बिहारशरीफ में सफाईकर्मियों की हड़ताल दूसरे दिन भी जारी, 250 टन कचरे का उठाव ठप, शहर में गंदगी का अंबार

नालंदा बिहारशरीफ

बिहारशरीफ, अविनाश पांडेय : बिहारशरीफ नगर निगम क्षेत्र में सफाईकर्मियों की अनिश्चितकालीन हड़ताल शुक्रवार को दूसरे दिन भी जारी रही। बिहार लोकल बॉडीज इम्पलाइज फेडरेशन एवं बिहार राज्य स्थानीय निकाय कर्मचारी महासंघ संयुक्त संघर्ष मोर्चा के आह्वान पर नगर निगम के करीब 600 से 700 सफाईकर्मी अपनी तीन सूत्री मांगों को लेकर हड़ताल पर हैं। कर्मचारियों ने नगर निगम कार्यालय के मुख्य द्वार पर धरना देकर कामकाज पूरी तरह ठप कर दिया।

हड़ताल का असर अब पूरे शहर में साफ दिखाई देने लगा है। नगर निगम क्षेत्र से प्रतिदिन लगभग 250 टन कचरे का उठाव होता है, लेकिन सफाई कार्य बंद रहने से सड़कों, बाजारों, मोहल्लों और नालियों के किनारे कचरे का अंबार लग गया है। बारिश के मौसम में गंदगी और जलजमाव के कारण डेंगू, मलेरिया सहित अन्य संक्रामक बीमारियों के फैलने की आशंका बढ़ गई है। नगर निगम के पास फिलहाल कचरा उठाव की कोई वैकल्पिक व्यवस्था नहीं होने से लोगों की परेशानियां लगातार बढ़ रही हैं।

नाला रोड के दुकानदार अनिल कुमार और अंबेर निवासी अरुण कुमार गुप्ता ने बताया कि सफाई नहीं होने से दुकानदारों को खुद ही अपनी दुकानों के सामने सफाई करनी पड़ रही है। जगह-जगह फैले कचरे और दुर्गंध से आम लोगों का आवागमन भी प्रभावित हो रहा है।

यूनियन के उपाध्यक्ष करण कुमार ने सरकार पर सफाईकर्मियों की वर्षों से उपेक्षा करने का आरोप लगाते हुए कहा कि जब तक उनकी मांगें पूरी नहीं होतीं, आंदोलन जारी रहेगा। वहीं संघ के अध्यक्ष विक्की कुमार ने बताया कि उनकी मुख्य मांगों में सभी सफाईकर्मियों को स्थायी करना, ‘समान काम के लिए समान वेतन’ लागू करना तथा ठेका प्रथा समाप्त करना शामिल है। उन्होंने आरोप लगाया कि सफाईकर्मियों को अन्य सरकारी कर्मचारियों की तुलना में कम वेतन और सुविधाएं मिलती हैं तथा ड्यूटी के दौरान मृत्यु होने पर उनके परिवार को उचित मुआवजा या अनुकंपा का लाभ भी नहीं दिया जाता।

संघ के सचिव मनोज रविदास ने कहा कि पिछली हड़ताल के दौरान सरकार ने मांगें पूरी करने का आश्वासन दिया था, लेकिन बाद में वादाखिलाफी की। इस बार मांगें पूरी होने तक आंदोलन जारी रहेगा। हड़ताली कर्मचारियों ने चेतावनी दी कि यदि सरकार जल्द कोई सकारात्मक पहल नहीं करती है, तो आंदोलन और तेज किया जाएगा। उनका कहना है कि मांगें मानते ही सभी सफाईकर्मी तत्काल काम पर लौट जाएंगे, लेकिन अनदेखी जारी रही तो शहर की सफाई व्यवस्था पूरी तरह प्रभावित होगी, जिसकी जिम्मेदारी सरकार और प्रशासन की होगी।