श्रमजीवी एक्सप्रेस में बेटे और बिहारशरीफ स्टेशन के प्लेटफॉर्म पर बच्ची का हुआ जन्म, किन्नर समाज, जीआरपी और एंबुलेंस टीम ने बचाई जान
बिहारशरीफ, अविनाश पांडेय : बिहारशरीफ रेलवे स्टेशन पर 6 अगस्त 2026 यानी गुरुवार को इंसानियत की मिसाल देखने को मिली। दिल्ली से अपने गांव लौट रही गर्भवती महिला ने श्रमजीवी एक्सप्रेस में पहले बेटे और बिहारशरीफ रेलवे स्टेशन के प्लेटफॉर्म पर दूसरी संतान के रूप में एक बच्ची को जन्म दिया। इस कठिन परिस्थिति में किन्नर समाज, जीआरपी की महिला जवानों और एंबुलेंस कर्मियों ने तत्परता दिखाते हुए सुरक्षित प्रसव कराया और जच्चा-बच्चा को सदर अस्पताल पहुंचाया। चिकित्सकों के अनुसार नवजात बच्ची की हालत गंभीर बनी हुई है, जबकि मां और नवजात बेटे की स्थिति सामान्य है।

अस्थावां थाना क्षेत्र के अमावा गांव निवासी दशरथ बिंद अपनी गर्भवती पत्नी श्यामफूला देवी को लेकर दिल्ली से श्रमजीवी एक्सप्रेस के जरिए गांव लौट रहे थे। यात्रा के दौरान महिला को अचानक प्रसव पीड़ा शुरू हो गई। ट्रेन में सफर कर रहे किन्नर समाज के लोगों ने तुरंत मदद के लिए आगे आकर महिला की देखभाल की, जिसके बाद उसने ट्रेन के अंदर एक बेटे को जन्म दिया।
इसी बीच ट्रेन बिहारशरीफ रेलवे स्टेशन पहुंची। प्लेटफॉर्म पर उतरते ही महिला की प्रसव पीड़ा फिर तेज हो गई और उसने दूसरी संतान के रूप में एक बच्ची को जन्म दिया। उस समय प्लेटफॉर्म पर मौजूद किन्नर समाज के सदस्यों और जीआरपी की महिला जवानों ने महिला को सुरक्षित स्थान पर पहुंचाकर प्रसव कराने में अहम भूमिका निभाई। उनकी तत्परता से जच्चा और नवजातों की जान सुरक्षित बचाई जा सकी।
एंबुलेंस के इमरजेंसी मेडिकल टेक्नीशियन (ईएमटी) मोहम्मद असगर ने बताया कि सूचना मिलते ही एंबुलेंस टीम स्टेशन पहुंची। तब तक पहला बच्चा ट्रेन में जन्म ले चुका था। प्लेटफॉर्म पर उतरने के बाद दूसरे बच्चे का आधा शरीर बाहर आ चुका था। ऐसे में मौके पर ही सुरक्षित प्रसव कराया गया। इसके बाद मां और दोनों नवजातों को बिहारशरीफ सदर अस्पताल ले जाया गया।
सदर अस्पताल में चिकित्सकों की निगरानी में तीनों का इलाज चल रहा है। डॉक्टरों के अनुसार नवजात बच्ची की हालत फिलहाल नाजुक बनी हुई है, जबकि मां और नवजात बेटे की स्थिति सामान्य है। घटना के बाद किन्नर समाज, जीआरपी की महिला जवानों और एंबुलेंस टीम की संवेदनशीलता, मानवता और त्वरित कार्रवाई की स्टेशन पर मौजूद लोगों ने जमकर सराहना की। विपरीत परिस्थितियों में उनकी तत्परता ने यह साबित कर दिया कि मानवता सबसे बड़ा धर्म है।
