बिहार प्रदेश कांग्रेस सेवा दल का राज्यव्यापी आंदोलन पहुंचा नालंदा, वित्त रहित शिक्षा नीति समाप्त करने की मांग ने पकड़ा जोर

नालंदा बिहारशरीफ

हॉस्पिटल मोड पर धरना-प्रदर्शन, शिक्षक-कर्मियों ने उठाई नियमित वेतनमान, समायोजन और सेवा सुरक्षा की मांग

बिहारशरीफ, अविनाश पांडेय : वित्त रहित शिक्षा नीति की समाप्ति, वित्त रहित विद्यालयों एवं महाविद्यालयों के समायोजन तथा वर्षों से कार्यरत शिक्षक एवं शिक्षकेत्तर कर्मचारियों को नियमित वेतनमान, सेवा सुरक्षा, पेंशन एवं सामाजिक सुरक्षा देने की मांग को लेकर बिहार प्रदेश कांग्रेस सेवा दल का राज्यव्यापी आंदोलन शनिवार को नालंदा पहुंचा। हॉस्पिटल मोड़ पर आयोजित एक दिवसीय धरना-प्रदर्शन में वित्त रहित शिक्षण संस्थानों के शिक्षक, शिक्षकेत्तर कर्मचारी, प्राचार्य, कांग्रेस सेवा दल के पदाधिकारी, कांग्रेसजन, विद्यार्थी एवं शिक्षा से जुड़े लोग शामिल हुए।

सभा को संबोधित करते हुए बिहार प्रदेश कांग्रेस सेवा दल के प्रदेश अध्यक्ष प्रो. (डॉ.) संजय यादव ने कहा कि वित्त रहित विद्यालयों एवं महाविद्यालयों के शिक्षक और शिक्षकेत्तर कर्मचारी पिछले चार दशकों से बिहार की शिक्षा व्यवस्था को मजबूती देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं। सीमित संसाधनों और अनेक कठिनाइयों के बीच इन शिक्षकों ने विद्यार्थियों को शिक्षा देने और उनका भविष्य संवारने का काम किया है।

उन्होंने कहा कि यह विडंबना है कि जिन शिक्षकों ने अपना जीवन विद्यार्थियों के भविष्य निर्माण में लगा दिया, उनका अपना भविष्य आज भी अनिश्चित है। नियमित वेतनमान, सेवा सुरक्षा, पेंशन एवं सामाजिक सुरक्षा जैसी बुनियादी सुविधाओं के लिए उन्हें वर्षों से संघर्ष करना पड़ रहा है। उन्होंने कहा कि अब सरकार को इस स्थिति को बदलने के लिए निर्णायक पहल करनी होगी।

प्रो. (डॉ.) संजय यादव ने कहा कि वित्त रहित शिक्षा नीति को समाप्त कर वित्त रहित विद्यालयों एवं महाविद्यालयों का समायोजन किया जाना चाहिए। इन संस्थानों में वर्षों से सेवा दे रहे शिक्षक एवं शिक्षकेत्तर कर्मचारियों के लिए नियमित वेतनमान के साथ सुरक्षित और सम्मानजनक सेवा व्यवस्था सुनिश्चित की जानी चाहिए। उन्होंने कहा कि राज्य के अलग-अलग जिलों में लगातार हो रहे आंदोलनों में शिक्षक एवं शिक्षकेत्तर कर्मचारियों की बढ़ती भागीदारी यह साबित कर रही है कि यह मुद्दा अब केवल किसी एक जिले तक सीमित नहीं है। वित्त रहित शिक्षा नीति अब पूरे बिहार का मुद्दा बन चुकी है।

बिहार प्रदेश कांग्रेस सेवादल के प्रभारी अफरोज खान ने कहा कि वित्त रहित शिक्षक एवं शिक्षकेत्तर कर्मचारियों की समस्या चार दशक पुरानी है। वर्षों से शिक्षा व्यवस्था में योगदान देने वाले शिक्षक-कर्मचारी आज भी अपने अधिकारों के लिए संघर्ष कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि शिक्षक केवल वेतन की मांग नहीं कर रहे हैं, बल्कि सम्मानजनक जीवन, सुरक्षित सेवा और भविष्य की सामाजिक सुरक्षा चाहते हैं।

सरकार को वित्त रहित शिक्षा नीति समाप्त करने तथा संस्थानों के समायोजन की दिशा में ठोस कदम उठाना चाहिए। बिहार के विभिन्न जिलों में आंदोलन को मिल रहा समर्थन लगातार बढ़ रहा है। उन्होंने शिक्षक एवं शिक्षकेत्तर कर्मचारियों से एकजुट होकर लोकतांत्रिक तरीके से संघर्ष को आगे बढ़ाने की अपील की।

कार्यक्रम में फ़ैक्टनेब के प्रदेश अध्यक्ष डॉ राकेश कानन भी शामिल हुए। उन्होंने वित्त रहित शिक्षक एवं शिक्षकेत्तर कर्मचारियों की मांगों का समर्थन करते हुए कहा कि शिक्षा व्यवस्था को मजबूत करने वाले शिक्षक स्वयं यदि आर्थिक और सामाजिक असुरक्षा में रहेंगे तो इसका असर विद्यार्थियों और पूरी शिक्षा व्यवस्था पर पड़ेगा।

धरना-प्रदर्शन के बाद आंदोलनकारियों ने अपनी मांगों के समर्थन में शांतिपूर्ण पदयात्रा निकाली। पदयात्रा के बाद जिला प्रशासन के माध्यम से मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन सौंपा गया। ज्ञापन में वित्त रहित शिक्षा नीति को समाप्त करने तथा वर्षों से कार्यरत शिक्षक एवं शिक्षकेत्तर कर्मचारियों के भविष्य को सुरक्षित करने के लिए ठोस नीति बनाने की मांग की गई।

कार्यक्रम की अध्यक्षता नालंदा जिला कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष प्विवेक सिंहा ने की, जबकि मंच संचालन रमेश कुमार ने किया.
धरना कार्यक्रम में डॉ राधेश्याम शर्मा डॉ सुनील कुमार डॉक्टर हेमंत कुमार डॉक्टर आनंद कुमार एसपी सिंह प्रोफेसर कामेश्वर मिस्त्री प्रोफेसर उदय शंकर प्रोफेसर संजय पांडे सहित विभिन्न शिक्षकों एवं कांग्रेसी नेताओं ने कहा कि वित्त रहित विद्यालयों एवं महाविद्यालयों ने बिहार में शिक्षा के विस्तार में महत्वपूर्ण योगदान दिया है।

इन संस्थानों में वर्षों से सेवा दे रहे शिक्षक एवं शिक्षकेत्तर कर्मचारियों की उपेक्षा अब स्वीकार्य नहीं है। सरकार को उनकी मांगों पर गंभीरता से विचार करते हुए शीघ्र निर्णय लेना चाहिए। सभा में उपस्थित शिक्षक एवं शिक्षकेत्तर कर्मचारियों ने वित्त रहित शिक्षा नीति की समाप्ति, वित्त रहित विद्यालयों एवं महाविद्यालयों के समायोजन, नियमित वेतनमान, सेवा सुरक्षा, पेंशन एवं सामाजिक सुरक्षा की मांग को लेकर संघर्ष जारी रखने का संकल्प लिया।