बीपी डेस्क। बिहार विधानमंडल के मानसून सत्र के अंतिम दिन शुक्रवार को विधानसभा की कार्यवाही शुरू होते ही सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच जोरदार हंगामा शुरू हो गया। जहानाबाद में छात्रों के प्रदर्शन के दौरान हुई फायरिंग के मुद्दे पर दोनों पक्ष आमने-सामने आ गए। बढ़ते शोर-शराबे और नारेबाजी के बीच अध्यक्ष को महज पांच मिनट के भीतर सदन की कार्यवाही 12 बजे तक के लिए स्थगित करनी पड़ी।
राष्ट्रीय जनता दल (राजद) के विधायक आलोक मेहता ने सदन में जहानाबाद की घटना का मुद्दा उठाते हुए आरोप लगाया कि प्रदर्शन कर रहे छात्रों पर गोली चलाई गई है। उन्होंने कहा कि यह गंभीर मामला है और सरकार को जवाब देना चाहिए। आलोक मेहता के बयान पर भाजपा के विधायक तत्काल विरोध में खड़े हो गए। सत्ता पक्ष के सदस्यों ने कहा कि जानलेवा हमला करने वाले लोगों को छात्र नहीं कहा जा सकता।
उन्होंने घटना की निंदा करते हुए सदन से निंदा प्रस्ताव पारित करने की मांग की। इस दौरान दोनों पक्षों के बीच तीखी नोकझोंक शुरू हो गई।आलोक मेहता ने भाजपा विधायकों की ओर इशारा करते हुए कहा, “आप शांत रहिए, आप छात्र विरोधी हैं।” उन्होंने फिर दोहराया कि सदन को इस घटना पर निंदा प्रस्ताव पारित करना चाहिए।
दोनों पक्षों के बीच आरोप-प्रत्यारोप का दौर तेज हो गया। सत्ता पक्ष और विपक्ष के कई विधायक अपनी-अपनी सीटों से उठकर वेल में पहुंच गए और नारेबाजी करने लगे। हंगामे के कारण सदन की कार्यवाही सुचारु रूप से नहीं चल सकी। स्थिति को देखते हुए अध्यक्ष ने कार्यवाही शुरू होने के करीब पांच मिनट बाद ही सदन को दोपहर 12 बजे तक के लिए स्थगित कर दिया।
पिछले दिनों हुए लगातार हंगामे को देखते हुए विधानसभा परिसर की सुरक्षा पहले से ही कड़ी कर दी गई है। केंद्रीय सुरक्षा बलों के जवानों की अतिरिक्त तैनाती की गई है। विधानसभा परिसर के प्रवेश द्वारों से लेकर पूरे परिसर में सुरक्षा व्यवस्था सख्त रखी गई है और आने-जाने वालों की गहन जांच की जा रही है।
