नालंदा: शहर में सुखा नशा का बढ़ता जाल, कैसे मिलेगी मुक्ति और कैसे सुधरेगा हाल….

नालंदा

बिहारशरीफ, अविनाश पांडेय : सुखा नशा यानी बिना तरल पदार्थ के बहने वाला आधुनिक रासायनिक नशा आज के इस आधुनिक युग का वह अदृश्य शक्ति है जो जेब हल्की और आंखें लाल करने की पूरी गारंटी देता है। इसके भक्त जमीन पर रहकर भी बादलों की सैर करते हैं। और समाज इसे देखकर गहरी आहें भरता है।
सुखे नशे की महिमा भी पढ़ लीजिए…

सुखे नशे की महिमा और विशेषता यह है कि इसके लिए ग्लास की महफिल नहीं सजाई जाती है। इसमें बोतलों और सोडा वाटर का झंझट नहीं होता। बस एक छोटी पुड़िया या पाउडर ही इंसान को सीधा अंतरिक्ष में पहुंचा देता है। छोटी सी पुड़िया में कैद यह सुखा नशा बड़ी ही आसानी से किताबों के पन्नों या मानव शरीर के किसी भी भाग में या बीच में छुपाया जा सकता है। यह एक ऐसा नशा है जिससे नशेड़ियों की समय की बचत होती है।

भ्रमलोक के भ्रमण को लंबी बैठकों की जरूरत नहीं

गीले नशे की तरह लंबी बैठकों की जरूरत नहीं होती। दो मिनट में खेल खत्म और इंसान सीधे परलोक या भ्रमलोक के रास्ते पर चला जाता है। आधुनिक जीवन और इसका प्रभाव ऐसा है कि इसके सेवन मात्रा से ही इसके आशिक सपनों के सौदागर बन जाते हैं। यह ऐसा नशा है की इसका धुआं शरीर के अंदर जाते हैं मन और मस्तिष्क को पुदीने के पेड़ पर चढ़ा देता है, और नशेड़ी अपनी अलग दुनिया में खो जाता हैं जब तक नशा का असर मस्तिष्क पर रहता है तब तक वह सपनों का सौदागर कहलाता है।
इसके सेवन का आर्थिक चमत्कार तो देखिए

इसके सेवन से आर्थिक चमत्कार भी होता है। यह वह जादू है जो घर के बर्तनों, गहनों और बैंक बैलेंस को हवा बना देता है। भाई इस नशे की ऐसी महिमा है कि मत पुछिए… इसे पाने की ललक में सफेद पाउडर को पाने की ललक में नशेड़ी हद से गुजर जाते हैं। आपके घरों का केबल यानी बिजली का तार, घर के बाहर खड़ी साइकिल या दुकान के बाहर रखें छोटे-मोटे सामान अचानक से अंतर्ध्यान होने लगते हैं। भाई अब तो हालात ऐसे इन नशेड़ियों ने बना रखा है कि ट्रांसफार्मर से आपके घर तक आने वाली केबल तार भी इनके द्वारा काट लिया जा रहा है। लोग अंधेरे में रह रहे हैं।

नए पुलिस अधीक्षक से पूरी आस
सुख नशा पुलिस के लिए बहुत बड़ी चुनौती बनी हुई है। इस पर नियंत्रण करना अति आवश्यक है। नालंदा के नए पुलिस कप्तान हृदय कांत अपनी प्राथमिकताओं में पत्रकारों के समक्ष सुखा नशा को नियंत्रित करने की बात कही है। जनता जनार्दन पुलिस अधीक्षक से काफी उम्मीद संजोय बैठी है। अब देखना यह है कि इस चुनौती को नालंदा पुलिस किस रूप में लेती है।