रबी 2026-27 की रणनीति पर 32वीं क्षेत्रीय शोध एवं प्रसार सलाहकार समिति की बैठक में व्यापक मंथन

पटना

भागलपुर/पटना, विक्रांत। बिहार कृषि विश्वविद्यालय, सबौर के कृषि जलवायु क्षेत्र जोन III-बी के अंतर्गत रबी 2026-27 की कृषि अनुसंधान एवं प्रसार रणनीति को लेकर 32वीं क्षेत्रीय शोध एवं प्रसार सलाहकार समिति की बैठक का आयोजन 17 अगस्त 2026 को कृषि अनुसंधान संस्थान, पटना में किया गया। बैठक में रबी मौसम की प्रमुख फसलों, किसानों की स्थानीय आवश्यकताओं, नवीन कृषि तकनीकों, स्टार्टअप एवं उद्यमिता, भौगोलिक संकेतक (GI) उत्पादों तथा शोध को किसानों तक प्रभावी ढंग से पहुंचाने जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर विस्तृत चर्चा हुई।

बैठक का उद्देश्य कृषि जलवायु क्षेत्र जोन III-बी के किसानों की वर्तमान एवं उभरती आवश्यकताओं के अनुरूप अनुसंधान की प्राथमिकताएं निर्धारित करना, तकनीकी हस्तांतरण को मजबूत करना तथा रबी फसलों की उत्पादकता एवं किसानों की आय में वृद्धि के लिए व्यवहारिक रणनीति तैयार करना रहा।

बैठक में राजीव कुमार, संयुक्त निदेशक सस्य-सह-वरीय पदाधिकारी, RKVY, पटना, डॉ. रणधीर कुमार, क्षेत्रीय निदेशक, कृषि अनुसंधान संस्थान, पटना एवं प्राचार्य, नूरसराय उद्यान महाविद्यालय, डॉ. ए.के. सिंह, निदेशक शोध, बिहार कृषि विश्वविद्यालय, सबौर, डॉ. ए.के. चौधरी, प्रधान वैज्ञानिक, ICAR, डॉ. पारस नाथ, सह-अधिष्ठाता एवं प्राचार्य, वीर कुंवर सिंह कृषि महाविद्यालय, डुमरांव, बक्सर, डॉ. प्रमोद कुमार, संयुक्त निदेशक, बिहार सरकार तथा डॉ. सनोज कुमार, प्राचार्य, कृषि महाविद्यालय, आरा सहित संबंधित वैज्ञानिकों एवं अधिकारियों ने भाग लिया।

रबी फसलों पर विशेष जोर

बैठक में रबी मौसम में क्षेत्र की प्रमुख फसलों गेहूं, मक्का, चना, मसूर, मटर, सरसों, राई, जौ एवं अन्य दलहनी-तिलहनी फसलों के उत्पादन को बढ़ाने के लिए क्षेत्र-विशिष्ट अनुसंधान एवं तकनीकी हस्तक्षेप पर चर्चा की गई। गुणवत्तापूर्ण बीज, उन्नत किस्मों का चयन, समय पर बुआई, संतुलित पोषण प्रबंधन, सिंचाई की दक्ष तकनीक, खरपतवार एवं रोग-कीट प्रबंधन तथा जलवायु अनुकूल कृषि पद्धतियों को बढ़ावा देने की आवश्यकता पर बल दिया गया।

वैज्ञानिकों ने कहा कि बदलती जलवायु परिस्थितियों में ऐसी तकनीकों और किस्मों का विकास एवं प्रसार आवश्यक है, जो कम लागत में बेहतर उत्पादन, संसाधनों के कुशल उपयोग तथा मौसमीय जोखिमों से सुरक्षा प्रदान कर सकें।

शोध से खेत तक पहुंचाने पर जोर

बैठक में कृषि विश्वविद्यालय एवं शोध संस्थानों में विकसित तकनीकों को किसानों तक शीघ्र पहुंचाने के लिए अनुसंधान–प्रसार–किसान कड़ी को और मजबूत करने पर विचार किया गया। किसानों की वास्तविक समस्याओं के आधार पर शोध विषयों के चयन तथा शोध परिणामों के प्रभावी प्रदर्शन एवं प्रशिक्षण की आवश्यकता पर भी चर्चा हुई।

कृषि क्षेत्र में स्टार्टअप एवं उद्यमिता को बढ़ावा

बैठक में कृषि आधारित स्टार्टअप, नवाचार और उद्यमिता को भी विशेष महत्व दिया गया। कृषि उत्पादन के साथ-साथ प्रसंस्करण, मूल्य संवर्धन, कृषि मशीनरी, डिजिटल कृषि, जैविक इनपुट, भंडारण, पैकेजिंग एवं विपणन के क्षेत्र में युवाओं को उद्यमिता से जोड़ने पर चर्चा हुई।

बैठक में इस बात पर जोर दिया गया कि विश्वविद्यालय एवं शोध संस्थानों में विकसित तकनीकों को केवल शोध पत्रों तक सीमित न रखकर उन्हें स्टार्टअप और कृषि उद्यमों के माध्यम से बाजार एवं किसानों तक पहुंचाया जाए। इससे युवाओं के लिए रोजगार एवं स्वरोजगार के अवसर पैदा होने के साथ किसानों को बेहतर बाजार और मूल्य प्राप्त करने में भी सहायता मिलेगी।

GI उत्पादों एवं स्थानीय कृषि उत्पादों की ब्रांडिंग

बैठक में बिहार के विशिष्ट कृषि एवं उद्यान उत्पादों को GI (Geographical Indication) पहचान के माध्यम से राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय बाजार तक पहुंचाने पर भी चर्चा हुई। स्थानीय उत्पादों की गुणवत्ता, प्रसंस्करण, पैकेजिंग, ब्रांडिंग और विपणन को मजबूत कर किसानों एवं उत्पादकों की आय बढ़ाने की संभावनाओं पर विचार किया गया।

वैज्ञानिकों ने कहा कि GI उत्पाद केवल किसी क्षेत्र की पहचान नहीं हैं, बल्कि वे स्थानीय किसानों, उत्पादकों और उद्यमियों के लिए आर्थिक अवसर भी उपलब्ध कराते हैं। विश्वविद्यालय द्वारा कृषि एवं उद्यान उत्पादों के मूल्य संवर्धन, तकनीकी सुधार और बाजार से जोड़ने की दिशा में किए जा रहे प्रयासों को और गति देने की आवश्यकता बताई गई।

जलवायु अनुकूल एवं टिकाऊ कृषि पर बल

बैठक में जलवायु परिवर्तन की चुनौतियों को ध्यान में रखते हुए क्लाइमेट-स्मार्ट एग्रीकल्चर, जल संरक्षण, मृदा स्वास्थ्य, प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण तथा कम लागत वाली कृषि तकनीकों को बढ़ावा देने पर विशेष जोर दिया गया। रबी फसलों के लिए स्थानीय परिस्थितियों के अनुरूप तकनीकी सलाह विकसित करने तथा किसानों तक समय पर पहुंचाने की आवश्यकता पर बल दिया गया।

किसानों की समस्याओं को शोध का आधार बनाने की आवश्यकता

बैठक में यह भी तय किया गया कि किसानों से प्राप्त समस्याओं और फीडबैक को शोध कार्यक्रमों में प्राथमिकता दी जानी चाहिए। क्षेत्रीय स्तर पर किसानों की समस्याओं की पहचान कर उनके समाधान के लिए स्थान-विशिष्ट एवं समस्या-आधारित अनुसंधान को बढ़ावा देने पर जोर दिया गया।

बैठक के दौरान रबी 2026-27 के लिए विभिन्न फसलों एवं कृषि गतिविधियों से संबंधित अनुसंधान प्राथमिकताओं, तकनीकी प्रसार तथा आगामी कार्यक्रमों पर विशेषज्ञों द्वारा सुझाव प्रस्तुत किए गए। प्राप्त सुझावों के आधार पर कृषि अनुसंधान एवं प्रसार गतिविधियों को अधिक किसान-केंद्रित, परिणामोन्मुख और बाजार-उन्मुख बनाने की दिशा में कार्य करने पर सहमति बनी।

बैठक का मुख्य संदेश यही रहा कि रबी फसलों की उत्पादकता बढ़ाने के साथ शोध, नवाचार, स्टार्टअप, GI उत्पाद, मूल्य संवर्धन और बाजार को एकीकृत कर किसानों की आय एवं कृषि क्षेत्र की प्रतिस्पर्धात्मकता को मजबूत किया जाए। बिहार कृषि विश्वविद्यालय, सबौर तथा संबंधित शोध एवं प्रसार संस्थानों द्वारा इस दिशा में समन्वित प्रयास किए जाने की आवश्यकता पर विशेष बल दिया गया।