बिहारशरीफ, अविनाश पांडेय। भागन बीघा स्थित गौतम इंस्टीट्यूट ऑफ नर्सिंग एंड पैरामेडिकल कॉलेज में बुधवार को छात्र-छात्राओं ने कॉलेज प्रशासन के खिलाफ जमकर हंगामा और प्रदर्शन किया। विद्यार्थियों ने रिजल्ट में बड़ी संख्या में छात्रों के फेल होने, शैक्षणिक व्यवस्था में कमी, शिक्षकों की कमी तथा नामांकन के दौरान परीक्षा में पास कराने के नाम पर अतिरिक्त राशि वसूले जाने का आरोप लगाया।
प्रदर्शन के दौरान छात्रों ने संस्थान का मुख्य गेट बंद कर दिया। सूचना मिलने पर भागन बीघा, चेरो, वेना और रहुई थाने की पुलिस दल-बल के साथ मौके पर पहुंची और प्रदर्शन कर रहे विद्यार्थियों को समझाने-बुझाने का प्रयास किया।
5वें सेमेस्टर के रिजल्ट को लेकर नाराजगी
प्रदर्शन कर रहे छात्र ऋषिकेश पटेल ने बताया कि बीएससी नर्सिंग के 5वें सेमेस्टर की परीक्षा जनवरी में आयोजित हुई थी, जिसका परिणाम हाल ही में जारी किया गया है। छात्रों का दावा है कि परीक्षा में शामिल करीब 80 प्रतिशत विद्यार्थियों को फेल कर दिया गया है।
छात्रों के अनुसार कई विद्यार्थियों को महज तीन, चार और नौ अंक देकर फेल कर दिया गया। इससे विद्यार्थियों में काफी आक्रोश है। छात्रों ने रिजल्ट की निष्पक्ष जांच और परीक्षा मूल्यांकन की प्रक्रिया को स्पष्ट करने की मांग की है।
लाखों रुपये फीस लेने का आरोप
विद्यार्थियों ने कॉलेज प्रबंधन पर फीस के नाम पर भारी रकम वसूलने का भी आरोप लगाया। छात्रों का कहना है कि बीएससी नर्सिंग में छात्राओं से करीब 7.5 लाख रुपये और छात्रों से करीब 8.7 लाख रुपये तक की फीस ली जाती है। विद्यार्थियों का दावा है कि इतनी बड़ी राशि खर्च करने के बावजूद उन्हें अपेक्षित शैक्षणिक सुविधाएं नहीं मिल रही हैं।
‘मैनेज’ के नाम पर 80 हजार रुपये अतिरिक्त लेने का आरोप
बी. फार्मा सत्र 2024-2028 के तृतीय सेमेस्टर के छात्र शशि राज ने कॉलेज प्रबंधन पर वित्तीय अनियमितता और अतिरिक्त राशि वसूलने का गंभीर आरोप लगाया।
उन्होंने बताया कि सरकारी योजनाओं या डीआरसीसी के माध्यम से मिलने वाले शिक्षा ऋण की निर्धारित राशि के अलावा परीक्षा केंद्र मैनेज कराने के नाम पर प्रति छात्र 80 हजार रुपये तक की अतिरिक्त नकद राशि ली गई। छात्रों का आरोप है कि इस रकम के बदले उन्हें कोई रसीद नहीं दी गई।
शशि राज ने कहा कि कई छात्र मध्यमवर्गीय और किसान परिवारों से आते हैं। परिवार की मेहनत की कमाई और कर्ज लेकर फीस जमा की जाती है। इसके बावजूद परीक्षा के समय विद्यार्थियों को पर्याप्त शैक्षणिक सहयोग नहीं मिलता और बड़ी संख्या में छात्र फेल हो जाते हैं।
छात्रों का कहना है कि यदि निजी संस्थान में भी उन्हें इस तरह की परेशानियों का सामना करना पड़ेगा तो लाखों रुपये खर्च कर यहां दाखिला लेने का क्या फायदा है।
शिक्षकों की कमी का भी आरोप
प्रदर्शन कर रहे विद्यार्थियों ने कॉलेज में शिक्षकों की कमी का भी आरोप लगाया। छात्रों के मुताबिक कागजों पर संस्थान में 18 प्राध्यापक दर्ज हैं, लेकिन वास्तविकता में नियमित रूप से केवल चार से पांच शिक्षक ही उपलब्ध रहते हैं।
विद्यार्थियों का कहना है कि प्रयोगशाला की कक्षाएं भी नियमित रूप से संचालित नहीं होती हैं। कई बार शिक्षकों को बुलाने के लिए छात्रों को कॉलेज कार्यालय का चक्कर लगाना पड़ता है।
साल में चार-पांच बार प्राचार्य बदलने का दावा
छात्रों ने संस्थान की प्रशासनिक व्यवस्था पर भी सवाल उठाए। उनका आरोप है कि एक साल के भीतर चार से पांच बार प्राचार्य बदले जा चुके हैं। इससे कॉलेज प्रशासन में स्थिरता नहीं है और विद्यार्थियों की समस्याओं का स्थायी समाधान नहीं हो पा रहा है।
छात्रों का कहना है कि जब भी वे अपनी समस्याओं को लेकर प्राचार्य या प्रशासनिक अधिकारियों के पास जाते हैं तो उन्हें आश्वासन देकर वापस भेज दिया जाता है।
परीक्षा शुल्क वापस करने की मांग
विद्यार्थियों ने कॉलेज प्रबंधन को लिखित आवेदन देकर अपनी मांगें रखीं। छात्रों का कहना है कि नामांकन के समय बाहरी परीक्षा केंद्र के नाम पर अलग-अलग राशि ली गई थी। इसके बावजूद परीक्षा परिणाम में 80 से 90 प्रतिशत तक विद्यार्थियों के फेल होने का दावा किया जा रहा है।
छात्रों ने मांग की है कि विश्वविद्यालय के री-एग्जाम फॉर्म का शुल्क कॉलेज प्रबंधन अपने स्तर से वहन करे। इसके अलावा परीक्षा केंद्र मैनेज कराने के नाम पर ली गई अतिरिक्त राशि को भी वापस किया जाए।
शाम तक जारी रहा प्रदर्शन
बुधवार सुबह करीब साढ़े दस बजे शुरू हुआ छात्रों का प्रदर्शन शाम तक जारी रहा। विद्यार्थियों का आरोप है कि कॉलेज की उच्च अधिकारी कार्यालय से बाहर आकर छात्रों से बातचीत करने से बचती रहीं। छात्रों के मुताबिक कुछ चुनिंदा विद्यार्थियों को कार्यालय के अंदर बुलाकर बातचीत के जरिए मामले को शांत कराने का प्रयास किया गया।
प्रदर्शन कर रहे छात्रों ने कहा कि दाखिले के समय संस्थान की ओर से कई तरह के मौखिक आश्वासन दिए गए थे, लेकिन अब उन्हीं बातों को लेकर लिखित प्रमाण मांगा जा रहा है। इससे विद्यार्थियों में नाराजगी और बढ़ गई है।
छात्रों ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि जब तक उनकी मांगों पर ठोस निर्णय नहीं लिया जाता, परीक्षा परिणाम और अतिरिक्त वसूली के मामले का समाधान नहीं होता, तब तक उनका आंदोलन जारी रहेगा।
कॉलेज प्रबंधन की प्रतिक्रिया नहीं मिली
मामले में गौतम इंस्टीट्यूट ऑफ नर्सिंग एंड पैरामेडिकल डिपार्टमेंट ऑफ फार्मेसी के प्राचार्य विनोद कुमार से फोन पर संपर्क कर छात्रों द्वारा लगाए गए आरोपों पर उनका पक्ष जानने का प्रयास किया गया, लेकिन उनकी ओर से कोई प्रतिक्रिया नहीं मिली।
छात्रों द्वारा लगाए गए फीस वसूली, परीक्षा केंद्र मैनेज कराने के नाम पर अतिरिक्त राशि लेने, शिक्षकों की कमी और रिजल्ट में बड़ी संख्या में विद्यार्थियों के फेल होने जैसे आरोपों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हो सकी है। कॉलेज प्रबंधन की ओर से आधिकारिक प्रतिक्रिया मिलने के बाद मामले की स्थिति और स्पष्ट हो सकेगी।
