बक्सर, विक्रांत। जिला शिक्षा एवं प्रशिक्षण संस्थान (डायट), डुमरांव के प्रांगण में शनिवार को बक्सर जिले में प्रोजेक्ट बेस्ड लर्निंग एवं माइक्रो इम्प्रूवमेंट प्रोजेक्ट (MIP) को विद्यालय स्तर पर प्रभावी ढंग से लागू करने, तकनीकी अनुसमर्थन प्रदान करने तथा सुदृढ़ रिपोर्टिंग व्यवस्था सुनिश्चित करने के उद्देश्य से एक दिवसीय बैठक सह कार्यशाला का आयोजन किया गया।

इस बैठक में जिले के सभी 11 प्रखंडों के प्रखंड शिक्षा पदाधिकारी, प्रत्येक प्रखंड से चार–चार प्रखंड स्तरीय तकनीकी टीम के सदस्य, तथा जिला तकनीकी टीम के सदस्य उपस्थित रहे।कार्यशाला का शुभारंभ डायट के प्राचार्य विवेक मौर्य द्वारा मार्गदर्शक संबोधन से हुआ।
अपने संबोधन में उन्होंने पीबीएल व एमआईपी को शिक्षण–अधिगम प्रक्रिया को व्यवहारिक, रुचिकर एवं परिणामोन्मुख बनाने का सशक्त माध्यम बताते हुए विद्यालय स्तर पर इसके गंभीर एवं नियमित क्रियान्वयन पर बल दिया।
इस अवसर पर वरीय व्याख्याता नवनीत सिंह ने भी MIP के गुणवत्तापूर्ण निष्पादन, साक्ष्य संकलन एवं रिपोर्टिंग में आने वाली कमियों की ओर संकेत करते हुए सुधारात्मक सुझाव प्रदान किए। डुमरांव के प्रखंड शिक्षा पदाधिकारी सुधांशु कुमार ने भी पीबीएल और एमआईपी पर प्रकाश डाला।
इस मौके पर पीबीएल व एमआईपी की आवश्यकता, लक्ष्य समूह निर्धारण, जवाबदेही तय करने, परियोजना विकास, दीक्षा प्लेटफॉर्म पर अपलोड, विद्यालयों में क्रियान्वयन, सतत मॉनिटरिंग तथा रिपोर्टिंग की चरणबद्ध प्रक्रिया पर एडीपीसी रवि भूषण सहनी ने विस्तार से चर्चा की ।
प्रतिभागियों को यह स्पष्ट किया गया कि रिपोर्टिंग केवल औपचारिकता नहीं, बल्कि तकनीकी समस्याओं की पहचान एवं समाधान का आधार है। इसी क्रम में जिला तकनीकी टीम के सदस्यों ने MIP के क्रियान्वयन के दौरान सामने आने वाली तकनीकी समस्याओं—जैसे प्रोफाइल एवं विद्यालय मैपिंग, साक्ष्य अपलोड एवं सिंकिंग, प्रमाण-पत्र निर्गत होने में विलंब आदि—के व्यावहारिक निराकरण उपाय भी विस्तार से बताए।
साथ ही प्रखंड स्तरीय तकनीकी टीमों को निर्देशित किया गया कि वे अपने-अपने प्रखंडों में विद्यालयों की नियमित समीक्षा करें, तकनीकी बाधाओं का समयबद्ध समाधान सुनिश्चित करें तथा जहाँ लापरवाही के कारण एमआईपी लंबित है, वहाँ जवाबदेही तय करते हुए सुधारात्मक कदम उठाएँ।
बैठक में सीआरसी, प्रखंड एवं जिला स्तर पर रिपोर्टिंग की एकरूप प्रणाली एवं समय-सीमा तय करने पर सहमति बनी, ताकि जिले की वास्तविक प्रगति राज्य स्तर पर सही रूप में परिलक्षित हो सके। अंत में यह रेखांकित किया गया कि PBL–MIP का मूल उद्देश्य कक्षा की अंतिम पंक्ति में बैठे अंतिम बच्चे तक गुणवत्तापूर्ण, सहभागी और करके सीखने वाली शिक्षा पहुँचाना है।
कार्यशाला के समापन पर सभी प्रतिभागियों ने आपसी समन्वय के साथ PBL–MIP के प्रभावी क्रियान्वयन, तकनीकी सहयोग के सुदृढ़ीकरण एवं जिले की शैक्षिक गुणवत्ता में निरंतर सुधार के लिए अपनी प्रतिबद्धता दोहराई।
