई। नेता प्रतिपक्ष ने केंद्र सरकार से मांग की कि बिहार की बाढ़ को अविलंब ‘राष्ट्रीय आपदा’ घोषित किया जाए और तत्काल 5,000 करोड़ रुपये का विशेष राहत पैकेज जारी किया जाए। उन्होंने जलमग्न व संपर्कहीन क्षेत्रों में भोजन और दवाएं पहुंचाने के लिए सेना तथा भारतीय वायुसेना के हेलीकॉप्टरों की मदद लेने का अनुरोध किया।

साथ ही प्रभावित किसानों, मजदूरों और पशुपालकों के लिए विशेष आर्थिक सहायता तथा राहत शिविरों में सभी बुनियादी संसाधन जुटाने की अपील की। राज्य के 76 से 80 प्रतिशत भूभाग के बाढ़ प्रभावित होने का हवाला देते हुए तेजस्वी यादव ने समस्या के स्थायी समाधान के लिए दीर्घकालिक ‘फ्लड रेजिलिएंस मिशन’ शुरू करने का सुझाव दिया।

इसमें तटबंध प्रबंधन, आधुनिक फ्लड फोरकास्टिंग और पड़ोसी देशों (नेपाल व बांग्लादेश) के साथ जल प्रबंधन समझौतों को शामिल करने पर जोर दिया गया। अंत में उन्होंने प्रधानमंत्री से राजनीति से ऊपर उठकर वर्तमान संकट को मानवीय दायित्व के रूप में देखने और स्वयं बिहार आकर जमीनी स्थिति का जायजा लेने का विनम्र आग्रह किया।