मखाना से समृद्धि अभियान के तहत 2030-31 तक निर्यात 30 हजार मीट्रिक टन करने की कोशिश
- पॉप मखाना उत्पादन 91,512 मीट्रिक टन करने का लक्ष्य, प्रसंस्करण और निर्यात को मिलेगा बढ़ावा
- दुनिया में खपत होने वाले मखाने के हर दो पैकेट में से एक पर मिथिला मखाना का जीआई चिह्न लाने की तैयारी
बीपी डेस्क। बिहार का मखाना 20 से अधिक देशों के बाजारों तक पहुंच चुका है। कृषि एवं प्रसंस्कृत खाद्य उत्पाद निर्यात विकास प्राधिकरण (एपीडा) के सहयोग से बिहार सरकार जीआई टैग प्राप्त मिथिला मखाना को अंतर्राष्ट्रीय बाजार में पहचान दिलाने की कोशिश कर रही है। इस वर्ष अमेरिका, कनाडा, ऑस्ट्रेलिया और ग्रीस में बिहार के मखाना उत्पादों का निर्यात हुआ है।
बिहार सरकार मखाना को वैश्विक सुपरफूड बनाने के लिए पांच वर्षीय कार्ययोजना पर काम कर रही है। वित्तीय वर्ष 2026-27 से 2030-31 तक चलने वाले मखाना से समृद्धि अभियान के तहत खेती का क्षेत्रफल दोगुना करने, उत्पादन बढ़ाने और अंतर्राष्ट्रीय बाजार में बिहार की हिस्सेदारी मजबूत करने का लक्ष्य है।
माननीय कृषि मंत्री श्री विजय कुमार सिन्हा ने कहा कि देश के मखाना उत्पादन में बिहार की हिस्सेदारी करीब 80 से 85 प्रतिशत है। वित्तीय वर्ष 2025-26 में भारत ने 7,200 मीट्रिक टन से अधिक मखाना और मूल्यवर्धित उत्पादों का 20 से अधिक देशों को निर्यात किया गया, जिससे 22 मिलियन अमेरिकी डॉलर की आय हुई। अमेरिका, मध्य-पूर्व और अफ्रीका सहित अंतरराष्ट्रीय बाजारों में भारतीय मखाना की मांग बढ़ रही है।
उन्होंने बताया कि इस वर्ष जीआई टैग प्राप्त मिथिला मखाना की खेप अमेरिका, कनाडा, ऑस्ट्रेलिया और ग्रीस पहुंची है। पहली बार बिहटा स्थित बियाडा औद्योगिक क्षेत्र से 18 मीट्रिक टन जीआई टैग प्राप्त मिथिला मखाना की समुद्री खेप ऑस्ट्रेलिया भेजी गई। गुणवत्ता, जीआई पहचान और बाजार संपर्क से किसानों के लिए आय के नए अवसर बन रहे हैं।
करीब 90 करोड़ रुपये से होगा मखाना क्षेत्र का विकास
माननीय मंत्री ने कहा कि अभियान के तहत खेती का क्षेत्रफल वर्ष 2025-26 के 41 हजार हेक्टेयर से बढ़ाकर 2030-31 तक 82 हजार हेक्टेयर करने का लक्ष्य है। इसी अवधि तक पॉप मखाना उत्पादन 91,512 मीट्रिक टन और निर्यात 30 हजार मीट्रिक टन तक पहुंचाने की योजना है। वित्तीय वर्ष 2026-27 की वार्षिक कार्ययोजना में 8,979.68 लाख रुपये का प्रावधान है। इससे उत्पादन सहायता, कटाई के बाद की सुविधाओं, अनुसंधान एवं विकास, ब्रांड विकास और अंतरराष्ट्रीय प्रचार-प्रसार को बढ़ावा दिया जाएगा।
किसानों की आय में 12 गुना से अधिक वृद्धि
उन्होंने बताया कि आंकड़ों के अनुसार, वर्ष 2012-13 में मखाना से किसान की आधारभूत आय 35 हजार रुपये प्रति हेक्टेयर थी, जो 2025-26 में बढ़कर 4,25,750 रुपये प्रति हेक्टेयर हो गई। इस तरह प्रति हेक्टेयर आय में 12 गुना से अधिक वृद्धि दर्ज की गई है।
वैश्विक पहचान मजबूत करने पर जोर
माननीय मंत्री ने कहा कि बिहार विजन-2030 के तहत लक्ष्य है कि दुनिया में खपत होने वाले मखाने के हर दो पैकेट में से एक पर मिथिला मखाना का जीआई चिह्न हो। इससे बिहार के मखाने की क्षेत्रीय पहचान, गुणवत्ता और व्यावसायिक क्षमता को अंतरराष्ट्रीय बाजार में मजबूती मिलेगी।
