कोलकाता दुर्गा पूजा पंडाल में भगदड़ की घटना में अब तक 19 की मौत, विपक्ष ने बीजेपी सरकार को घेरा, पूछा कहा थीं पुलिस

पश्चिम बंगाल

सेंट्रल डेस्क। पश्चिम बंगाल में दुर्गा पूजा के पर्व के बीच सप्तमी को कोलकाता के चोरबागान सार्वजनीन दुर्गोत्सव पंडाल में भगदड़ की घटना ने पूरे देश को झकझोर कर रख दिया है। दुर्गा पंडाल में भारी भीड़ के बाद एकदम से जब भगदड़ हुई तो इसमें 19 लोगों की मौत हो गई, जबकि 25 से अधिक लोग घायल हो गए।

सरकार ने घटना की जांच के आदेश दिए हैं, तो वहीं दूसरी ओर बंगाल के दो दिवसीय दौरे पर पहुंचे केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह घायलों से मिलने के बाद सभी कार्यक्रम रद्द करने दिल्ली लौटे हैं। इस सब के बीच चोरबागान दुर्गा पंडाल को लेकर एक बड़ा दावा सामने आया है।

दावा किया जा रहा है कि दो दिन पहले भी भारी भीड़ थी। तब भी भगदड़ हुई थी। इसमें पुलिस की बेरीकेडिंग टूट गई थी। तब पुलिस ने डंडे भी फटकारे थे।

विपक्ष का रुख और पुलिस पर सवाल

विपक्षी दलों ने भीड़ प्रबंधन (crowd management) की भारी विफलता और पुलिस की तैनाती पर गंभीर सवाल उठाए हैं। चश्मदीदों और स्थानीय लोगों का आरोप है कि मुख्य रूप से वीआईपी एंट्रेंस के पास ही पुलिसकर्मी तैनात थे और आम लोगों की भीड़ वाले रास्तों पर सुरक्षा के पर्याप्त इंतजाम नहीं थे।

चोरबागान दुर्गा पूजा पंडाल में अब तक क्या हुआ

शनिवार की शाम करीब 7:40 बजे अचानक तेज बारिश शुरू हो गई। पंडाल के बाहर दर्शन के लिए कतारों में खड़े और सड़क पर मौजूद हजारों लोग बारिश से बचने के लिए एक साथ पंडाल के भीतर और निकास द्वार की तरफ भागे।

जांच में सामने आया है कि भारी भीड़ और बारिश के बीच आयोजकों ने लाउडस्पीकर पर घोषणा कर दी कि ‘पंडाल का ढांचा किसी भी समय गिर सकता है, इसलिए तुरंत बाहर निकलें’। इस घोषणा के कारण लोगों में डर फैल गया और उन्होंने भागना शुरू कर दिया।

भीड़ के अत्यधिक दबाव के कारण पंडाल का एग्जिट गेट (निकास द्वार) का कुछ हिस्सा ढह गया। इसके अलावा, जिस इलाके में यह पंडाल बना था, वहां की सड़कें और आने-जाने के रास्ते बेहद संकरे थे, जिससे लोग एक-दूसरे के ऊपर गिरते चले गए।

स्थानीय लोगों और चश्मदीदों का आरोप है कि वहां पर्याप्त पुलिस बल तैनात नहीं था। पुलिसकर्मियों की तैनाती केवल वीआईपी प्रवेश द्वार के पास थी।

मुआवजा

राज्य सरकार द्वारा मृतकों के परिजनों को 25 लाख रुपये और एक ग्रुप ‘D’ की सरकारी नौकरी, तथा घायलों को 5 लाख रुपये की आर्थिक सहायता की घोषणा की गई है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी मृतकों के परिजनों के लिए 2 लाख रुपये और घायलों के लिए 50,000 रुपये के मुआवजे का ऐलान किया है।

मामले की जांच के लिए कलकत्ता हाईकोर्ट के मौजूदा जज की अगुवाई में एक SIT (विशेष जांच दल) का गठन किया गया है और पूजा समिति के सचिव समेत 7 लोगों को गिरफ्तार किया गया है।

चोरबागान दुर्गा पंडाल क्यों कहते हैं

कोलकाता के जिस दुर्गा पंडाल में भगदड़ मची वह चोरबागान इलाके में हैं। इसी के चलते इसका नाम चोरबागान दुर्गा पूजा पंडाल है। यह पंडाल 91 साल पुराना है। यह इलाका एक वक्त पर चोरों-डकैतों का अड्डा था। ब्रिटिश काल (18वीं और 19वीं शताब्दी) के दौरान उत्तरी कोलकाता का यह पूरा इलाका घने बाग-बगीचों, झाड़ियों और दलदली भूमि से घिरा हुआ था। उस दौर में यह सुनसान इलाका स्थानीय चोरों, डकैतों और लुटेरों का मुख्य ठिकाना हुआ करता था।

वे शहर के अमीर व्यापारियों या ब्रिटिश अधिकारियों से लूटा हुआ माल इसी घने बाग (बागान) में लाकर छिपाते थे और खुद भी पुलिस से बचने के लिए यहीं शरण लेते थे। पहले इसे ‘चोरों का बागान’ कहा गया फिर इस क्षेत्र में आबादी बस गई। आज यह क्षेत्र कोलकाता के प्रमुख आवासीय और व्यापारिक क्षेत्रों में से एक है और यहां का 91 साल पुराना चोरबागान सार्वजनीन दुर्गोत्सव अपनी भव्य थीम आधारित दुर्गा पूजा के लिए देश भर में जाना जाता है।