सेंट्रल डेस्क। लोक परीक्षा (अनुचित साधन निवारण) अधिनियम, 2024 में सख्त प्रावधान शामिल करने के लिए लाए गए इस संशोधन विधेयक पर लोकसभा में जोरदार बहस हुई. चर्चा के दौरान नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी की कुछ टिप्पणियों को लेकर सत्तापक्ष और विपक्ष के बीच तीखी नोकझोंक हुई. हंगामे के बीच ही प्रधानमंत्री कार्यालय में राज्य मंत्री जितेंद्र सिंह ने विधेयक पर हुई चर्चा का जवाब दिया और उनके जवाब के बाद सदन ने ध्वनिमत से विधेयक को मंजूरी प्रदान कर दी.

विधेयक पारित होने के बाद कांग्रेस सांसदों की नारेबाजी के बीच ही अध्यक्ष ओम बिरला ने कार्यवाही दिनभर के लिए स्थगित कर दी.चर्चा का जवाब देते हुए जितेंद्र सिंह ने कहा कि नीट प्रश्नपत्र लीक के मामले में सरकार ने फौरन कार्रवाई की और 12 जुलाई को जांच सीबीआई को सौंप दी गई. उन्होंने कहा कि 28 जुलाई को इस मामले में आरोपपत्र दायर कर दिया गया है और आज से सुनवाई शुरू हो गई है.
सिंह ने कहा कि नए संशोधन विधेयक के प्रभाव में आने के बाद फास्ट ट्रैक अदालत में सुनवाई के साथ इस मामले में पांच महीने में फैसला आ जाएगा. जितेंद्र सिंह ने कहा कि प्रश्नपत्र लीक के विरुद्ध कड़े प्रावधान के साथ मूल कानून 2024 में लागू किया गया था और आज प्रश्नपत्र लीक संबंधी खामियां सामने आने के बाद सरकार ने माना कि कानून को और कड़ा बनाने की जरूरत है.
केंद्रीय मंत्री जितेंद्र सिंह ने कहा कि कांग्रेस सांसद गौरव गोगोई ने चर्चा के दौरान कहा कि दिल्ली में मासूम बच्चों पर जुल्मोसितम ढाया गया, जबकि सरकार ने सर्वोच्च संयम के साथ कार्रवाई की और सुनिश्चित किया कि कोई हताहत नहीं हो. उन्होंने कहा, ‘‘शायद गोगोई अपने अनुभव से बोल रहे थे. क्योंकि असम में 1979 से 1984 तक छात्रों के आंदोलन पर पुलिस कार्रवाई में 860 लोग मारे गए थे जिनमें अधिकतर छात्र थे.
उस समय असम में कांग्रेस की सरकार थी.’’ सिंह ने कहा कि कांग्रेस नेता प्रियंका गांधी ने देश में पिछले कुछ साल में 152 बार प्रश्नपत्र लीक होने और इनमें 750 करोड़ बच्चों के प्रभावित होने का दावा किया. उन्होंने कहा, ‘‘पता नहीं प्रियंका गांधी यह आंकड़ा कहां से लाईं.’’ सिंह ने कहा कि प्रियंका गांधी ने 2024 का कानून लागू होने के बाद कोई कार्रवाई नहीं होने की बात कही, जबकि ऐसे मामलों में 52 प्राथमिकियां दर्ज हो चुकी हैं.
संशोधन बिल में क्या-क्या हुआ बदलाव?
केंद्रीय मंत्री जितेंद्र सिंह ने लोकसभा में बताया, प्रतियोगी परीक्षाओं की पवित्रता और विश्वसनीयता को बहाल करने के उद्देश्य से ‘पब्लिक एग्जामिनेशन (अनुचित साधनों की रोकथाम) संशोधन बिल, 2026’ लाया गया है. इस नए संशोधन के जरिए अपराधियों और सर्विस प्रोवाइडरों पर आर्थिक व जेल की सजा के प्रावधानों को दोगुना तक कड़ा कर दिया गया है.
दोषियों पर कार्रवाई
सजा: पहले 3-5 साल की जेल, अब 5-10 साल की जेल
जुर्माना: पहले 10 लाख रुपये तक, अब 50 लाख रुपये तक
सर्विस प्रोवाइडर (एजेंसियों) के खिलाफ कड़ाई
जुर्माना: पहले 1 करोड़ रुपये तक, अब 5 करोड़ रुपये तक
ब्लैकलिस्टिंग : पहले 4 साल तक बैन, अब 8 साल के लिए बैन
पेपर लीक माफिया पर शिकंजा
सजा: पहले 5-10 साल की जेल, अब 7-10 साल की जेल
जुर्माना: पहले 1 करोड़ रुपये तक, अब 10 करोड़ रुपये तक
फास्ट-ट्रैक कोर्ट और सख्त समय-सीमा
मामलों के त्वरित निपटारे के लिए विशेष फास्ट-ट्रैक अदालतें बनाई जाएंगी.
केंद्रीय एजेंसी या स्पेशल टास्क फोर्स को जांच 2 महीने के भीतर अनिवार्य रूप से पूरी करनी होगी.
किरेन रिजिजू ने विपक्षी दलों पर ध्यान भटकाने का लगाया आरोप
चर्चा के दौरान केंद्रीय संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने विपक्षी दलों पर आरोप लगाया कि वे लोकसभा में प्रश्नपत्र लीक होने से रोकने संबंधित विधेयक पर चर्चा से ध्यान भटकाने के लिए अन्य मुद्दे उठा रहे हैं. रिजिजू ने कहा कि विपक्षी नेता चर्चा के दौरान राजनीति करने में व्यस्त रहे. लोकसभा में इस विधेयक पर मंगलवार से चर्चा शुरू हुई थी.
सरकार ने इसे छात्रों के हितों की सुरक्षा के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दोहराने वाला कदम बताया है. रिजिजू ने कहा कि यह छात्रों की मांगों के जवाब में लाया गया एक बेहतरीन विधेयक है. उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री ने एक बड़ा फैसला लिया है, जिससे छात्रों में नया विश्वास पैदा हुआ है.
