दूषित जल एवं रसायनों के खतरे को लेकर सरकार पूरी तरह सजग, प्रभावित क्षेत्रों में लैब टेस्टिंग और आवश्यक कार्रवाई होगी तेज
जैविक एवं प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने के लिए करोड़ों रुपये की योजनाओं को मिली स्वीकृति
’’खेत बचाओ अभियान’’ को जन-आंदोलन बनाने के लिए जनप्रतिनिधियों से सहयोग की अपील
बीपी डेस्क। बिहार विधान सभा में कृषि मंत्री श्री विजय कुमार सिन्हा ने माननीय सदस्य श्री कुमार सर्वजीत के ध्यानाकर्षण सूचना पर उत्तर देते हुए आज सदन को आश्वस्त किया कि दूषित जल से सिंचित सब्जियों तथा रासायनिक उर्वरकों एवं कीटनाशकों के अनियंत्रित उपयोग से उत्पन्न खतरों के प्रति राज्य सरकार पूर्णतः सजग है। इस दिशा में केंद्र तथा राज्य, दोनों स्तरों पर ठोस, दूरदर्शी एवं दीर्घकालिक कदम उठाए जा रहे हैं।
मंत्री श्री सिन्हा ने बताया कि केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री के नेतृत्व में देश के सभी राज्यों के कृषि मंत्रियों एवं विभागीय अधिकारियों के साथ इस विषय पर निरंतर समीक्षा बैठकें आयोजित की जा रही हैं। इसी उद्देश्य से 1 जून, 2026 से ’’खेत बचाओ अभियान’’ संचालित किया जा रहा है।
इसका मूल उद्देश्य राज्य की कृषि भूमि, जल स्रोत तथा खाद्य पदार्थों को रासायनिक दुष्प्रभावों से मुक्त रखते हुए आने वाली पीढ़ियों को स्वस्थ एवं सुरक्षित मृदा उपलब्ध कराना है। अभियान के तहत कृषि वैज्ञानिक सीधे किसानों के खेतों तक पहुँचकर उन्हें जागरूक कर रहे हैं। पिछले एक माह में ही 6 लाख 26 हजार से अधिक किसानों तक कृषि वैज्ञानिक एवं विभागीय पदाधिकारी पहुँचकर उन्हें जागरूक कर चुके हैं।
मृदा स्वास्थ्य सुधार और किसान रजिस्ट्री पर विशेष जोर उन्होंने बताया कि खेतों की मिट्टी की जाँच कर मृदा स्वास्थ्य कार्ड तैयार किया जा रहा है, ताकि आवश्यकतानुसार ही उर्वरकों का संतुलित उपयोग सुनिश्चित किया जा सके। इसके साथ ही एग्रीस्टैक – फार्मर रजिस्ट्री के अंतर्गत किसानों की यूनिक फार्मर आईडी बनाई जा रही है, जिसमें अब तक 55 लाख से अधिक किसान पंजीकृत हो चुके हैं।
उन्होंने बताया कि राज्य के 629 पीएम श्री एवं उच्च विद्यालयों में मिट्टी जाँच प्रयोगशालाओं की स्थापना की जा रही है, ताकि छात्रों को मृदा स्वास्थ्य के प्रति जागरूक किया जा सके तथा उनके माध्यम से किसान परिवारों तक भी मिट्टी जाँच एवं संतुलित पोषक तत्व प्रबंधन का संदेश पहुँचाया जा सके।
मंत्री श्री सिन्हा ने कहा कि प्रधानमंत्री जी के संकल्प के अनुरूप देशभर के किसानों को प्राकृतिक एवं परंपरागत खेती से जोड़ा जा रहा है। उन्होंने बताया कि परंपरागत कृषि विकास योजना के अंतर्गत 30.60 करोड़ रूपया की योजना स्वीकृत की गई है, जिसके माध्यम से राज्य के सभी 38 जिलों में 30,000 हेक्टेयर भूमि पर जैविक खेती की जाएगी।
इसी प्रकार, नेशनल मिशन ऑन नेचुरल फार्मिंग के तहत वर्ष 2025-26 के लिए 25 करोड़ तथा वर्ष 2026-27 के लिए 10.30 करोड़ की राशि स्वीकृत की गई है। उन्होंने बताया कि वर्मी कम्पोस्ट, गोमूत्र, बेसन एवं गुड़ जैसे स्थानीय संसाधनों पर आधारित जैविक उपादान स्थानीय स्तर पर आसानी से उपलब्ध है। इसके प्रयोग से मिट्टी का स्वास्थ्य सुधरेगा, खेती की लागत घटेगी तथा आम जनता को सुरक्षित एवं शुद्ध भोजन उपलब्ध होगा। उन्होंने कहा कि धरती माता को स्वस्थ रखने तथा आने वाली पीढ़ियों को सुरक्षित भविष्य सौंपने के उद्देश्य से सरकार पूरी संवेदनशीलता के साथ कार्य कर रही है।
मंत्री श्री सिन्हा ने सभी माननीय सदस्यों से आग्रह किया कि वे स्वयं भी अपनी कृषि भूमि के कम-से-कम एक-तिहाई हिस्से में प्राकृतिक खेती अपनाएं तथा अपने-अपने क्षेत्रों के किसानों को भी इसके लिए प्रेरित करें। उन्होंने कहा कि प्राकृतिक खेती को जन-आंदोलन का स्वरूप देकर ही मिट्टी, पर्यावरण और मानव स्वास्थ्य की प्रभावी सुरक्षा सुनिश्चित की जा सकती है।
सब्जियों में सीसा एवं कैडमियम जैसे हानिकारक तत्वों की मौजूदगी संबंधी खबरों को सरकार ने अत्यंत गंभीरता से लिया है। माननीय मंत्री ने स्पष्ट किया कि प्रभावित क्षेत्रों में नियमित लैब टेस्टिंग एवं नमूनों की जाँच को और तेज किया जाएगा।
कृषि मंत्री ने राज्य के समस्त जनप्रतिनिधियों से ’’खेत बचाओ अभियान’’ को व्यापक जन-आंदोलन का रूप देने की अपील की। उन्होंने बताया कि कृषि विभाग द्वारा राज्य के सभी माननीय विधायकों, विधान पार्षदों एवं पंचायत प्रतिनिधियों को पत्र भेजा जा चुका है, ताकि सभी जनप्रतिनिधि अपने-अपने क्षेत्रों में किसानों को जागरूक करने में सक्रिय भूमिका निभाएं। मंत्री ने कहा कि राज्य सरकार किसानों की आर्थिक समृद्धि तथा आम जनमानस के स्वास्थ्य, दोनों के प्रति पूरी तरह प्रतिबद्ध है। एक स्वस्थ, सुरक्षित एवं समृद्ध बिहार के निर्माण के लिए सरकार कृतसंकल्पित है।
