शिक्षा, पर्यटन और संस्कृति को लेकर बड़े प्लान पर मंथन, गया-राजगीर-नालंदा पर्यटन कॉरिडोर पर भी हुई चर्चा
बिहारशरीफ, अविनाश पांडेय : देश के अलग-अलग राज्यों के करीब 19 सांसदों वाली परिवहन, पर्यटन एवं संस्कृति संबंधी संयुक्त संसदीय स्थायी समिति की टीम मंगलवार को टूर स्टडी के तहत नालंदा पहुंची। समिति के अध्यक्ष एवं सांसद संजय झा के नेतृत्व में पहुंची टीम ने नालंदा विश्वविद्यालय का दौरा किया और आधुनिक परिसर के साथ यहां शिक्षा, शोध, पर्यावरण संरक्षण तथा भविष्य की विकास योजनाओं का जायजा लिया।
नालंदा विश्वविद्यालय पहुंचने पर समिति के सदस्यों का विश्वविद्यालय परिवार की ओर से भव्य स्वागत किया गया। इसके बाद सांसदों ने विश्वविद्यालय परिसर का भ्रमण किया। इस दौरान उन्हें विश्वविद्यालय के बुनियादी ढांचे, पर्यावरण अनुकूल व्यवस्था, आधुनिक सुविधाओं, शैक्षणिक गतिविधियों और भविष्य की योजनाओं के बारे में विस्तार से जानकारी दी गई।
सरकार को सुझाव देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं संसदीय समितियां
संयुक्त संसदीय स्थायी समिति संसद की महत्वपूर्ण समितियों में शामिल है, जिसमें लोकसभा और राज्यसभा दोनों के सांसद सदस्य होते हैं। समितियां संबंधित मंत्रालयों और उनके कामकाज की समीक्षा करती हैं तथा योजनाओं और नीतियों को बेहतर बनाने के लिए विशेषज्ञों, अधिकारियों एवं संबंधित संस्थानों से जानकारी लेकर सरकार को सुझाव देती हैं।
नालंदा का यह दौरा भी इसी अध्ययन प्रक्रिया का हिस्सा रहा। समिति के अध्ययन और सुझावों से नालंदा में शिक्षा, पर्यटन और सांस्कृतिक विकास से जुड़ी योजनाओं को और बेहतर तरीके से आगे बढ़ाने में मदद मिलने की उम्मीद है।
संशोधन विधेयक और स्थानीय छात्रों को अवसर देने पर चर्चा
विश्वविद्यालय के कुलपति सचिन चतुर्वेदी ने बताया कि सांसदों के साथ आगामी नालंदा विश्वविद्यालय संशोधन विधेयक को लेकर भी गंभीर चर्चा हुई। विश्वविद्यालय की भविष्य की योजनाओं में विदेशी विद्यार्थियों के साथ बिहार के स्थानीय विद्यार्थियों की संख्या बढ़ाने को प्रमुख विषय के रूप में रखा गया है।
उन्होंने बताया कि नालंदा को बौद्ध पर्यटन परिपथ से और मजबूती से जोड़ने तथा विश्व स्तर पर नालंदा की पहचान को और प्रभावी बनाने पर भी समिति के सदस्यों के साथ विचार-विमर्श किया गया।
इसके अलावा बिहार सरकार और नालंदा विश्वविद्यालय के बीच प्रशासनिक एवं विकासात्मक समन्वय को मजबूत करने पर भी चर्चा हुई। इससे विश्वविद्यालय और उसके आसपास के क्षेत्रों में होने वाले विकास कार्यों को बेहतर ढंग से आगे बढ़ाने में मदद मिलने की उम्मीद है।
गया-राजगीर-नालंदा पर्यटन कॉरिडोर पर मंथन
समिति के अध्यक्ष संजय झा ने बताया कि बजट में प्रस्तावित विष्णुपद मंदिर, गया, राजगीर और नालंदा को जोड़कर पर्यटन गलियारा विकसित करने की दिशा में भी विस्तृत चर्चा हुई। इस योजना का उद्देश्य गया आने वाले पर्यटकों को राजगीर और नालंदा तक लाना तथा पूरे क्षेत्र में पर्यटन गतिविधियों को बढ़ावा देना है।
उन्होंने कहा कि गया, राजगीर और नालंदा को एक मजबूत पर्यटन नेटवर्क से जोड़ने से क्षेत्र में पर्यटकों की संख्या बढ़ सकती है और स्थानीय स्तर पर रोजगार एवं आर्थिक गतिविधियों को भी गति मिल सकती है।
सांसदों ने देखी पुनर्जीवित नालंदा की विरासत
सांसद राजीव प्रताप रूड़ी ने कहा कि कश्मीर, महाराष्ट्र, कर्नाटक और बंगाल समेत देश के विभिन्न हिस्सों से आए सांसदों ने नालंदा की पुनर्जीवित विरासत को करीब से देखा। उन्होंने कहा कि आधुनिक नालंदा पर्यावरण संरक्षण के साथ-साथ अंतरराष्ट्रीय स्तर पर शिक्षा और शोध का महत्वपूर्ण केंद्र बन रहा है।
वहीं सांसद मनोज तिवारी ने कहा कि नालंदा केवल बिहार की पहचान नहीं, बल्कि भारत की ज्ञान परंपरा का प्रतीक है। आधुनिक नालंदा को दुनिया के विद्यार्थियों और शोधार्थियों से जोड़ने के साथ स्थानीय युवाओं को भी इससे अधिक अवसर मिलना चाहिए।
उन्होंने कहा कि शिक्षा, पर्यटन और संस्कृति को एक साथ लेकर चलने से नालंदा के साथ-साथ पूरे क्षेत्र को आर्थिक और रोजगार के स्तर पर लाभ मिल सकता है।
पर्यावरण अनुकूल परिसर की हुई सराहना
दौरे के दौरान समिति के सदस्यों ने नालंदा विश्वविद्यालय के पर्यावरण अनुकूल परिसर और आधुनिक सुविधाओं की सराहना की। सांसदों ने कहा कि प्राचीन नालंदा की ज्ञान परंपरा को आधुनिक शिक्षा, शोध और वैश्विक अकादमिक गतिविधियों के माध्यम से आगे बढ़ाना देश के लिए गौरव की बात है। सांसदों के इस दौरे को नालंदा की शिक्षा, पर्यटन और सांस्कृतिक विरासत को राष्ट्रीय स्तर पर नई दिशा देने की दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। आने वाले समय में समिति की सिफारिशों और सरकार की योजनाओं के जरिए नालंदा को वैश्विक शिक्षा एवं पर्यटन के बड़े केंद्र के रूप में और विकसित किए जाने की उम्मीद है।
