— जिले में 8208.57 एमटी यूरिया, 1635.25 एमटी डीएपी और 6558.75 एमटी एनपीके उपलब्ध; 492 प्रतिष्ठानों पर छापेमारी
बिहारशरीफ, अविनाश पांडेय : जिले में किसानों को पर्याप्त मात्रा में उर्वरक उपलब्ध कराने और निर्धारित सरकारी दर पर ही बिक्री सुनिश्चित करने को लेकर शुक्रवार को नालंदा समाहरणालय में जिला उर्वरक निगरानी समिति की बैठक आयोजित की गई। बैठक की अध्यक्षता जिला पदाधिकारी ने की। इस दौरान ग्रामीण विकास मंत्री श्रवण कुमार की उपस्थिति रही। बैठक में जिले के सभी जिला स्तरीय पदाधिकारी, प्रखंड कृषि पदाधिकारी, अनुमंडल स्तरीय पदाधिकारी, उर्वरक कंपनियों के प्रतिनिधि तथा जिले के थोक एवं खुदरा उर्वरक विक्रेता उपस्थित रहे।
बैठक के प्रारंभ में जिला कृषि पदाधिकारी ने जिले में वर्तमान में उपलब्ध उर्वरक के भंडार की स्थिति की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि जिले में वर्तमान समय में 8208.57 मीट्रिक टन यूरिया, 1635.25 मीट्रिक टन डीएपी, 468.8 मीट्रिक टन एमओपी, 6558.75 मीट्रिक टन एनपीके और 7348.68 मीट्रिक टन एसएसपी उपलब्ध है। अधिकारियों ने बताया कि खरीफ 2026 के दौरान अब तक जिले के 492 उर्वरक प्रतिष्ठानों पर छापेमारी की गई है। जांच के दौरान अनियमितता पाए जाने पर तीन प्रतिष्ठानों की अनुज्ञप्ति रद्द की गई, 35 प्रतिष्ठानों की अनुज्ञप्ति निलंबित की गई तथा 64 प्रतिष्ठानों से स्पष्टीकरण मांगा गया है।
डीएपी की पर्याप्त उपलब्धता के लिए मांग-पत्र भेजने का निर्देश
बैठक में ग्रामीण विकास मंत्री श्रवण कुमार ने जिले में डीएपी उर्वरक के अपेक्षाकृत कम भंडार पर गंभीरता से संज्ञान लिया। उन्होंने निर्देश दिया कि निदेशालय को लक्ष्य के अनुरूप पर्याप्त मात्रा में डीएपी उपलब्ध कराने के लिए मांग-पत्र भेजा जाए, ताकि किसानों को उर्वरक की खरीद में किसी प्रकार की परेशानी नहीं हो। उन्होंने कहा कि किसानों को उनकी जरूरत के समय उर्वरक उपलब्ध कराना सरकार की प्राथमिकता है। इसके लिए आपूर्ति और वितरण व्यवस्था पर लगातार नजर रखने की आवश्यकता है।
कालाबाजारी और अधिक कीमत पर बिक्री पर सख्ती
उर्वरक की कालाबाजारी एवं निर्धारित दर से अधिक कीमत पर बिक्री की रोकथाम को लेकर मंत्री ने थोक और खुदरा विक्रेताओं को स्पष्ट निर्देश देने की बात कही। उन्होंने कहा कि सभी विक्रेता किसानों को सरकार द्वारा निर्धारित दर पर ही उर्वरक उपलब्ध कराएं। उन्होंने कहा कि यदि विक्रेता प्रारंभिक स्तर पर ही नियमों का पालन करेंगे तो अनावश्यक छापेमारी की स्थिति उत्पन्न नहीं होगी और किसानों को भी आसानी से उर्वरक मिल सकेगा। उन्होंने उर्वरक वितरण व्यवस्था में पारदर्शिता बनाए रखने पर जोर दिया।
जिला पदाधिकारी, नालंदा ने उर्वरक कंपनियों के प्रतिनिधियों और थोक विक्रेताओं को जिले में पर्याप्त भंडार बनाए रखने तथा किसानों को निर्धारित दर पर गुणवत्तापूर्ण उर्वरक उपलब्ध कराने का निर्देश दिया। उन्होंने स्पष्ट किया कि वितरण व्यवस्था में किसी भी स्तर पर अनियमितता अथवा किसानों को परेशानी की शिकायत को गंभीरता से लिया जाएगा।
‘धरती माता बचाओ अभियान’ को जन-जन तक पहुंचाने पर जोर
बैठक के दौरान मंत्री श्रवण कुमार ने ‘धरती माता बचाओ अभियान’ को जन-जन तक पहुंचाने पर भी विशेष जोर दिया। उन्होंने कहा कि मिट्टी की उर्वरा शक्ति और पर्यावरण की सुरक्षा के लिए किसानों को रासायनिक उर्वरकों पर अत्यधिक निर्भरता कम करने के लिए प्रेरित करना जरूरी है। इसके साथ ही जैविक खाद और प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने की आवश्यकता है।
उन्होंने कृषि विभाग और संबंधित अधिकारियों को पंचायत एवं प्रखंड स्तर तक व्यापक प्रचार-प्रसार एवं जागरूकता अभियान चलाने का निर्देश दिया, ताकि किसानों को प्राकृतिक और टिकाऊ कृषि पद्धतियों के लाभ की जानकारी मिल सके।
जिला पदाधिकारी ने कहा कि धरती माता को स्वस्थ रखना सभी की सामूहिक जिम्मेदारी है। स्वस्थ मिट्टी ही स्वस्थ फसल, स्वस्थ पर्यावरण और स्वस्थ समाज का आधार है। किसानों के बीच जैविक खाद के उपयोग, प्राकृतिक खेती और मिट्टी संरक्षण को लेकर लगातार जागरूकता अभियान चलाया जाना चाहिए।
बैठक के अंत में उपस्थित पदाधिकारियों, कृषि विभाग के अधिकारियों और उर्वरक विक्रेताओं ने किसानों को समय पर पर्याप्त मात्रा में तथा निर्धारित दर पर उर्वरक उपलब्ध कराने के साथ-साथ प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने के लिए आवश्यक कार्रवाई सुनिश्चित करने का आश्वासन दिया।
