राजन दत्त। बिहार की सियासत में राज्यसभा चुनाव के बाद हलचल थमने का नाम नहीं ले रही है. कांग्रेस के विधायक मनोज विश्वास ने महागठबंधन के उम्मीदवार को वोट नहीं देने के फैसले पर खुलकर अपनी बात रखी है. पार्टी की ओर से नोटिस मिलने के बाद उन्होंने साफ कहा है कि यह कदम सम्मान की अनदेखी के कारण उठाया गया.
महागठबंधन के प्रत्याशी को वोट न देने के बाद कांग्रेस के रडार पर आए विधायक मनोज विश्वास ने साफ कर दिया है कि वे अपने फैसले पर अडिग हैं. उन्होंने पहली बार चुप्पी तोड़ते हुए कहा कि यह मामला केवल किसी एक उम्मीदवार का नहीं, बल्कि बिहार प्रदेश कांग्रेस के अस्तित्व और सम्मान का है.
विश्वास के अनुसार, राज्यसभा उम्मीदवार तय करने से पहले न तो स्थानीय विधायकों की राय ली गई और न ही प्रदेश के वरिष्ठ नेताओं को भरोसे में लिया गया. उन्होंने सीधा आरोप लगाया कि जब हमारे प्रदेश नेतृत्व का ही सम्मान नहीं हुआ, तो हम इस फैसले के साथ कैसे खड़े हो सकते थे? पार्टी द्वारा जारी अनुशासन के नोटिस पर प्रतिक्रिया देते हुए मनोज विश्वास ने कहा कि वे नोटिस का जवाब देने के लिए पूरी तरह तैयार हैं.

उन्होंने स्पष्ट किया कि वे अपने जवाब में उन्हीं बातों को दोहराएंगे जो उन्होंने सार्वजनिक रूप से कही हैं. यानी प्रदेश अध्यक्ष और स्थानीय इकाई की अनदेखी.हालांकि, उन्होंने यह भी जोड़ा कि वे आज भी खुद को कांग्रेसी मानते हैं और पार्टी के साथ रहेंगे. अगर प्रदेश स्तर पर उनकी बात नहीं सुनी गई, तो वे तीनों बागी विधायक दिल्ली जाकर राहुल गांधी और राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे से मिलकर अपनी पूरी बात रखेंगे.
मनोज विश्वास ने सवाल उठाया कि आखिर क्यों उम्मीदवार तय करते समय प्रदेश अध्यक्ष को दरकिनार किया गया? यही कारण है कि 16 मार्च को हुए मतदान के दौरान उन्होंने विरोध का रास्ता चुना. मनोज विश्वास का कहना है कि वे अपनी बात पर कायम हैं और पार्टी जो भी कार्रवाई करना चाहे, वे उसका सामना करने को तैयार हैं, लेकिन वे ‘जी-हुजूरी’ की राजनीति नहीं करेंगे.
मनोज विश्वास, सुरेंद्र प्रसाद और मनोहर प्रसाद सिंह का यह साझा रुख पार्टी के लिए गले की हड्डी बन गया है. अब देखना यह होगा कि 48 घंटे के भीतर मिलने वाले जवाब के बाद कांग्रेस आलाकमान इन विधायकों पर गाज गिराता है या फिर ‘सम्मान’ की इस लड़ाई में कोई बीच का रास्ता निकाला जाता है.
