मुख्यमंत्री ने बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों का हवाई सर्वेक्षण कर स्थिति का लिया जायजा, राहत एवं बचाव कार्यों की समीक्षा की, अधिकारियों को दिये निर्देश

पटना
  1. सभी बाढ़ प्रभावित जिले के जिलाधिकारी एवं पुलिस अधीक्षक जिले में बने रहें। प्रभावित लोगों की सूची तैयार कर तत्काल राहत पहुंचायें।
  2. बाढ़ राहत शिविर एवं सामुदायिक रसोई केन्द्र के माध्यम से लोगों को भोजन एवं राहत उपलब्ध कराते रहें, इसमें किसी प्रकार की कोताही नहीं हो। प्रभावित लोगों को राहत सामग्री भी ससमय उपलब्ध करायें।
  3. संवेदनशील एवं निचले क्षेत्रों की लगातार निगरानी हो, राहत एवं बचाव कार्यों में किसी प्रकार की शिथिलता न बरतें। प्रभावित लोगों तक आवश्यक सुविधाएं ससमय पहुंचे।
  4. जल संसाधन विभाग बक्सर से भागलपुर तक तटबंधों की सतत् निगरानी कराना सुनिश्चित करे।

बीपी डेस्क। मुख्यमंत्री श्री सम्राट चौधरी ने आज बिहार में बाढ़ की वर्तमान स्थिति का हवाई सर्वेक्षण किया। हवाई सर्वेक्षण के दौरान मुख्यमंत्री ने गंगा नदी एवं इसकी सहायक नदियों के जलस्तर, दियारा एवं निचले इलाकों में उत्पन्न स्थिति तथा प्रभावित क्षेत्रों में राहत एवं बचाव कार्यों की स्थिति का जायजा लिया। हवाई सर्वेक्षण के बाद मुख्यमंत्री ने लोक सेवक आवास स्थित ‘संकल्प’ सभागार में अधिकारियों के साथ उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक कर बाढ़ की स्थिति, जलस्तर, तटबंधों की स्थिति, राहत एवं बचाव कार्यों तथा प्रभावित क्षेत्रों में किये जा रहे कार्यों की जानकारी ली।

मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को अविलंब मरम्मती कार्य कराने तथा संवेदनशील क्षेत्रों की लगातार निगरानी का निर्देश दिया। मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को पूरी तत्परता के साथ राहत एवं बचाव कार्य संचालित करने तथा प्रभावित लोगों तक आवश्यक सहायता शीघ्र पहुंचाने के निर्देश दिए।

बैठक में बिहार मौसम सेवा केन्द्र के अधिकारी ने बताया कि वर्तमान मौसम पूर्वानुमान के अनुसार आनेवाले सप्ताह में भारी बारिश की कोई संभावना नहीं है। जल संसाधन विभाग के सचिव डॉ० चन्द्रशेखर सिंह ने बताया कि सोन नदी के जलस्तर में आने वाले दिनों में कमी आने की संभावना है। गंगा नदी के जलस्तर में भी आगामी दिनों में कमी का रुझान रहने का अनुमान है।

प्रयागराज में गंगा के जलस्तर में कमी का रुझान शुरू हो चुका है, जिसका प्रभाव आगे बिहार में भी देखने को मिलेगा। आपदा प्रबंधन विभाग के प्रधान सचिव श्री संतोष कुमार मल्ल ने बतया कि बाढ़ राहत एवं बचाव कार्य प्रभावित क्षेत्रों में पूरी सजगता एवं तत्परता के साथ चलाया जा रहा है। प्रभावित क्षेत्रों में बाढ़ राहत शिविर एवं सामुदायिक रसोई केन्द्र के माध्यम से लोगों को भोजन कराया जा रहा है। एस०ओ०पी० के अनुसार कार्यों को बेहतर ढंग से संचालित किया जा रहा है।

सभी जिलाधिकारी पूरी तरह अलर्ट हैं। बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में 27 एस०डी०आर०एफ० और 9 एन०डी०आर०एफ० टीमें तैनात की गयी हैं। आवश्यकता के अनुसार एस०डी०आर०एफ० और एन०डी०आर०एफ० टीमों के माध्यम से लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने और राहत कार्यों को प्रभावी ढंग से संचालित करने पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है।

समीक्षा के दौरान मुख्यमंत्री ने कहा बाढ़ प्रभावित लोगों की पहचान कर उनकी सूची तैयार करें एवं उन्हें तत्काल आवश्यक राहत उपलब्ध कराई जाए। किसी भी प्रभावित परिवार को सहायता के लिए अनावश्यक इंतजार न करना पड़े, यह सुनिश्चित किया जाए। प्रशासन की ऐसी व्यवस्था और सकारात्मक सहयोग रहे कि लोगों में किसी प्रकार का भय और अफरा-तफरी का माहौल न बने। प्रशासन को पूरी संवेदनशीलता के साथ लोगों के बीच रहकर राहत एवं बचाव कार्यों को प्राथमिकता देनी है। प्रभावित क्षेत्रों में जिला प्रशासन, एस०डी०आर०एफ० और एन०डी०आर०एफ० के साथ बेहतर समन्वय बनाकर आवश्यकता के अनुरूप त्वरित कार्रवाई करे।

मुख्यमंत्री ने कहा कि बक्सर से लेकर भागलपुर तक गंगा नदी के तटबंधों की सतत निगरानी करते रहें। तटबंधों में किसी भी प्रकार के बड़े कटाव या टूट की स्थिति उत्पन्न न हो, इसके लिए जल संसाधन विभाग एवं जिला प्रशासन पूरी तरह सतर्क रहे तथा संवेदनशील स्थलों पर लगातार निगरानी एवं आवश्यक कार्रवाई सुनिश्चित करें। उन्होंने कहा कि प्रभावित क्षेत्रों में बाढ़ राहत शिविर एवं सामुदायिक रसोई केन्द्र के माध्यम से लोगों को भोजन एवं राहत उपलब्ध कराते रहें, इसमें किसी प्रकार की कोताही नहीं होनी चाहिये। प्रभावित लोगों को ससमय राहत सामग्री उपलब्ध करायें।

मुख्यमंत्री ने बाढ़ की स्थिति की लगातार मॉनिटरिंग के लिए कमांड सेंटर को सीधे CM डैशबोर्ड से लिंक करने का निर्देश दिया, ताकि प्रभावित क्षेत्रों की स्थिति, राहत-बचाव कार्यों और प्रशासनिक कार्रवाई की नियमित एवं प्रभावी निगरानी मुख्यमंत्री कार्यालय के स्तर से भी की जा सके। उन्होंने कहा कि बाढ़ की स्थिति में जीवन की सुरक्षा, त्वरित राहत और प्रभावी बचाव कार्य सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है।

सभी संबंधित विभाग आपसी समन्वय के साथ पूरी मुस्तैदी से कार्य करें और स्थिति पर लगातार नजर बनाए रखें। किसी भी आपात स्थिति में लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने के लिए सभी आवश्यक तैयारियां पूरी रखी जाएं तथा राहत एवं बचाव कार्यों में किसी प्रकार की कमी नहीं होनी चाहिए। बाढ़ की स्थिति में प्रभावितों को एस०ओ०पी० के अनुसार पूरी सहायता उपलब्ध कराते रहें।

बैठक में उप मुख्यमंत्री सह जल संसाधन मंत्री श्री विजय कुमार चौधरी, आपदा प्रबंधन मंत्री श्री रत्नेश सदा, मुख्यमंत्री के प्रधान सचिव श्री दीपक कुमार, मुख्य सचिव श्री प्रत्यय अमृत, पुलिस महानिदेशक श्री विनय कुमार, आपदा प्रबंधन विभाग के प्रधान सचिव श्री संतोष कुमार मल्ल, कृषि विभाग के प्रधान सचिव श्री नर्मदेश्वर लाल, पथ निर्माण विभाग के सचिव श्री पंकज कुमार पाल, मुख्यमंत्री के सचिव श्री लोकेश कुमार सिंह, ग्रामीण कार्य विभाग के सचिव श्री अभय कुमार सिंह, मुख्यमंत्री के सचिव श्री संजय कुमार सिंह, जल संसाधन विभाग के सचिव डॉ० चन्द्रशेखर सिंह सहित अन्य वरीय अधकारी मौजूद थे।

बैठक में 13 जिले-जहानाबाद, अरवल, भोजपुर, नालंदा, रोहतास, औरंगाबाद, मुंगेर, भागलपुर, बेगूसराय, खगड़िया, लखीसराय, कटिहार एवं वैशाली के जिलाधिकारी वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से जुड़े हुये थे, जबकि पटना के जिलाधिकारी श्री कुंदन कुमार एवं वरीय पुलिस अधीक्षक श्री कार्तिकेय के० शर्मा बैठक में शामिल थे।