मखाना खेती को आधुनिक व्यावसायिक मॉडल के रूप में विकसित करना सरकार का लक्ष्य
मखाना विकास योजना को नए स्तर पर लागू कर रही सरकार, 21 जिलों के किसानों को मिलेगा लाभ
उन्नत बीज, आधुनिक तकनीक एवं प्रसंस्करण पर जोर, मखाना को वैश्विक ब्रांड बनाने की तैयारी
बीपी डेस्क। बिहार के मखाने को वैश्विक पहचान दिलाने और किसानों की आय बढ़ाने के लिए राज्य सरकार उत्पादन से लेकर प्रसंस्करण, मूल्यवर्धन एवं विपणन तक पूरी व्यवस्था को आधुनिक बनाने की दिशा में कार्य कर रही है। मिथिला मखाना को वैश्विक ब्रांड के रूप में स्थापित करने के उद्देश्य से कृषि विभाग के उद्यान निदेशालय द्वारा मखाना की वैज्ञानिक खेती, उन्नत बीज, आधुनिक प्रसंस्करण एवं मूल्यवर्धन को बढ़ावा देने के लिए कई महत्वपूर्ण कदम उठाए जा रहे हैं। इसी उद्देश्य से राज्य सरकार द्वारा ‘मखाना विकास योजना’ को नए स्तर पर लागू किया जा रहा है।
कृषि मंत्री श्री विजय कुमार सिन्हा ने कहा कि मखाना बिहार का गौरव और हमारी सांस्कृतिक पहचान है। राज्य सरकार का लक्ष्य मखाना की खेती को पारंपरिक मॉडल से आगे बढ़ाकर आधुनिक एवं व्यावसायिक मॉडल के रूप में स्थापित करना है। किसानों को बेहतर बीज, आधुनिक तकनीक और वैश्विक बाजार तक पहुंच उपलब्ध कराई जा रही है, ताकि बिहार का मखाना दुनिया के हर कोने तक पहुंचे और किसानों को उनकी मेहनत का उचित मूल्य मिल सके।
उन्होंने बताया कि वैश्विक बाजार में सुपरफूड के रूप में अपनी पहचान बना चुके मखाने के कुल उत्पादन में बिहार की हिस्सेदारी 85 प्रतिशत से अधिक है। ‘मखाना विकास योजना’ के तहत राज्य के 21 मखाना उत्पादक जिलों में वैज्ञानिक पद्धति से मखाना उत्पादन एवं आधुनिक प्रसंस्करण को बढ़ावा देने के लिए विशेष अनुदान दिया जा रहा है।
इन जिलों में दरभंगा, मधुबनी, कटिहार, पूर्णिया, सहरसा, सुपौल, किशनगंज, सीतामढ़ी, मधेपुरा, अररिया, खगड़िया, समस्तीपुर, भागलपुर, सारण, सीवान, गोपालगंज, पूर्वी चंपारण, पश्चिमी चंपारण, मुजफ्फरपुर, वैशाली एवं पटना शामिल हैं।
लागत का 75 प्रतिशत तक प्रत्यक्ष अनुदान
माननीय कृषि मंत्री ने बताया कि मखाना के नए क्षेत्रों में विस्तार एवं आधुनिक तकनीकों को अपनाने के लिए राज्य सरकार द्वारा लागत का 75 प्रतिशत तक प्रत्यक्ष अनुदान दिया जा रहा है। अनुदान की राशि प्रत्यक्ष लाभ अंतरण (डीबीटी) के माध्यम से किसानों के बैंक खातों में उपलब्ध कराई जा रही है।
उन्होंने बताया कि क्षेत्र विस्तार एवं उन्नत बीज वितरण के तहत पारंपरिक तालाब प्रणाली के साथ-साथ खेत प्रणाली में भी मखाना उत्पादन को प्रोत्साहित किया जा रहा है। किसानों को उच्च उपज देने वाली उन्नत प्रजातियों ‘सबौर मखाना-1’ एवं ‘स्वर्ण वैदेही’ के गुणवत्तापूर्ण बीज उपलब्ध कराए जा रहे हैं।
पारंपरिक प्रसंस्करण को आधुनिक तकनीक से जोड़ने पर जोर
मखाना निकालने एवं फोड़ने की पारंपरिक प्रक्रिया को आसान बनाने तथा श्रम एवं समय की कठिनाइयों को कम करने के उद्देश्य से पारंपरिक एवं आधुनिक किट की खरीद पर भी 75 प्रतिशत तक अनुदान दिया जा रहा है। इससे मखाना प्रसंस्करण की प्रक्रिया को अधिक सुविधाजनक एवं प्रभावी बनाने में सहायता मिलेगी तथा प्रसंस्करण में लगने वाले श्रम एवं समय को कम किया जा सकेगा।
कच्चे मखाने से आगे बढ़कर मूल्यवर्धित उत्पादों पर जोर
माननीय कृषि मंत्री ने बताया कि मिथिला मखाना को जीआई टैग मिलने के बाद बिहार के मखाने की राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान और मजबूत हुई है। अमेरिका, यूरोप, खाड़ी देशों एवं पूर्वी एशिया के बाजारों में मखाने की बढ़ती संभावनाओं को देखते हुए राज्य सरकार का प्रयास है कि किसानों को केवल कच्चे मखाने (गुड़ी) के उत्पादन तक सीमित न रखते हुए उन्हें मूल्यवर्धन एवं प्रसंस्करण से जोड़ा जाए।
इसके तहत मखाना पाउडर एवं खाने के लिए तैयार विभिन्न मूल्यवर्धित उत्पाद तैयार करने को प्रोत्साहित किया जा रहा है। इससे मखाने के लिए नए बाजार विकसित होने के साथ किसानों को बेहतर मूल्य प्राप्त करने के अवसर भी मिलेंगे।
खाद्य प्रसंस्करण इकाइयों के लिए भी विशेष सहायता
कृषि मंत्री ने बताया कि कृषि आधारित सूक्ष्म खाद्य प्रसंस्करण उद्योगों एवं किसान उत्पादक संगठनों (एफपीओ) को बढ़ावा देने के लिए प्रधानमंत्री सूक्ष्म खाद्य उद्यम उन्नयन योजना (पीएमएफएमई) एवं राष्ट्रीय मखाना बोर्ड के सहयोग से मखाना प्रसंस्करण इकाई, ग्रेडिंग एवं छंटाई मशीन तथा पैकेजिंग इकाई स्थापित करने के लिए विशेष वित्तीय सहायता उपलब्ध कराई जा रही है।
उन्होंने कहा कि इससे मखाना उत्पादन के साथ-साथ प्रसंस्करण, ग्रेडिंग, पैकेजिंग, मूल्यवर्धन एवं विपणन की पूरी श्रृंखला को मजबूत करने में मदद मिलेगी। साथ ही, किसानों एवं एफपीओ को बाजार से बेहतर तरीके से जोड़ने तथा मखाना आधारित उद्यमिता को बढ़ावा देने का मार्ग प्रशस्त होगा।
किसान, एफपीओ एवं महिला स्वयं सहायता समूह कर सकते हैं ऑनलाइन आवेदन
कृषि मंत्री ने बताया कि ‘मखाना विकास योजना’ एवं अन्य संबंधित अनुदान योजनाओं का लाभ लेने के इच्छुक किसान, किसान उत्पादक संगठन (एफपीओ) एवं महिला स्वयं सहायता समूह उद्यान निदेशालय की वेबसाइट horticulture.bihar.gov.in तथा बिहार कृषि ऐप के माध्यम से ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं। अधिक जानकारी के लिए किसान अपने संबंधित प्रखंड उद्यान पदाधिकारी से संपर्क कर सकते हैं।
उन्होंने किसानों से अपील की कि वे मखाना विकास से संबंधित योजनाओं का अधिकाधिक लाभ उठाएं तथा वैज्ञानिक पद्धति एवं आधुनिक तकनीक को अपनाकर मखाना उत्पादन को अधिक लाभकारी बनाएं। राज्य सरकार का स्पष्ट लक्ष्य है कि बिहार के मखाने को स्थानीय पहचान से आगे बढ़ाकर राष्ट्रीय एवं वैश्विक बाजार में स्थापित किया जाए तथा मखाना उत्पादक किसानों को उनकी उपज का अधिकतम मूल्य प्राप्त हो।
