नालंदा: सदर अस्पताल के ब्लड बैंक में खून की दलाली का खुलासा, महिला सुरक्षा गार्ड पर ₹13 हजार लेकर रक्त बेचने का आरोप

नालंदा बिहारशरीफ

मरीज को मुफ्त में मिलना था खून, जांच में सीसीटीवी फुटेज से खुली पोल; एफआईआर की तैयारी

बिहारशरीफ, अविनाश पांडेय : सदर अस्पताल के ब्लड बैंक में खून की कथित खरीद-बिक्री का सनसनीखेज मामला सामने आया है। अस्पताल में तैनात एक महिला सुरक्षा गार्ड पर दलाल के माध्यम से मरीज के परिजनों से ₹13 हजार लेकर दो यूनिट खून उपलब्ध कराने का आरोप लगा है। हैरत की बात यह है कि अस्पताल प्रशासन ने मरीज की गंभीर स्थिति को देखते हुए उक्त रक्त निशुल्क उपलब्ध कराने का आदेश पहले ही दे दिया था। मामले की जांच के बाद सदर अस्पताल प्रशासन ने आरोपी महिला गार्ड के खिलाफ नगर थाना में प्राथमिकी दर्ज कराने के लिए आवेदन दिया है। इस घटना के बाद स्वास्थ्य महकमे में हड़कंप मच गया है।

मरीज की मजबूरी का उठाया फायदा

जानकारी के अनुसार, बिंद थाना क्षेत्र के जमसारी गांव निवासी रौशन कुमार ने अपनी बहन खुशबू कुमारी को प्रसव के लिए दो दिन पहले सदर अस्पताल में भर्ती कराया था। जांच के दौरान महिला का हीमोग्लोबिन काफी कम पाया गया, जिसके बाद डॉक्टरों ने तत्काल दो यूनिट रक्त चढ़ाने की सलाह दी।

अस्पताल प्रशासन ने मरीज की गंभीर स्थिति को देखते हुए ब्लड बैंक से निशुल्क रक्त उपलब्ध कराने की व्यवस्था की थी। इसी बीच अस्पताल में तैनात महिला सुरक्षा गार्ड ने परिजनों से संपर्क कर दलाल के माध्यम से तुरंत रक्त उपलब्ध कराने का झांसा दिया और इसके एवज में ₹13 हजार की राशि वसूल ली।

सीसीटीवी जांच में सामने आई सच्चाई

सदर अस्पताल के उपाधीक्षक डॉ. राजीव रंजन ने बताया कि शिकायत मिलने के बाद पूरे मामले की जांच कराई गई। अस्पताल परिसर में लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज खंगालने पर महिला गार्ड संदिग्ध गतिविधियों में ब्लड बैंक की ओर जाती हुई दिखाई दी। जांच में प्रथमदृष्टया यह स्पष्ट हुआ कि मरीज को मुफ्त में मिलने वाले रक्त के नाम पर परिजनों से अवैध रूप से पैसे वसूले गए।

एफआईआर और सेवा समाप्ति की कार्रवाई

डॉ. राजीव रंजन ने बताया कि मामले को गंभीर अनियमितता मानते हुए आरोपी महिला गार्ड अनीता कुमारी, पत्नी चंद्रमणि कुमार, निवासी प्रह्लादपुर, थाना बाढ़ (पटना) के खिलाफ नगर थाना में प्राथमिकी दर्ज कराने के लिए आवेदन दिया गया है। साथ ही संबंधित आउटसोर्सिंग एजेंसी को पत्र भेजकर उसे तत्काल प्रभाव से कार्यमुक्त करने का निर्देश दिया गया है। अस्पताल प्रशासन का कहना है कि मरीजों और उनके परिजनों के साथ किसी भी प्रकार की दलाली या अवैध वसूली बर्दाश्त नहीं की जाएगी। मामले की आगे की जांच जारी है।